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Rampur Bushahar News: सेब कारोबारी को चेक बाउंस के मामले में एक साल का कारावास
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. 1.02 लाख रुपये का मुआवजा देने का दिया निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1.02 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। वर्ष 2019 में शिकायतकर्ता रामपुर के मदन ठाकुर ने खानेवाली में आरोपी रोहड़ू क्षेत्र के सुशील कैथ को सेब की पेटियां बेचीं। सेब की पेटियों की शुद्ध बिक्री 51 हजार रुपये में हुई, लेकिन आरोपी नकद भुगतान करने में विफल रहा। नकद भुगतान के बदले आरोपी ने चेक दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से रकम की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। इसके बाद, आरोपी को कानूनी डिमांड नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस मिल गया था, लेकिन उसने कोई पेमेंट नहीं की। इसके बाद यह शिकायत दी गई। अदालत ने फैसला दिया है कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तत्व नहीं मिला, जो आरोपी के संभावित बचाव के लिए जाता हो, इसलिए कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड पर ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करके उचित संदेह से परे अपने मामले को साबित कर दिया है। आरोपी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को एक साल की साधारण कैद की सजा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायतकर्ता को 1.02 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1.02 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। वर्ष 2019 में शिकायतकर्ता रामपुर के मदन ठाकुर ने खानेवाली में आरोपी रोहड़ू क्षेत्र के सुशील कैथ को सेब की पेटियां बेचीं। सेब की पेटियों की शुद्ध बिक्री 51 हजार रुपये में हुई, लेकिन आरोपी नकद भुगतान करने में विफल रहा। नकद भुगतान के बदले आरोपी ने चेक दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से रकम की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। इसके बाद, आरोपी को कानूनी डिमांड नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस मिल गया था, लेकिन उसने कोई पेमेंट नहीं की। इसके बाद यह शिकायत दी गई। अदालत ने फैसला दिया है कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तत्व नहीं मिला, जो आरोपी के संभावित बचाव के लिए जाता हो, इसलिए कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड पर ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करके उचित संदेह से परे अपने मामले को साबित कर दिया है। आरोपी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को एक साल की साधारण कैद की सजा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायतकर्ता को 1.02 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया जाता है।