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Rampur Bushahar News: देवताओं के अभिनंदन में ग्रामीणों ने मशालें लेकर रातभर किया नृत्य
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देवता पवासी, देवता महासू के मंदिरों में धूमधाम से मनाया जागरा
संवाद न्यूज एजंसी
रोहड़ू। क्षेत्र में पारंपरिक जागरा महोत्सव का दौर आरंभ हो गया है। शुक्रवार रात को क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर देवता महासू, देवता पवासी और देवता गुडारू के मंदिरों में जागरा महोत्सव मनाया गया। गांवों में देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों ने हाथों में जलती मशालें लेकर देवता के अभिनंदन में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धूनों पर रातभर जमकर नृत्य किया। शराचली क्षेत्र के झगटान गांव में शनिवार सात सितंबर को देवता देशमौलिया के मंदिर में जागरा उत्सव आयोजित होगा। आठ सितंबर को पुजारली में देवता बनाड़ का जागरा मनाया जाएगा।
जागरा महोत्सव हर वर्ष गणेश चतुर्थी से दो दिन पहले आरंभ होता है। रोहडू, चिड़गांव, नावर व जुब्बल क्षेत्र के अधिकांश गांवों में जागरा महोत्सव मनाया जाता है। हर गांव में अपने-अपने कुलिष्ठ देवता की ग्रामीणों ने विशेष रूप से पूजा-अर्चना की। मान्यता के अनुसार जागरे का आयोजन रात को ही किया जाता है। शुक्रवार रात जुब्बल तहसील के भोलाड़ गांव में भी देवता महाराज पवासी का जागरा उत्सव आयोजित हुआ। इसमें अपने कुलिष्ठ देवता का आशीर्वाद प्राप्त कर गांव में सुख-समृद्धि लाने के लिए ग्रामीण रातभर तू बरमा न जाए विरसुए लोक गीत पर हाथ में जलती हुई मशालें लिए नृत्य करते रहे। यह पारंपरिक गीत देवता की स्वीकृति मिलने के बाद विशेष रूप से जागरा महोत्सव में गाया जाता है। देवता महासू के गुर हरीश हंसरेटा ने बताया कि जागरा उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है। यह परंपरा आज भी बरकरार है। हर गांव के लोग अपने कुलिष्ठ देवता के अभिनंदन में जागरा महोत्सव मनाते हैं। सोमवार रात पवासी देवता, महासु देवता व गुडारू देवता के मंदिरों में जागरा उत्सव मनाया गया।
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संवाद न्यूज एजंसी
रोहड़ू। क्षेत्र में पारंपरिक जागरा महोत्सव का दौर आरंभ हो गया है। शुक्रवार रात को क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर देवता महासू, देवता पवासी और देवता गुडारू के मंदिरों में जागरा महोत्सव मनाया गया। गांवों में देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों ने हाथों में जलती मशालें लेकर देवता के अभिनंदन में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धूनों पर रातभर जमकर नृत्य किया। शराचली क्षेत्र के झगटान गांव में शनिवार सात सितंबर को देवता देशमौलिया के मंदिर में जागरा उत्सव आयोजित होगा। आठ सितंबर को पुजारली में देवता बनाड़ का जागरा मनाया जाएगा।
जागरा महोत्सव हर वर्ष गणेश चतुर्थी से दो दिन पहले आरंभ होता है। रोहडू, चिड़गांव, नावर व जुब्बल क्षेत्र के अधिकांश गांवों में जागरा महोत्सव मनाया जाता है। हर गांव में अपने-अपने कुलिष्ठ देवता की ग्रामीणों ने विशेष रूप से पूजा-अर्चना की। मान्यता के अनुसार जागरे का आयोजन रात को ही किया जाता है। शुक्रवार रात जुब्बल तहसील के भोलाड़ गांव में भी देवता महाराज पवासी का जागरा उत्सव आयोजित हुआ। इसमें अपने कुलिष्ठ देवता का आशीर्वाद प्राप्त कर गांव में सुख-समृद्धि लाने के लिए ग्रामीण रातभर तू बरमा न जाए विरसुए लोक गीत पर हाथ में जलती हुई मशालें लिए नृत्य करते रहे। यह पारंपरिक गीत देवता की स्वीकृति मिलने के बाद विशेष रूप से जागरा महोत्सव में गाया जाता है। देवता महासू के गुर हरीश हंसरेटा ने बताया कि जागरा उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है। यह परंपरा आज भी बरकरार है। हर गांव के लोग अपने कुलिष्ठ देवता के अभिनंदन में जागरा महोत्सव मनाते हैं। सोमवार रात पवासी देवता, महासु देवता व गुडारू देवता के मंदिरों में जागरा उत्सव मनाया गया।
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