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Rampur Bushahar News: सेब के बगीचों में वूली एफिड का प्रकोप, पौधों का चूस रहा रस, बागवान चिंतित
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पेड़ों की टहनियों पर रूई जैसी परत के रूप में दिखाई दे रहे कीट
अगले सीजन की फल उत्पादन क्षमता पर पड़ सकता है असर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। सेब के बगीचों में इन दिनों वूली एफिड का प्रकोप बढ़ गया है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। यह कीट पेड़ों की टहनियों और शाखाओं पर सफेद, रूई जैसी परत के रूप में दिखाई दे रहे हैं। संक्रमण अधिक होने पर प्रभावित शाखाओं की बढ़त कमजोर पड़ सकती है। इससे अगले सीजन की फल उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। वूली एफिड एक रस चूसने वाला कीट है। यह सेब के पेड़ की कोमल टहनियों, शाखाओं और तने से रस चूसता है। संक्रमण की पहचान शाखाओं पर सफेद रूईनुमा गुच्छों से होती है। इनके नीचे मौजूद कीट पौधे का रस चूसते हैं। इससे प्रभावित हिस्से कमजोर होने लगते हैं। अधिक प्रकोप होने पर शाखाओं पर गांठें बन सकती हैं। इससे पौधे की सामान्य वृद्धि प्रभावित होती है।
बागवानों का कहना है कि इस बार कई बगीचों में तुड़ान के बाद भी वूली एफिड दिख रहा है। फल पेड़ों पर होने के कारण किसान इसके नियंत्रण को लेकर सतर्क हैं। उद्यान विकास अधिकारी यशवंत बंगीटा ने नियमित निगरानी की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि टहनियों, शाखाओं और तने के जोड़ वाले हिस्सों को जांचें। जहां सफेद रूई जैसी परत दिखे, वहां समय पर नियंत्रण उपाय करें। बंगीटा ने फल तुड़ान के बाद बगीचे की सफाई करने को कहा। सूखी और अत्यधिक संक्रमित शाखाओं को हटाना भी जरूरी है। कीट नियंत्रण के लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुशंसित दवाओं का ही प्रयोग करें और अलग-अलग दवाओं को मिलाकर छिड़काव करने से बचें। बागवानी विशेषज्ञ ने स्वयं उपचार करने के बजाय विभागीय विशेषज्ञ से सलाह लेने की अपील की है। उन्होंने फलों पर किसी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करने की भी सलाह दी है।
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अगले सीजन की फल उत्पादन क्षमता पर पड़ सकता है असर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। सेब के बगीचों में इन दिनों वूली एफिड का प्रकोप बढ़ गया है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। यह कीट पेड़ों की टहनियों और शाखाओं पर सफेद, रूई जैसी परत के रूप में दिखाई दे रहे हैं। संक्रमण अधिक होने पर प्रभावित शाखाओं की बढ़त कमजोर पड़ सकती है। इससे अगले सीजन की फल उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। वूली एफिड एक रस चूसने वाला कीट है। यह सेब के पेड़ की कोमल टहनियों, शाखाओं और तने से रस चूसता है। संक्रमण की पहचान शाखाओं पर सफेद रूईनुमा गुच्छों से होती है। इनके नीचे मौजूद कीट पौधे का रस चूसते हैं। इससे प्रभावित हिस्से कमजोर होने लगते हैं। अधिक प्रकोप होने पर शाखाओं पर गांठें बन सकती हैं। इससे पौधे की सामान्य वृद्धि प्रभावित होती है।
बागवानों का कहना है कि इस बार कई बगीचों में तुड़ान के बाद भी वूली एफिड दिख रहा है। फल पेड़ों पर होने के कारण किसान इसके नियंत्रण को लेकर सतर्क हैं। उद्यान विकास अधिकारी यशवंत बंगीटा ने नियमित निगरानी की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि टहनियों, शाखाओं और तने के जोड़ वाले हिस्सों को जांचें। जहां सफेद रूई जैसी परत दिखे, वहां समय पर नियंत्रण उपाय करें। बंगीटा ने फल तुड़ान के बाद बगीचे की सफाई करने को कहा। सूखी और अत्यधिक संक्रमित शाखाओं को हटाना भी जरूरी है। कीट नियंत्रण के लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुशंसित दवाओं का ही प्रयोग करें और अलग-अलग दवाओं को मिलाकर छिड़काव करने से बचें। बागवानी विशेषज्ञ ने स्वयं उपचार करने के बजाय विभागीय विशेषज्ञ से सलाह लेने की अपील की है। उन्होंने फलों पर किसी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करने की भी सलाह दी है।
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