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Rampur Bushahar News: जमीन पर नमी न होने से सूखने लगे सेब के पेड़
Sat, 15 Jun 2024 06:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर
Updated Sat, 15 Jun 2024 06:50 PM IST
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तेज धूप पड़ने से बगीचों में लगाए नए पौधे सूखे, फलदार पौधों पर भी संकट
प्राकृति स्रोतों पर पानी न होने से सिंचाई के लिए नहीं पानी, सरकार से मांगी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। सूखे और अत्यधिक गर्मी पड़ने से सेब बागवानी पर संकट पैदा हो गया है। इस कारण बगीचों में नए लगाए पौधे सूख रहे हैं। फलदान पेड़ों में कड़ाके की धूप पड़ने से फल खराब हो रहे हैं। बागवान सेब की फसल पर जलवायु परिवर्तन की मार से परेशान हैं। सर्दियाें में इस बार हिमपात बहुत कम होने से जमीन में नमी नहीं है, जिससे क्षेत्र के बगीचों में सेब के पौधे सूख रहे हैं। प्राकृतिक स्रोतों में पानी की कमी के कारण बागवानों को सिंचाई के लिए पानी की कोई उपलब्धता नहीं है। किसान और बागवान संगठनों ने सरकार से सूखे से निपटने के इंतजाम करके आपात घोषणाएं की जाए। प्रदेश संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि लगातार सूखे से बागवानी संकट में है। अभी तक बागवानों का करोड़ों का नुकसान हो चुका है। विभाग नुकसान का आकलन करे और बागवानों को मुआवजा भी दे। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि जहां पर संभव हो सके बागवान सेब के पौधो में सिंचाई करें। पौधों के तने के आसपास घास बिछा कर जमीन को ढक कर रखें। इसके अलावा बगीचों में दवाइयों का छिड़काव न करें। सूखे के दौरान बगीचों में अनावश्यक छेड़छाड़ न करें।
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प्राकृति स्रोतों पर पानी न होने से सिंचाई के लिए नहीं पानी, सरकार से मांगी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। सूखे और अत्यधिक गर्मी पड़ने से सेब बागवानी पर संकट पैदा हो गया है। इस कारण बगीचों में नए लगाए पौधे सूख रहे हैं। फलदान पेड़ों में कड़ाके की धूप पड़ने से फल खराब हो रहे हैं। बागवान सेब की फसल पर जलवायु परिवर्तन की मार से परेशान हैं। सर्दियाें में इस बार हिमपात बहुत कम होने से जमीन में नमी नहीं है, जिससे क्षेत्र के बगीचों में सेब के पौधे सूख रहे हैं। प्राकृतिक स्रोतों में पानी की कमी के कारण बागवानों को सिंचाई के लिए पानी की कोई उपलब्धता नहीं है। किसान और बागवान संगठनों ने सरकार से सूखे से निपटने के इंतजाम करके आपात घोषणाएं की जाए। प्रदेश संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि लगातार सूखे से बागवानी संकट में है। अभी तक बागवानों का करोड़ों का नुकसान हो चुका है। विभाग नुकसान का आकलन करे और बागवानों को मुआवजा भी दे। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि जहां पर संभव हो सके बागवान सेब के पौधो में सिंचाई करें। पौधों के तने के आसपास घास बिछा कर जमीन को ढक कर रखें। इसके अलावा बगीचों में दवाइयों का छिड़काव न करें। सूखे के दौरान बगीचों में अनावश्यक छेड़छाड़ न करें।