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Rampur Bushahar News: सात राज्यों के किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग में दक्ष बनाएगा सीपीआरआई

Fri, 17 Apr 2026 11:26 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:26 PM IST
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. केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान चला रहा व्यापक जागरूकता अभियान
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. ग्रामीण स्तर पर बैठकें, खेत प्रदर्शन और अपेक्षाकृत कम उर्वरकों के इस्तेमाल बारे करेंगे प्रशिक्षित
. 12 टीमें 45 दिन तक किसानों से करेगी सीधा संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग(रामपुर बुशहर)। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) सात राज्यों के किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग में दक्ष बनाएगा। किसानों को उर्वरक के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्थान ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य अत्यधिक उर्वरक उपयोग से उत्पन्न हो रही समस्याओं, इसके मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। कुफरी में निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह की अध्यक्षता में आईसीएआर की उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें इस अभियान की रणनीति की समीक्षा की गई। निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि अभियान के तहत किसानों को अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती और ऐसे वैकल्पिक उपायों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम कर सकें। इस अभियान की शुरुआत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। फसल उत्पादन प्रमुख डॉ. जगदेव शर्मा ने बताया कि किसानों को ऐसी फसल योजना (क्रॉप प्लानिंग) के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिसमें अपेक्षाकृत कम उर्वरकों की आवश्यकता होती है। इस कार्यक्रम के तहत गांव स्तर पर बैठकें, खेत प्रदर्शन और संवादात्मक सत्र के आयोजन किए जाएंगे ताकि किसानों में मृदा स्वास्थ्य सुधार को लेकर जागरूकता और क्षमता का विकास हो सके। सामाजिक विज्ञान प्रमुख डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि मेरा गांव-मेरा गौरव तहत 12 टीमें 45 दिनों तक फील्ड में रहकर किसानों के साथ सीधे संवाद करेंगी और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देंगी। यह अभियान संस्थान के छह क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, मेघालय और बिहार में चलाया जाएगा। डॉ. पिन ऑन्ग लांग ने बताया कि प्रभावी नारों के माध्यम से जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन संचार को मजबूत किया जाएगा और किसानों के साथ नियमित संवाद और जमीनी स्तर पर बेहतर प्रथाओं के प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सीपीआरआई के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पहल न केवल मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाएगी, बल्कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने और लागत घटाने में भी सहायक होगी। इससे सतत कृषि को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय एवं समृद्धि में वृद्धि होगी।
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