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Rampur Bushahar News: जनजातीय क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट तर्कहीन
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उपायुक्त किन्नौर को ज्ञापन सौंपने जाते किन्नौर जनजातीय एकता मंच के सदस्य। स्रोत : मंच
पंचायत चुनाव रोस्टर में गड़बड़ी का आरोप, मंच ने आंदोलन व चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी
मांगों को लेकर नहीं हुई सुनवाई तो मंच जिले में निकालेगा जन आक्रोश रैली
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
किन्नौर जिले में पंचायती राज चुनाव के लिए जारी रोस्टर को लेकर विवाद गहरा गया है। कनौरा (किन्नौर) जनजातीय एकता मंच ने वर्तमान रोस्टर में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में जनजातीय क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट को तर्कहीन बताया है। मंच ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे जिले भर में उग्र आंदोलन करेंगे और चुनाव का बहिष्कार करेंगे। मंच के अध्यक्ष चंद्र भगत नेगी के नेतृत्व में पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी किन्नौर से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि जिला किन्नौर पूर्णत: एक जनजातीय क्षेत्र है, जहां के सभी स्थायी निवासी जनजातीय वर्ग से संबंध रखते हैं। इसके बावजूद कई पंचायतों में वार्ड सदस्य की सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है, जिसे मंच ने असंवैधानिक और तर्कहीन बताया है। अध्यक्ष चंद्र भगत नेगी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रोस्टर जिस आधार पर तैयार किया गया है, उसमें बड़ा षड्यंत्र लगता है। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि पिछली जनगणना के आंकड़ों में या तो कोई गलती हुई है या जानबूझकर षड्यंत्र रचा गया है। मंच ने उपायुक्त से मांग की है कि वर्ष 2026 के इस रोस्टर को दुरुस्त किया जाए। साथ ही वर्ष 2027 में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर भी पहले ही सतर्क कर दिया है ताकि भविष्य में जनगणना कर्मी घर-घर जाकर सही तरीके से डेटा एकत्र करें और पिछला इतिहास न दोहराया जाए। ज्ञापन सौंपने के बाद मंच की एक विशेष बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। चंद्र भगत नेगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर रोस्टर में सुधार नहीं किया गया, तो किन्नौर जनजातीय एकता मंच के बैनर तले पूरे जिले में जन आक्रोश रैली निकाली जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मंच इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मंच का कहना है कि यह लड़ाई किन्नौर की जनजातीय पहचान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। मंच ने वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव रोस्टर में की गई त्रुटियों को तुरंत सुधारने, वर्ष 2027 की जनगणना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और घर-घर जाकर सही गणना करने की मांग की है। साथ ही मंच ने जनजातीय क्षेत्र की जनसांख्यिकी के अनुसार ही आरक्षण का निर्धारण करने की मांग उठाई है।
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मांगों को लेकर नहीं हुई सुनवाई तो मंच जिले में निकालेगा जन आक्रोश रैली
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
किन्नौर जिले में पंचायती राज चुनाव के लिए जारी रोस्टर को लेकर विवाद गहरा गया है। कनौरा (किन्नौर) जनजातीय एकता मंच ने वर्तमान रोस्टर में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में जनजातीय क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट को तर्कहीन बताया है। मंच ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे जिले भर में उग्र आंदोलन करेंगे और चुनाव का बहिष्कार करेंगे। मंच के अध्यक्ष चंद्र भगत नेगी के नेतृत्व में पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी किन्नौर से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि जिला किन्नौर पूर्णत: एक जनजातीय क्षेत्र है, जहां के सभी स्थायी निवासी जनजातीय वर्ग से संबंध रखते हैं। इसके बावजूद कई पंचायतों में वार्ड सदस्य की सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है, जिसे मंच ने असंवैधानिक और तर्कहीन बताया है। अध्यक्ष चंद्र भगत नेगी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रोस्टर जिस आधार पर तैयार किया गया है, उसमें बड़ा षड्यंत्र लगता है। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि पिछली जनगणना के आंकड़ों में या तो कोई गलती हुई है या जानबूझकर षड्यंत्र रचा गया है। मंच ने उपायुक्त से मांग की है कि वर्ष 2026 के इस रोस्टर को दुरुस्त किया जाए। साथ ही वर्ष 2027 में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर भी पहले ही सतर्क कर दिया है ताकि भविष्य में जनगणना कर्मी घर-घर जाकर सही तरीके से डेटा एकत्र करें और पिछला इतिहास न दोहराया जाए। ज्ञापन सौंपने के बाद मंच की एक विशेष बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। चंद्र भगत नेगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर रोस्टर में सुधार नहीं किया गया, तो किन्नौर जनजातीय एकता मंच के बैनर तले पूरे जिले में जन आक्रोश रैली निकाली जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मंच इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मंच का कहना है कि यह लड़ाई किन्नौर की जनजातीय पहचान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। मंच ने वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव रोस्टर में की गई त्रुटियों को तुरंत सुधारने, वर्ष 2027 की जनगणना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और घर-घर जाकर सही गणना करने की मांग की है। साथ ही मंच ने जनजातीय क्षेत्र की जनसांख्यिकी के अनुसार ही आरक्षण का निर्धारण करने की मांग उठाई है।