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Rampur Bushahar News: बगीचों में जलाई जा रहीं टहनियां-पत्तियां, पर्यावरण का दम घोंट रहा धुआं
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचों में इन दिनों काट-छांट का कार्य चल रहा है। वहीं, कई बागवान अपशिष्ट टहनियां और पत्तियों को बगीचों में ही जला रहे हैं, जिससे उठने वाला धुआं पर्यावरण का दम घोंट रहा है। बगीचों में अपशिष्ट न जलाने के प्रशासन के निर्देशों के बावजूद भी कई बागवान नहीं मान रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। हर साल प्रशासन की सख्ती के बाद भी प्रदूषण नहीं रुक रहा है, जबकि उपमंडल प्रशासन से लेकर पंचायत स्तर तक इस पर कार्रवाई के निर्देश जारी होते रहे हैं। नवंबर से बागवान सेब के पौधों की कांट-छांट के साथ घास और झाड़ियों की बगीचों में सफाई शुरू कर देते हैं। सूखे पत्ते और पौधों की काट-छांट की गईं टहनियों और पत्तियों को इकट्ठा कर बगीचों के किनारे जलाते हैं, जिससे वातावरण में प्रदूषण फैलता है। शिमला जिले के सेब बहुल क्षेत्र में पहले से उपमंडल स्तर से इसको रोकने के लिए पंचायत स्तर पर हर साल आदेश होते रहे हैं। यहां तक की प्रशासन ने पुलिस में मामला दर्ज करने के निर्देश विकास खंड के जरिये पंचायतों को दिए हैं। बीते दो-तीन साल से उद्यान विभाग इसको रोकने के लिए गांव स्तर पर शिविर लगा रहा है। बागवानों को जागरूक किया जा रहा है कि बगीचा प्रबंधन के बाद टहनियों और पत्तियों को गड्ढे में क्रश करके डाला जाए। इनके सड़ने के बाद खाद बन सकती है। इसके लिए सरकार शैंडर मशीन पर सरकार अनुदान भी दे रही है। वन विभाग ने भी पिछले साल एडवाइजरी जारी की थी कि यदि सरकारी भूमि के साथ लगते बगीचों में आग लगाई गई, तो बागवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और ठोस कार्रवाई की जाएगी।
सर्दियों में हर साल पत्तियों और टहनियों को जलाने से उठने वाला धुआं बहुत घातक है। सांस के मरीजों को हवा में धुआं होने से अधिक परेशानी होती है। खासकर, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका अधिक असर पड़ता है। पहाड़ों की शुद्ध हवा को दूषित करने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने जरूरी है।
-डाॅ. रविंद्र शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक, सिविल अस्पताल रोहड़ू।
पंचायत जनप्रतिनिधियों को आदेश दे दिए हैं कि खेतों, बगीचों और घासनियों में आग लगाने से रोकने के लिए लोगों को जागरूक करें। हर बैठक में इस मामले में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आग लगाने वालों पर कार्रवाई में पंचायत प्रतिनिधि प्रशासन का सहयोग करें। पर्यावरण प्रदूषित न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।-- गुरमीत नेगी, एसडीएम, जुब्बल
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रोहड़ू। सेब के बगीचों में इन दिनों काट-छांट का कार्य चल रहा है। वहीं, कई बागवान अपशिष्ट टहनियां और पत्तियों को बगीचों में ही जला रहे हैं, जिससे उठने वाला धुआं पर्यावरण का दम घोंट रहा है। बगीचों में अपशिष्ट न जलाने के प्रशासन के निर्देशों के बावजूद भी कई बागवान नहीं मान रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। हर साल प्रशासन की सख्ती के बाद भी प्रदूषण नहीं रुक रहा है, जबकि उपमंडल प्रशासन से लेकर पंचायत स्तर तक इस पर कार्रवाई के निर्देश जारी होते रहे हैं। नवंबर से बागवान सेब के पौधों की कांट-छांट के साथ घास और झाड़ियों की बगीचों में सफाई शुरू कर देते हैं। सूखे पत्ते और पौधों की काट-छांट की गईं टहनियों और पत्तियों को इकट्ठा कर बगीचों के किनारे जलाते हैं, जिससे वातावरण में प्रदूषण फैलता है। शिमला जिले के सेब बहुल क्षेत्र में पहले से उपमंडल स्तर से इसको रोकने के लिए पंचायत स्तर पर हर साल आदेश होते रहे हैं। यहां तक की प्रशासन ने पुलिस में मामला दर्ज करने के निर्देश विकास खंड के जरिये पंचायतों को दिए हैं। बीते दो-तीन साल से उद्यान विभाग इसको रोकने के लिए गांव स्तर पर शिविर लगा रहा है। बागवानों को जागरूक किया जा रहा है कि बगीचा प्रबंधन के बाद टहनियों और पत्तियों को गड्ढे में क्रश करके डाला जाए। इनके सड़ने के बाद खाद बन सकती है। इसके लिए सरकार शैंडर मशीन पर सरकार अनुदान भी दे रही है। वन विभाग ने भी पिछले साल एडवाइजरी जारी की थी कि यदि सरकारी भूमि के साथ लगते बगीचों में आग लगाई गई, तो बागवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और ठोस कार्रवाई की जाएगी।
सर्दियों में हर साल पत्तियों और टहनियों को जलाने से उठने वाला धुआं बहुत घातक है। सांस के मरीजों को हवा में धुआं होने से अधिक परेशानी होती है। खासकर, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका अधिक असर पड़ता है। पहाड़ों की शुद्ध हवा को दूषित करने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने जरूरी है।
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-डाॅ. रविंद्र शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक, सिविल अस्पताल रोहड़ू।
पंचायत जनप्रतिनिधियों को आदेश दे दिए हैं कि खेतों, बगीचों और घासनियों में आग लगाने से रोकने के लिए लोगों को जागरूक करें। हर बैठक में इस मामले में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आग लगाने वालों पर कार्रवाई में पंचायत प्रतिनिधि प्रशासन का सहयोग करें। पर्यावरण प्रदूषित न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
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