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Rampur Bushahar News: लिप्पा के भोंगती नाले में बादल फटने आई बाढ़, सेब समेत हजारों फलदार पौधे बहे
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लिप्पा गांव के नजदीक बादल फटनें से क्षतिग्रस्त सेब के बगीचें । संवाद
सेब के बगीचे में बनी कुटिया में रह रहे दो मजदूर मलबे में दबे, सुरक्षित बाहर निकाले
बाढ़ की चपेट में आने से आलू, मटर, ओगला, फाफरा सहित अन्य फसलें तबाह
पंचायत के 60 बागवानों को करोड़ों का नुकसान, सरकार से राहत की गुहार
ग्रामीणों के अनाज से भरे छह कुठार और एक आरा मशीन भी बाढ़ से क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)।
जिले में बादल फटने और बाढ़ आने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। शुक्रवार सुबह किन्नौर जिले की लिप्पा गांव में बादल फटने से बाढ़ आ गई। इसमें बागवानों के सेब समेत हजारों फलदार पौधे बह गए। किसानों की नकदी फसलें बाढ़ से तबाह हो गई हैं, जबकि बाढ़ के मलबे में फंसे दो कश्मीरी मजदूरों को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाला है। इस आपदा से करोड़ों रुपये की क्षति पहुंची है। वहीं, राजस्व विभाग की टीम पंचायत पहुंच कर नुकसान का आकलन करने में जुट गई है। किन्नौर जिले की लिप्पा पंचायत के पनस सेरिंग क्षेत्र में सुबह करीब छह बजे अचानक तेज गड़गड़हाटों के साथ बादल फटा। बादल फटने से भोंगती नाले में अचानक बाढ़ आ गई और लिप्पा गांव में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। गनीमत रही कि यह घटना रात को नहीं हुई, वर्ना राहत कार्य करना मुश्किल हो जाता। बाढ़ से मची तबाही के कारण 60 बागवानों के हजारों सेब, नाशपाती, खुमानी, बादाम समेत हजारों फलदार पौधे बाढ़ में बह गए। इसके अलावा ग्रामीणों की ओगला, फाफरा, राजमाह, मटर और आलू की फसल भी पूरी तरह से तबाह हो गई है। सुबह जब बाढ़ आई, तो बगीचे में बनी कुटिया में रह रहे पांच कश्मीरी मजदूरों में से दो मजदूर बाढ़ के मलबे में दब गए, जिन्हें साथी मजदूरों और ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से मलबे से बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के लिए पीएचसी लिप्पा पहुंचाया। यहा से उन्हें उपचार के लिए रिकांगपिओ अस्पताल भेजा गया है। बाढ़ के मलबे में दबने से 48 वर्षीय राज सिंह, पुत्र जगदीश, निवासी गांव कोटी, तहसील बनी, जिला कठुआ, जम्मू कश्मीर और 52 वर्षीय नंद लाल, पुत्र केसरू, गांव कोटी, तहसील बनी, जिला कठुआ, जम्मू-कश्मीर को हल्की चोटें आई हैं। ग्रामीणों की दोघरियों को भी बाढ़ ने नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों के अनाज से भरे छह कुठार बाढ़ में बह गए, जबकि सेब बगीचों में बनीं कुटियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग की टीम लिप्पा गांव पहुंच गई है और नुकसान का आकलन कर रही है। प्रकृति के इस रौद्र रूप को देखकर ग्रामीण सहम गए हैं। वहीं, आपदा पीड़ितों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से राहत की गुहार लगाई हैं। पंचायत प्रधान लिप्पा हरीशा नेगी ने बताया कि पंचायत में बाढ़ ने खासी तबाही मचाई है। किसान, बागवानों को करोड़ों की क्षति पहुंची है। हजारों पौधे बाढ़ में बह गए हैं, जबकि ग्रामीणों की कई बीघा भूमि बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई है। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से आपदा पीड़ितों को राहत पहुंचाने की मांग की है। उधर, एडीएम पूह रविंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मौके पर तहसीलदार मूरंग को नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। राजस्व विभाग की टीम मौके का निरीक्षण कर जल्द रिपोर्ट सौंपेगी। बाढ़ के मलबे में दबे दो मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया है। दोनों को पांच-पांच हजार रुपये की फौरी राहत राशि दी गई है।
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बाढ़ की चपेट में आने से आलू, मटर, ओगला, फाफरा सहित अन्य फसलें तबाह
पंचायत के 60 बागवानों को करोड़ों का नुकसान, सरकार से राहत की गुहार
ग्रामीणों के अनाज से भरे छह कुठार और एक आरा मशीन भी बाढ़ से क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)।
जिले में बादल फटने और बाढ़ आने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। शुक्रवार सुबह किन्नौर जिले की लिप्पा गांव में बादल फटने से बाढ़ आ गई। इसमें बागवानों के सेब समेत हजारों फलदार पौधे बह गए। किसानों की नकदी फसलें बाढ़ से तबाह हो गई हैं, जबकि बाढ़ के मलबे में फंसे दो कश्मीरी मजदूरों को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाला है। इस आपदा से करोड़ों रुपये की क्षति पहुंची है। वहीं, राजस्व विभाग की टीम पंचायत पहुंच कर नुकसान का आकलन करने में जुट गई है। किन्नौर जिले की लिप्पा पंचायत के पनस सेरिंग क्षेत्र में सुबह करीब छह बजे अचानक तेज गड़गड़हाटों के साथ बादल फटा। बादल फटने से भोंगती नाले में अचानक बाढ़ आ गई और लिप्पा गांव में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। गनीमत रही कि यह घटना रात को नहीं हुई, वर्ना राहत कार्य करना मुश्किल हो जाता। बाढ़ से मची तबाही के कारण 60 बागवानों के हजारों सेब, नाशपाती, खुमानी, बादाम समेत हजारों फलदार पौधे बाढ़ में बह गए। इसके अलावा ग्रामीणों की ओगला, फाफरा, राजमाह, मटर और आलू की फसल भी पूरी तरह से तबाह हो गई है। सुबह जब बाढ़ आई, तो बगीचे में बनी कुटिया में रह रहे पांच कश्मीरी मजदूरों में से दो मजदूर बाढ़ के मलबे में दब गए, जिन्हें साथी मजदूरों और ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से मलबे से बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के लिए पीएचसी लिप्पा पहुंचाया। यहा से उन्हें उपचार के लिए रिकांगपिओ अस्पताल भेजा गया है। बाढ़ के मलबे में दबने से 48 वर्षीय राज सिंह, पुत्र जगदीश, निवासी गांव कोटी, तहसील बनी, जिला कठुआ, जम्मू कश्मीर और 52 वर्षीय नंद लाल, पुत्र केसरू, गांव कोटी, तहसील बनी, जिला कठुआ, जम्मू-कश्मीर को हल्की चोटें आई हैं। ग्रामीणों की दोघरियों को भी बाढ़ ने नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों के अनाज से भरे छह कुठार बाढ़ में बह गए, जबकि सेब बगीचों में बनीं कुटियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग की टीम लिप्पा गांव पहुंच गई है और नुकसान का आकलन कर रही है। प्रकृति के इस रौद्र रूप को देखकर ग्रामीण सहम गए हैं। वहीं, आपदा पीड़ितों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से राहत की गुहार लगाई हैं। पंचायत प्रधान लिप्पा हरीशा नेगी ने बताया कि पंचायत में बाढ़ ने खासी तबाही मचाई है। किसान, बागवानों को करोड़ों की क्षति पहुंची है। हजारों पौधे बाढ़ में बह गए हैं, जबकि ग्रामीणों की कई बीघा भूमि बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई है। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से आपदा पीड़ितों को राहत पहुंचाने की मांग की है। उधर, एडीएम पूह रविंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मौके पर तहसीलदार मूरंग को नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। राजस्व विभाग की टीम मौके का निरीक्षण कर जल्द रिपोर्ट सौंपेगी। बाढ़ के मलबे में दबे दो मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया है। दोनों को पांच-पांच हजार रुपये की फौरी राहत राशि दी गई है।

लिप्पा गांव के नजदीक बादल फटनें से क्षतिग्रस्त सेब के बगीचें । संवाद

लिप्पा गांव के नजदीक बादल फटनें से क्षतिग्रस्त सेब के बगीचें । संवाद