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Rampur Bushahar News: सेब बगीचों में आग से अपशिष्ट का कर रहे निष्पादन, धुएं से वातावरण हो रहा दूषित

Wed, 15 Jan 2025 11:35 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2025 11:35 PM IST
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Apple Orchard Rohru, Shimla, Kotkhai, Horticulture
बुधवार को रोहडू के सामने  वाली पहाछ़ी पर सेब की टहनियां जलाने से फैला धुंआ
प्रशासन पंचातयों को दिए हैं रोकने के आदेश, कमेटियां भी बनाईं, कोई असर नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी

रोहड़ू । मौसम खुलने के बाद सेब के बगीचों में काट-छांट और पत्तियों के जलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। सेब के पत्तों और टहनियों को जलाने से उठ रहे धुएं से वातावरण दूषित हो रहा है। कई सालों से प्रशासन की सख्ती के बाद प्रदूषण नहीं रुक रहा, जबकि उपमंडल प्रशासन से लेकर पंचायत स्तर तक इस पर कार्रवाई के निर्देश जारी होते रहे हैं। हर साल सर्दी आते ही बागवान सेब के पौधों की काट-छांट शुरू करते हैं। सूखे पत्ते और पौधों की काट-छांट की गई टहनियों को कई बागवान इकट्ठा करके जला रहे हैं। इससे वातावरण में प्रदूषित हो रहा है। शिमला जिले के सेब बाहुल क्षेत्र में पहले से उपमंडल स्तर से इसको रोकने के लिए पंचायत स्तर पर आदेश होते रहे हैं। प्रशासन ने पुलिस में मामला दर्ज करने के निर्देश विकास खंड के जरिये पंचातयों को दिए हैं। इसके लिए कमेटियां तक बनाईं जा चुकी हैं। इसके बावजूद हर वर्ष कई बागवान बगीचे की साफ-सफाई से निकलने वाली झाड़ियां, पत्तियां और टहनियों को जलाते हैं। दो तीन साल से उद्यान विभाग इसको रोकने के लिए गांव स्तर पर शिविर लगा रहा है। बागवानों को जागरूक किया जा रहा है कि बगीचा प्रबंधन के बाद टहनियों और पत्तियों को गड्ढे में डालने के बाद सड़ने से खाद बन सकती है। इसके लिए सरकार मशीन पर अनुदान भी दे रही है। वन विभाग की ओर से भी साल पहले एडवाईजरी जारी हो चुकी है कि यदि सरकारी भूमि के साथ लगते बगीचों में आग जलाई गई, तो बागवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और ठोस कार्रवाई की जाएगी।

सर्दियों में हर साल पत्तियों और टहनियों को जलाने से उठने वाला धुआं बहुत घातक होता है। धुंए से सांस के मरीजों को अधिक परेशानी होती है। खासकर, छोटे बच्चों व बजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका अधिक असर पड़ता है। पहाड़ों की शुद्ध हवा को दूषित करने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने जरूरी है।इसके लिए बागवानों को भी जागरूक होना चाहिए। -- डाॅ. रविंद्र शर्मा, एमएस, सिविल अस्पताल रोहड़ू।
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सभी पंचायत जनप्रतिनिधियों को आदेश दिए हैं कि बागवानों को जागरूक करें। विकास खंड के माध्यम से इस पर कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है। इसी साल बगीचों की आग फैलने से पहले भी बहुत नुकसान हो चुका है। पर्यावरण प्रदूषित न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। - गुरमीत नेगी एसडीएम जुब्बल-कोटखाई
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