{"_id":"6aad12e8c04d7e12390605cb","slug":"appeal-dismissed-in-motorcycle-theft-case-convict-sentenced-to-one-year-in-prison-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1003-170050-2026-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: मोटरसाइकिल चोरी के मामले में अपील खारिज, दोषी को एक साल की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: मोटरसाइकिल चोरी के मामले में अपील खारिज, दोषी को एक साल की कैद
विज्ञापन
दोषी ने निचली अदालत के फैसले को दी थी चुनौती
अदालत ने दोषी को पांच हजार रुपये का जुर्मान की सजा भी दी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर (रामपुर बुशहर) ने मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले में दोषी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की 18 मई 2024 को सुनाई गई एक साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। दोषी शुभम शर्मा ने न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आनी की ओर से पारित फैसले को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने उन्हें मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में दोषी पाया था। अपील में दलील दी गई थी कि निचली अदालत का फैसला कानून और तथ्यों के विपरीत है। इसमें साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया। हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पाया कि शुभम शर्मा को चोरी की मोटरसाइकिल के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया था। वह अपने कब्जे का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए। अभियोजन पक्ष ने अपना मामला उचित संदेह से परे साबित किया। इसी आधार पर उनकी अपील खारिज कर दी गई। यह मामला 16 अक्तूबर 2017 का है। शिकायतकर्ता तारा चंद ने आनी के एचपीपीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में अपनी मोटरसाइकिल (एचपी-58-5448) खड़ी की थी। रात करीब 9:45 बजे मोटरसाइकिल गायब होने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। तारा चंद और उनके दोस्तों ने लूहरी में पुलिस को चोरों के साथ मोटरसाइकिल पकड़े हुए देखा। चोरों की पहचान शुभम शर्मा और दो नाबालिग लड़कों के रूप में हुई। आरोप पत्र केवल शुभम शर्मा के खिलाफ दायर किया गया। अदालत ने दो पुलिस कांस्टेबल की गवाही पर गौर किया। उन्होंने बताया कि उन्हें चोरी की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने लूहरी चौक पर नाका लगाया। आधी रात को शुभम शर्मा को चोरी की मोटरसाइकिल चलाते हुए पकड़ा गया। शुभम शर्मा के साथ दो अन्य लड़के भी थे। अदालत ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा-114 का हवाला दिया। इस धारा के अनुसार, चोरी के तुरंत बाद चोरी का सामान रखने वाला व्यक्ति या तो चोर होता है या उसे पता होता है कि सामान चोरी का है। शुभम शर्मा अपने बचाव में कोई सबूत पेश नहीं कर पाया। निचली अदालत ने शुभम शर्मा को एक साल के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना न भरने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। शुभम शर्मा को 17 अक्तूबर को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, आनी की अदालत में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया है।
विज्ञापन
अदालत ने दोषी को पांच हजार रुपये का जुर्मान की सजा भी दी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर (रामपुर बुशहर) ने मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले में दोषी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की 18 मई 2024 को सुनाई गई एक साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। दोषी शुभम शर्मा ने न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आनी की ओर से पारित फैसले को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने उन्हें मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में दोषी पाया था। अपील में दलील दी गई थी कि निचली अदालत का फैसला कानून और तथ्यों के विपरीत है। इसमें साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया। हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पाया कि शुभम शर्मा को चोरी की मोटरसाइकिल के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया था। वह अपने कब्जे का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए। अभियोजन पक्ष ने अपना मामला उचित संदेह से परे साबित किया। इसी आधार पर उनकी अपील खारिज कर दी गई। यह मामला 16 अक्तूबर 2017 का है। शिकायतकर्ता तारा चंद ने आनी के एचपीपीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में अपनी मोटरसाइकिल (एचपी-58-5448) खड़ी की थी। रात करीब 9:45 बजे मोटरसाइकिल गायब होने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। तारा चंद और उनके दोस्तों ने लूहरी में पुलिस को चोरों के साथ मोटरसाइकिल पकड़े हुए देखा। चोरों की पहचान शुभम शर्मा और दो नाबालिग लड़कों के रूप में हुई। आरोप पत्र केवल शुभम शर्मा के खिलाफ दायर किया गया। अदालत ने दो पुलिस कांस्टेबल की गवाही पर गौर किया। उन्होंने बताया कि उन्हें चोरी की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने लूहरी चौक पर नाका लगाया। आधी रात को शुभम शर्मा को चोरी की मोटरसाइकिल चलाते हुए पकड़ा गया। शुभम शर्मा के साथ दो अन्य लड़के भी थे। अदालत ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा-114 का हवाला दिया। इस धारा के अनुसार, चोरी के तुरंत बाद चोरी का सामान रखने वाला व्यक्ति या तो चोर होता है या उसे पता होता है कि सामान चोरी का है। शुभम शर्मा अपने बचाव में कोई सबूत पेश नहीं कर पाया। निचली अदालत ने शुभम शर्मा को एक साल के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना न भरने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। शुभम शर्मा को 17 अक्तूबर को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, आनी की अदालत में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया है।