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Rampur Bushahar News: शास्त्री बैचवाइज भर्ती परिणाम पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल
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191 पदों में सीमित चयन पर नाराजगी, पात्रता मानकों में बदलाव के आरोप
कहा, बैचवाइज भर्ती में पांच वर्षीय शास्त्री डिग्री धारकों को किया गया नजरअंदाज
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश में शास्त्री बैचवाइज भर्ती के हाल ही में घोषित परिणाम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेशभर के शास्त्री अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। हिमाचल प्रदेश संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ की रोहड़ू इकाई के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और पात्रता मानकों को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
संघ के मीडिया प्रभारी चमन शर्मा, महासचिव जयंचद कलवान, सलाहकार सन्नी नारटा, राजेंद्र दुगलेट, रवि फोल्टा, मनीष शर्मा, विक्रांत शर्मा, रंजना, सुनीता, आरती और कृष्णा ने कहा कि 191 पदों के मुकाबले केवल 30 से 40 शास्त्रियों का ही चयन किया गया, जबकि शेष करीब 140 पदों पर ऐसे अभ्यर्थियों को मौका दिया गया, जिन्हें पहले पात्र नहीं माना गया था। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों को बाद में जबरन पात्र बनाया गया।
उन्होंने कहा कि एक अन्य मामले में शिक्षा विभाग ने उच्च न्यायालय में हलफनामा देकर स्पष्ट किया था कि अंकुर रैना बनाम सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक 193 पदों पर भर्ती नहीं की जाएगी। इसके बावजूद विभाग ने जल्दबाजी में परिणाम घोषित कर नियुक्तियां और स्टेशन आवंटन कर दिए।
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संघ ने भर्ती प्रक्रिया में पात्रता मानकों को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एमए या बीए में केवल एक विषय के रूप में संस्कृत पढ़ने वाले अभ्यर्थियों को बीएड के आधार पर शास्त्री पद के लिए योग्य माना गया, जबकि पांच वर्षीय शास्त्री डिग्री धारकों की अनदेखी की गई। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल हजारों योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है, बल्कि प्रदेश के संस्कृत कालेजों में अध्ययनरत छात्रों के भविष्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने सामाजिक संगठनों से अपील की है कि संस्कृत और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आएं और इस मुद्दे पर सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद करें।
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कहा, बैचवाइज भर्ती में पांच वर्षीय शास्त्री डिग्री धारकों को किया गया नजरअंदाज
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश में शास्त्री बैचवाइज भर्ती के हाल ही में घोषित परिणाम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेशभर के शास्त्री अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। हिमाचल प्रदेश संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ की रोहड़ू इकाई के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और पात्रता मानकों को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
संघ के मीडिया प्रभारी चमन शर्मा, महासचिव जयंचद कलवान, सलाहकार सन्नी नारटा, राजेंद्र दुगलेट, रवि फोल्टा, मनीष शर्मा, विक्रांत शर्मा, रंजना, सुनीता, आरती और कृष्णा ने कहा कि 191 पदों के मुकाबले केवल 30 से 40 शास्त्रियों का ही चयन किया गया, जबकि शेष करीब 140 पदों पर ऐसे अभ्यर्थियों को मौका दिया गया, जिन्हें पहले पात्र नहीं माना गया था। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों को बाद में जबरन पात्र बनाया गया।
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उन्होंने कहा कि एक अन्य मामले में शिक्षा विभाग ने उच्च न्यायालय में हलफनामा देकर स्पष्ट किया था कि अंकुर रैना बनाम सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक 193 पदों पर भर्ती नहीं की जाएगी। इसके बावजूद विभाग ने जल्दबाजी में परिणाम घोषित कर नियुक्तियां और स्टेशन आवंटन कर दिए।
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संघ ने भर्ती प्रक्रिया में पात्रता मानकों को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एमए या बीए में केवल एक विषय के रूप में संस्कृत पढ़ने वाले अभ्यर्थियों को बीएड के आधार पर शास्त्री पद के लिए योग्य माना गया, जबकि पांच वर्षीय शास्त्री डिग्री धारकों की अनदेखी की गई। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल हजारों योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है, बल्कि प्रदेश के संस्कृत कालेजों में अध्ययनरत छात्रों के भविष्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने सामाजिक संगठनों से अपील की है कि संस्कृत और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आएं और इस मुद्दे पर सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद करें।