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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Compensation for land acquisition was not paid. Orders for the seizure of government properties

Rampur Bushahar News: भूमि अधिग्रहण का नहीं दिया मुआवजा सरकारी संपत्तियों की कुर्की के आदेश

Wed, 25 Feb 2026 11:43 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 11:43 PM IST
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सड़क बनने के बाद लोक निर्माण विभाग ने भूमालिक को नहीं किया करीब तीन करोड़ का भुगतान
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रोहड़ू की अदालत ने ने रेस्ट हाउस, विभाग का कार्यालय अटेच करने को कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं देने पर अदालत ने सरकारी संपत्तियों की कुर्की का आदेश दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा से जुड़े दो निष्पादन प्रकरणों में आदेश दिया। न्यायालय ने दो भूमि मालिकों की ओर से दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया है। अदालत ने 18 फरवरी 2026 को पारित आदेश में संबंधित विभागों को कार्रवाई की रिपोर्ट 17 मार्च 2026 तक न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है। पहले मामले में शिकायतकर्ता चेत राम, निवासी गांव शलाड, तहसील जुब्बल और दूसरे मामले में राजेश कुमार हैं। दोनों मामलों में जजमेंट डेब्टर के रूप में हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ लोक निर्माण विभाग साउथ जोन, शिमला के भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, जिला कलेक्टर शिमला और लोक निर्माण विभाग जुब्बल डिविजन के कार्यकारी अभियंता को पक्षकार बनाया गया है। अदालत के आदेश के तहत लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह जुब्बल, हाटकोटी, खड़ापत्थर और अधिशासी अभियंता कार्यालय जुब्बल डिविजन से संबंधित संपत्तियों के विरुद्ध कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। दोनों निष्पादन प्रकरणों में कुल मिलाकर लगभग तीन करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देय बताई गई है। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार नंदपुर पंचायत में वर्ष 1988-89 में बलाई गांव के लिए सड़क निर्माण के दौरान वादियों के फलदार बगीचों को काट दिया गया था। आरोप है कि इसके बदले उचित मुआवजा समय पर नहीं दिया गया। वर्ष 2012 में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी कथित रूप से बहुत कम राशि का भुगतान हुआ, जिससे असंतुष्ट होकर वादियों को दोबारा न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। लंबे कानूनी लड़ाई के बाद अब अदालत से उनके पक्ष में आदेश किया है। अदालत की ओर से कहा गया कि भुगतान समय पर न होने के कारण विभाग के तीन विश्राम गृह और एक कार्यालय को इसमें अटैच किया जाए। इस मामले को लेकर सरकार से 17 मार्ग पर न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कहना गया है। भूमि मालिकों की ओर से मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील मोहन गोयल और अधिवक्ता उमेश शर्मा ने की। वादी पक्ष ने अदालत के आदेश को न्याय की जीत बताते हुए उम्मीद जताई है कि अब उन्हें उनका लंबित मुआवजा शीघ्र प्राप्त होगा।
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