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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के मामले में आरोपी को एक साल की कैद
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निचली अदालत से मिली सजा को अपीलीय अदालत ने रखा बरकरार
दो लाख रुपये का मुआवजा देने का भी दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को निचली अदालत से मिली सजा को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा है। रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर ने आरोपी दयानंद की अपील खारिज करते हुए उन्हें एक साल की साधारण कैद और दो लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। दयानंद को पांच अक्तूबर को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।
निचली अदालत ने पांच दिसंबर 2025 को दयानंद को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें शिकायतकर्ता अशोक कुमार को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। मुआवजा न देने की स्थिति में दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद का प्रावधान था। शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2022 में दयानंद ने उनसे करीब डेढ़ लाख रुपये के रासायनिक और कीटनाशक खरीदे थे। दयानंद ने 1:50 लाख रुपये का चेक दिया था। यह चेक अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया था। इसके बाद अशोक कुमार ने दयानंद को कानूनी नोटिस भेजा था। दयानंद ने अपने बचाव में कहा था कि उन्होंने भुगतान कर दिया था और चेक सुरक्षा के लिए दिया गया था, जिसका दुरुपयोग किया गया।
निचली अदालत ने दयानंद को दोषी पाया था। दयानंद ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि शिकायत समय-सीमा से बाहर थी और प्रक्रिया में भी खामियां थीं। अपीलीय अदालत ने निचली अदालत के रिकॉर्ड की समीक्षा की।
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अपीलीय अदालत ने पाया कि दयानंद का बचाव विश्वसनीय नहीं था। अदालत ने कहा कि भुगतान होने पर कोई भी व्यक्ति अपना खाली सुरक्षा चेक वापस लेना नहीं भूलता। शिकायतकर्ता ने अपने दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश किए। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि दयानंद ने केवल समय हासिल करने के लिए मामले को लड़ा। इसलिए निचली अदालत का फैसला सही था।
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दो लाख रुपये का मुआवजा देने का भी दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को निचली अदालत से मिली सजा को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा है। रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर ने आरोपी दयानंद की अपील खारिज करते हुए उन्हें एक साल की साधारण कैद और दो लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। दयानंद को पांच अक्तूबर को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।
निचली अदालत ने पांच दिसंबर 2025 को दयानंद को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें शिकायतकर्ता अशोक कुमार को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। मुआवजा न देने की स्थिति में दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद का प्रावधान था। शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2022 में दयानंद ने उनसे करीब डेढ़ लाख रुपये के रासायनिक और कीटनाशक खरीदे थे। दयानंद ने 1:50 लाख रुपये का चेक दिया था। यह चेक अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया था। इसके बाद अशोक कुमार ने दयानंद को कानूनी नोटिस भेजा था। दयानंद ने अपने बचाव में कहा था कि उन्होंने भुगतान कर दिया था और चेक सुरक्षा के लिए दिया गया था, जिसका दुरुपयोग किया गया।
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निचली अदालत ने दयानंद को दोषी पाया था। दयानंद ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि शिकायत समय-सीमा से बाहर थी और प्रक्रिया में भी खामियां थीं। अपीलीय अदालत ने निचली अदालत के रिकॉर्ड की समीक्षा की।
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अपीलीय अदालत ने पाया कि दयानंद का बचाव विश्वसनीय नहीं था। अदालत ने कहा कि भुगतान होने पर कोई भी व्यक्ति अपना खाली सुरक्षा चेक वापस लेना नहीं भूलता। शिकायतकर्ता ने अपने दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश किए। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि दयानंद ने केवल समय हासिल करने के लिए मामले को लड़ा। इसलिए निचली अदालत का फैसला सही था।