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Rampur Bushahar News: लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोपी बरी, बिना लाइसेंस पर एक हजार जुर्माना
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जांच अधिकारी और कांस्टेबल के बयानों में भी पाए गए विरोधाभास
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। ठियोग की अदालत ने 2018 के एक सड़क दुर्घटना के मामले में आरोपी को लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि, उसे बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने का दोषी पाया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ठियोग ने फैसला सुनाते हुए दोषी को एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
अभियोजन पक्ष ने अंकुश पर भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 338 के तहत तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप लगाया था। आरोप था कि 18 मार्च, 2018 को दोपहर करीब 3:25 बजे छैला के पास उसकी ऑल्टो कार सड़क से नीचे गिरि गंगा नदी में गिर गई। इस दुर्घटना में अंकुश और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए थे। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
शिकायतकर्ता और एकमात्र स्वतंत्र गवाह ने दुर्घटना होते हुए नहीं देखा था। दोनों गवाहों ने जिरह के दौरान कहा कि वे दुर्घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। जांच अधिकारी और कांस्टेबल के बयानों में भी विरोधाभास पाए गए। पुलिस की ओर से स्वतंत्र गवाहों को शामिल न करना भी अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। गाड़ी की मेकेनिकल जांच में पांच दिन की देरी भी अभियोजन के खिलाफ गई।
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अदालत ने अंकुश को बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 के तहत दोषी ठहराया। आरोपी ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि वह दुर्घटना वाले दिन गाड़ी चला रहा था। जांच के दौरान और अदालत में भी वह अपना वैध ड्राइविंग लाइसेंस पेश नहीं कर सका। दोषी अंकुश पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसे उसने अदालत में ही अदा कर दिया। जुर्माना न भरने पर उसे पांच दिन की जेल की सजा भुगतनी पड़ती।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। ठियोग की अदालत ने 2018 के एक सड़क दुर्घटना के मामले में आरोपी को लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि, उसे बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने का दोषी पाया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ठियोग ने फैसला सुनाते हुए दोषी को एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
अभियोजन पक्ष ने अंकुश पर भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 338 के तहत तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप लगाया था। आरोप था कि 18 मार्च, 2018 को दोपहर करीब 3:25 बजे छैला के पास उसकी ऑल्टो कार सड़क से नीचे गिरि गंगा नदी में गिर गई। इस दुर्घटना में अंकुश और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए थे। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
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शिकायतकर्ता और एकमात्र स्वतंत्र गवाह ने दुर्घटना होते हुए नहीं देखा था। दोनों गवाहों ने जिरह के दौरान कहा कि वे दुर्घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। जांच अधिकारी और कांस्टेबल के बयानों में भी विरोधाभास पाए गए। पुलिस की ओर से स्वतंत्र गवाहों को शामिल न करना भी अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। गाड़ी की मेकेनिकल जांच में पांच दिन की देरी भी अभियोजन के खिलाफ गई।
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अदालत ने अंकुश को बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 के तहत दोषी ठहराया। आरोपी ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि वह दुर्घटना वाले दिन गाड़ी चला रहा था। जांच के दौरान और अदालत में भी वह अपना वैध ड्राइविंग लाइसेंस पेश नहीं कर सका। दोषी अंकुश पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसे उसने अदालत में ही अदा कर दिया। जुर्माना न भरने पर उसे पांच दिन की जेल की सजा भुगतनी पड़ती।