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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल की कैद
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पेट्रोल पंप से भरवाए ईंधन के भुगतान के लिए दिया था चेक
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के एक मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी को एक साल की साधारण कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को शिकायतकर्ता महिला को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। मामला दो लाख रुपये के चेक के अनादरण से संबंधित है। शिकायतकर्ता महिला पेट्रोल पंप की मालिक हैं। आरोपी पवन कुमार ने उनके पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाया था। कुल दो लाख रुपये का भुगतान करने के लिए आरोपी ने 12 दिसंबर 2022 को एक चेक जारी किया। यह चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने बार-बार भुगतान की मांग की। इसके बाद 12 जनवरी 2023 को आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा-138 के तहत कानूनी मांग नोटिस भेजा गया। नोटिस मिलने के बावजूद उसने कोई भुगतान नहीं किया। अदालत में शिकायतकर्ता ने बताया कि नेगी 2020 से 2022 तक उनके पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाते थे। आरोपी ने वित्तीय कमी का हवाला देते हुए दो लाख रुपये का चेक दिया था। आरोपी बचाव में कहा कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूरा भुगतान कर दिया था। हालांकि, वह अपने दावे को साबित करने के लिए बैंक से कोई गवाह या मूल रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया। अदालत ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत चेक के ऋण या दायित्व के निर्वहन में जारी होने की धारणा होती है। आरोपी इस धारणा को खंडित करने में विफल रहा है। अदालत ने शिकायतकर्ता के मामले को संदेह से परे साबित पाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के एक मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी को एक साल की साधारण कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को शिकायतकर्ता महिला को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। मामला दो लाख रुपये के चेक के अनादरण से संबंधित है। शिकायतकर्ता महिला पेट्रोल पंप की मालिक हैं। आरोपी पवन कुमार ने उनके पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाया था। कुल दो लाख रुपये का भुगतान करने के लिए आरोपी ने 12 दिसंबर 2022 को एक चेक जारी किया। यह चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने बार-बार भुगतान की मांग की। इसके बाद 12 जनवरी 2023 को आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा-138 के तहत कानूनी मांग नोटिस भेजा गया। नोटिस मिलने के बावजूद उसने कोई भुगतान नहीं किया। अदालत में शिकायतकर्ता ने बताया कि नेगी 2020 से 2022 तक उनके पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाते थे। आरोपी ने वित्तीय कमी का हवाला देते हुए दो लाख रुपये का चेक दिया था। आरोपी बचाव में कहा कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूरा भुगतान कर दिया था। हालांकि, वह अपने दावे को साबित करने के लिए बैंक से कोई गवाह या मूल रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया। अदालत ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत चेक के ऋण या दायित्व के निर्वहन में जारी होने की धारणा होती है। आरोपी इस धारणा को खंडित करने में विफल रहा है। अदालत ने शिकायतकर्ता के मामले को संदेह से परे साबित पाया।