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तकलेच पंचायत की प्रधान बर्खास्त
Updated Sat, 07 Jul 2018 09:56 PM IST
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रामपुर बुशहर। जिला उपायुक्त शिमला अमित कश्यप ने रामपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत तकलेच की प्रधान पवना कुमारी को निष्कासित कर दिया है। प्रधान पर मनरेगा के तहत पौधरोपण में गड़बड़ी सहित कई अन्य आरोप लगने के बाद डीसी ने यह कार्रवाई की है।
पंचायत प्रधान की सभी शक्तियां अब उप प्रधान कृष्ण मझटू को दे दी गई है। निष्कासित प्रधान को निर्देश दिए गए हैं कि वह पंचायत के सभी कागजात और मुहर तत्काल उपप्रधान के सुपुर्द कर दे। वहीं उपायुक्त के इस फैसले के खिलाफ निष्कासित प्रधान 30 दिन के भीतर यह मामला शिमला के मंडलायुक्त के पास ले जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि तकलेच पंचायत प्रधान पवना कुमारी पर लगे आरोपों की जांच रामपुर एसडीएम ने की थी। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त शिमला को सौंपी गई।
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बीडीओ रामपुर केआर कपूर ने पुष्टि करते हुए बताया कि तकलेच पंचायत प्रधान को आरोपों के बाद डीसी ने निष्कासित कर दिया है। पंचायत उपप्रधान को प्रधान की सारी शक्तियां हस्तांतरित कर दी गई हैं। इस कार्रवाई की प्रति प्रधान को भेजी जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा के तहत 1,54,380 रुपये की राशि का अनियमित भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधान ने मनरेगा के दिशा-निर्देशों के पैरा 7.5 और 7.13 का उल्लंघन किया है। इसके अलावा 14वें वित्त आयोग के तहत शैल्फों का अनुमोदन बिना ग्राम सभा के किया है। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में कहा है कि पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 10 में स्पष्ट किया गया है कि सचिव, प्रधान के संपूर्ण पर्यवेक्षण के अधीन ग्राम सभा या ग्राम पंचायत के सभी दस्तावेजों के रखरखाव के लिए उत्तरदायी होंगे। इसमें कहा गया है कि यद्यपि चूक की है, तो ऐसे में प्रधान भी पर्यवेक्षण न करने के लिए बराबर उत्तरदायी है। इसके अलावा प्रधान पर आरोप लगा है कि पंचायत सचिव के साथ मिलकर अभिलेखों को बदलने, नष्ट करने और हेराफेरी की गई है। इस आरोप की जांच करने के बाद रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी ने जून 2016 में संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत मस्टररोल संख्या 17481 के तहत 25,160 रुपये रिकॉर्ड में विद्यमान पाए गए। इसको तकनीकी सहायक ने अनुमोदित किया था, जबकि आरोपित पदाधिकारी ने दूसरी ओर उसी मस्टररोल से निर्माण मंदिर खंटू देवता सरी के लिए 25,160 रुपये दर्शाई है। प्रधान ने हस्ताक्षरित कर मस्टररोल की अदायगी नहीं की। इससे सिद्ध होता है कि यह मस्टररोल जानबूझ कर किसी गुप्त उद्देश्य के लिए रिकॉर्ड में लिया गया। जांच अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सफाई का कार्य किया गया है या नहीं, यह पता लगाना कठिन है। इसके अलावा 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत धन का दुरुपयोग किया गया है। इसके तहत पंचायत के लिए सोलर लाइटें खरीदने से पूर्व निविदाएं और अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया।
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पंचायत प्रधान की सभी शक्तियां अब उप प्रधान कृष्ण मझटू को दे दी गई है। निष्कासित प्रधान को निर्देश दिए गए हैं कि वह पंचायत के सभी कागजात और मुहर तत्काल उपप्रधान के सुपुर्द कर दे। वहीं उपायुक्त के इस फैसले के खिलाफ निष्कासित प्रधान 30 दिन के भीतर यह मामला शिमला के मंडलायुक्त के पास ले जा सकती है।
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उल्लेखनीय है कि तकलेच पंचायत प्रधान पवना कुमारी पर लगे आरोपों की जांच रामपुर एसडीएम ने की थी। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त शिमला को सौंपी गई।
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बीडीओ रामपुर केआर कपूर ने पुष्टि करते हुए बताया कि तकलेच पंचायत प्रधान को आरोपों के बाद डीसी ने निष्कासित कर दिया है। पंचायत उपप्रधान को प्रधान की सारी शक्तियां हस्तांतरित कर दी गई हैं। इस कार्रवाई की प्रति प्रधान को भेजी जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा के तहत 1,54,380 रुपये की राशि का अनियमित भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधान ने मनरेगा के दिशा-निर्देशों के पैरा 7.5 और 7.13 का उल्लंघन किया है। इसके अलावा 14वें वित्त आयोग के तहत शैल्फों का अनुमोदन बिना ग्राम सभा के किया है। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में कहा है कि पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 10 में स्पष्ट किया गया है कि सचिव, प्रधान के संपूर्ण पर्यवेक्षण के अधीन ग्राम सभा या ग्राम पंचायत के सभी दस्तावेजों के रखरखाव के लिए उत्तरदायी होंगे। इसमें कहा गया है कि यद्यपि चूक की है, तो ऐसे में प्रधान भी पर्यवेक्षण न करने के लिए बराबर उत्तरदायी है। इसके अलावा प्रधान पर आरोप लगा है कि पंचायत सचिव के साथ मिलकर अभिलेखों को बदलने, नष्ट करने और हेराफेरी की गई है। इस आरोप की जांच करने के बाद रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी ने जून 2016 में संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत मस्टररोल संख्या 17481 के तहत 25,160 रुपये रिकॉर्ड में विद्यमान पाए गए। इसको तकनीकी सहायक ने अनुमोदित किया था, जबकि आरोपित पदाधिकारी ने दूसरी ओर उसी मस्टररोल से निर्माण मंदिर खंटू देवता सरी के लिए 25,160 रुपये दर्शाई है। प्रधान ने हस्ताक्षरित कर मस्टररोल की अदायगी नहीं की। इससे सिद्ध होता है कि यह मस्टररोल जानबूझ कर किसी गुप्त उद्देश्य के लिए रिकॉर्ड में लिया गया। जांच अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सफाई का कार्य किया गया है या नहीं, यह पता लगाना कठिन है। इसके अलावा 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत धन का दुरुपयोग किया गया है। इसके तहत पंचायत के लिए सोलर लाइटें खरीदने से पूर्व निविदाएं और अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया।