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केंद्र सरकार किसान मजदूर विरोधी : सीटू
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संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। सीटू जिला कमेटी किन्नौर की बैठक यूनियन के जिला प्रधान मदन नेगी की अध्यक्षता में सोमवार को सीटू कार्यालय टापरी में हुई। बैठक में सीटू के वरिष्ठ राज्य उपाध्यक्ष एवं किन्नौर के प्रभारी जगतराम विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में कड़छम-बांगमू परियोजना, बीआरओ., आंगनबाड़ी वर्कर यूनियनों के 21 पदाधिकारियों ने भाग लिया। सीटू के राज्य उपाध्यक्ष जगत राम ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश के मजदूरों के लंबे संघर्ष से हासिल किए 44 श्रम कानूनों को खत्म करके चार श्रम संहिताएं बनाई हैं। केंद्र सरकार इन श्रम संहिताओं को अप्रैल 2025 से लागू करने जा रही है। यह सभी श्रम संहिताएं बड़े पूंजीपतियों, कारपोरेट घरानों, ठेकेदारों और निजी कंपनियों के पक्ष में बनाई हैं। इसके चलते मजदूरों पर शोषण बढेगा। सीटू के जिला अध्यक्ष मदन नेगी बताया कि मजदूरों की मांगों को लेकर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान औद्योगिक मजदूर, हाइडिल परियोजना में कार्यरत मजदूर, आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर, मिड डे मील वर्कर्स, आउटसोर्स कर्मचारी और मजदूर एक विधानसभा का घेराव करेंगे। जिला बैठक के माध्यम से मांग उठाई कि बिजली उत्पादन परियोजनाओं के मजदूरों के लिए अलग से रोजगार अनुसूची बनाई जाए। सभी आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। बैठक में मांग की गई कि बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार तुरंत प्रभावी कदम उठाए, जनता को राहत मिल सके।
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भावानगर (किन्नौर)। सीटू जिला कमेटी किन्नौर की बैठक यूनियन के जिला प्रधान मदन नेगी की अध्यक्षता में सोमवार को सीटू कार्यालय टापरी में हुई। बैठक में सीटू के वरिष्ठ राज्य उपाध्यक्ष एवं किन्नौर के प्रभारी जगतराम विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में कड़छम-बांगमू परियोजना, बीआरओ., आंगनबाड़ी वर्कर यूनियनों के 21 पदाधिकारियों ने भाग लिया। सीटू के राज्य उपाध्यक्ष जगत राम ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश के मजदूरों के लंबे संघर्ष से हासिल किए 44 श्रम कानूनों को खत्म करके चार श्रम संहिताएं बनाई हैं। केंद्र सरकार इन श्रम संहिताओं को अप्रैल 2025 से लागू करने जा रही है। यह सभी श्रम संहिताएं बड़े पूंजीपतियों, कारपोरेट घरानों, ठेकेदारों और निजी कंपनियों के पक्ष में बनाई हैं। इसके चलते मजदूरों पर शोषण बढेगा। सीटू के जिला अध्यक्ष मदन नेगी बताया कि मजदूरों की मांगों को लेकर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान औद्योगिक मजदूर, हाइडिल परियोजना में कार्यरत मजदूर, आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर, मिड डे मील वर्कर्स, आउटसोर्स कर्मचारी और मजदूर एक विधानसभा का घेराव करेंगे। जिला बैठक के माध्यम से मांग उठाई कि बिजली उत्पादन परियोजनाओं के मजदूरों के लिए अलग से रोजगार अनुसूची बनाई जाए। सभी आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। बैठक में मांग की गई कि बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार तुरंत प्रभावी कदम उठाए, जनता को राहत मिल सके।