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सेना ने खिमलोगा दर्रे से निकाला ट्रेक्टर का शव
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खिमलोगा दर्रे से लाए ट्रैकर के शव छितकुल पहुंचाने के बाद गाड़ी में डालते हुए सैन्य दल। संवाद
- फोटो : RAMPUR-HP
सांगला (किन्नौर)। 5248 मीटर की ऊंचाई में ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सेना ने तीन दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में आखिरकार पश्चिम बंगाल के ट्रैकर का शव निकालने में कामयाबी हासिल की है। रविवार को सेना ने शव को सांगला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
ट्रैकरों का यह दल 28 अगस्त को उत्तरकाशी के लिवाड़ी से किन्नौर के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान दो सितंबर को खिमलोगा में रोप रैपलिंग करते समय एक ट्रैकर का हाथ फिसल गया, जिससे वह ग्लेशियर के बीच बनी खाई में जा गिरा। इसके साथ ही एक अन्य ट्रैकर घायल हो गया। इसके बाद पांच सितंबर को इनमें से तीन लोग कई घंटे पैदल चलकर छितकुल पहुंचे और इस बारे में प्रशासन को सूचित किया गया।
इसके बाद प्रशासन ने बचाव टीम को भेजकर पांच ट्रैकरों और अन्यों को रेस्क्यू किया लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शव को नहीं निकाला जा सका। इसके बाद सेना के जवानों ने तीन दिन तक हर रोज 15 से 16 घंटे पैदल चलकर ग्लेशियर में बनी खाई से शव को कड़ी मशक्कत के बाहर निकाला।
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उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक के आग्रह पर डोगरा स्काउट्स, ट्राइपीक ब्रिगेड, सूर्या कमांड ने खिमलोगा पहाड़ पर असंभव लगने वाले इस अभियान को पूरा किया है। तहसीलदार बीएल नेगी ने बताया कि प्रशासन ने फौरी राहत के तौर पर मृतक सुजॉय डुले के भाई संजय डुले को सौंप दिया गया है। इसके साथ ही परिजनों को 20,000 रुपये की राशि प्रदान की गई है। उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि सेना ने तीन दिन कड़ी मशक्कत के बाद शव का निकालने में कामयाबी हासिल की है।
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ट्रैकरों का यह दल 28 अगस्त को उत्तरकाशी के लिवाड़ी से किन्नौर के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान दो सितंबर को खिमलोगा में रोप रैपलिंग करते समय एक ट्रैकर का हाथ फिसल गया, जिससे वह ग्लेशियर के बीच बनी खाई में जा गिरा। इसके साथ ही एक अन्य ट्रैकर घायल हो गया। इसके बाद पांच सितंबर को इनमें से तीन लोग कई घंटे पैदल चलकर छितकुल पहुंचे और इस बारे में प्रशासन को सूचित किया गया।
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इसके बाद प्रशासन ने बचाव टीम को भेजकर पांच ट्रैकरों और अन्यों को रेस्क्यू किया लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शव को नहीं निकाला जा सका। इसके बाद सेना के जवानों ने तीन दिन तक हर रोज 15 से 16 घंटे पैदल चलकर ग्लेशियर में बनी खाई से शव को कड़ी मशक्कत के बाहर निकाला।
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उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक के आग्रह पर डोगरा स्काउट्स, ट्राइपीक ब्रिगेड, सूर्या कमांड ने खिमलोगा पहाड़ पर असंभव लगने वाले इस अभियान को पूरा किया है। तहसीलदार बीएल नेगी ने बताया कि प्रशासन ने फौरी राहत के तौर पर मृतक सुजॉय डुले के भाई संजय डुले को सौंप दिया गया है। इसके साथ ही परिजनों को 20,000 रुपये की राशि प्रदान की गई है। उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि सेना ने तीन दिन कड़ी मशक्कत के बाद शव का निकालने में कामयाबी हासिल की है।