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Rampur Bushahar News: सेब के बगीचों में फैला सफेद चूर्ण रोग, बागवान परेशान
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संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। बागवानों के सेब के बगीचों में सफेद चूर्ण रोग फैल गया है। सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी न होने से सेब की पैदावर कम होने की आशंका बन गई है। इसके बाद फ्लावरिंग के समय भी तापमान में गिरावट से बगीचों में फसल की सेटिंग पर विपरीत असर पड़ा है। अब एक नई समस्या ने बागवानों को चिंता में डाल दिया है। इन दिनों कई स्थानों पर सेब के पौधों की पतियों में आटे की परत जैसी सफेद चूर्ण (पाउडर) की परत चढ़ गई है। उद्यान विकास अधिकारी चौपाल श्याम शर्मा ने बताया कि कई जगह से बगीचों में इस तरह के लक्षण दिखाई देने की सूचना है। उन्होंने कहा कि सफेद चूर्ण रोग ज्यादातर गाला किस्म व पॉलिनाइजर किस्म में देखने को मिलता है। यह धीरे-धीरे बगीचों में फैलना शुरू हो जाता है। उद्यान अधिकारी श्याम शर्मा ने कहा कि इस रोग की रोकथाम के लिए बागवान थायोफिनेट मिथाईल 100 ग्राम या हेक्साकोनाजोल 100 या टेबूकोनाजोल प्लस कैपटान 500 मिली लीटर को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर पतियों पर छिड़काव करें। श्याम शर्मा ने बागवानों को सलाह दी है कि रोग व कीट नियंत्रण के बेहतरीन नतीजों के लिए निर्धारित छिड़काव सारिणी-2024 की अनुपालन ही करें।
उधर, उद्यान विकास अधिकारी चौपाल श्याम शर्मा ने कहा कि यदि बगीचों में किसी भी तरह की बीमारी या कीट का प्रकोप हो तो बागवानी वैज्ञानिक से बात करें।
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चौपाल (रोहड़ू)। बागवानों के सेब के बगीचों में सफेद चूर्ण रोग फैल गया है। सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी न होने से सेब की पैदावर कम होने की आशंका बन गई है। इसके बाद फ्लावरिंग के समय भी तापमान में गिरावट से बगीचों में फसल की सेटिंग पर विपरीत असर पड़ा है। अब एक नई समस्या ने बागवानों को चिंता में डाल दिया है। इन दिनों कई स्थानों पर सेब के पौधों की पतियों में आटे की परत जैसी सफेद चूर्ण (पाउडर) की परत चढ़ गई है। उद्यान विकास अधिकारी चौपाल श्याम शर्मा ने बताया कि कई जगह से बगीचों में इस तरह के लक्षण दिखाई देने की सूचना है। उन्होंने कहा कि सफेद चूर्ण रोग ज्यादातर गाला किस्म व पॉलिनाइजर किस्म में देखने को मिलता है। यह धीरे-धीरे बगीचों में फैलना शुरू हो जाता है। उद्यान अधिकारी श्याम शर्मा ने कहा कि इस रोग की रोकथाम के लिए बागवान थायोफिनेट मिथाईल 100 ग्राम या हेक्साकोनाजोल 100 या टेबूकोनाजोल प्लस कैपटान 500 मिली लीटर को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर पतियों पर छिड़काव करें। श्याम शर्मा ने बागवानों को सलाह दी है कि रोग व कीट नियंत्रण के बेहतरीन नतीजों के लिए निर्धारित छिड़काव सारिणी-2024 की अनुपालन ही करें।
उधर, उद्यान विकास अधिकारी चौपाल श्याम शर्मा ने कहा कि यदि बगीचों में किसी भी तरह की बीमारी या कीट का प्रकोप हो तो बागवानी वैज्ञानिक से बात करें।