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Rampur Bushahar News: बागवान को भुगतान के लिए दिए चेक के बाउंस होने पर एजेंट को एक साल की सजा
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अदालत ने पांच रुपये का मुआवजा देने के भी दिए आदेश
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। बागवान से सेब और बेर खरीदकर भुगतान के लिए दिए चेक के बाउंस होने के मामले के एजेंट को अदालत ने छह माह की सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने दोषी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के भी आदेश दिए हैं। मामले का शिकायतकर्ता रामपुर क्षेत्र का बागवान है। दोषी अनिल कुमार सोलन में फल एवं सब्जी कमीशन एजेंट के नाम से दुकान चलाता है। दोनों में मैत्रीपूर्ण संबंध थे। शिकायतकर्ता ने अनिल को साल 2011 में सेब और बेर की पेटियां भेजीं। आरोपी ने उन्हें कमीशन के आधार पर अपनी दुकान में बेच दिया। सेब और बेर की उस खेप की बिक्री के बाद आरोपी ने 2.50 लाख रुपये चेक जारी किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने बैंक में चेक प्रस्तुत किया, लेकिन चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से उक्त राशि की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उक्त राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अनिल को वैधानिक मांग नोटिस भेजा, लेकिन फिर भी कोई भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद अदालत में याचिका दायर की गई। अदालत में आरोपी खुद को निर्दोष साबित नहीं कर सका। दोषी पाए जाने पर बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी पहली बार अपराध किया है और उसका चरित्र अच्छा है, इसलिए सजा सुनाते समय उदार रुख अपनाया जाए। अदालत ने निर्णय में टिप्पणी की है कि एनआई अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत अपराध एक सामाजिक-आर्थिक अपराध है, इसलिए इस मामले में सुधारात्मक कानून लागू नहीं होगा। दोषी को अपराध के लिए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। दोषी को निर्देश दिया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को पांच लाख रुपये मुआवजा दे।
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अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। बागवान से सेब और बेर खरीदकर भुगतान के लिए दिए चेक के बाउंस होने के मामले के एजेंट को अदालत ने छह माह की सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने दोषी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के भी आदेश दिए हैं। मामले का शिकायतकर्ता रामपुर क्षेत्र का बागवान है। दोषी अनिल कुमार सोलन में फल एवं सब्जी कमीशन एजेंट के नाम से दुकान चलाता है। दोनों में मैत्रीपूर्ण संबंध थे। शिकायतकर्ता ने अनिल को साल 2011 में सेब और बेर की पेटियां भेजीं। आरोपी ने उन्हें कमीशन के आधार पर अपनी दुकान में बेच दिया। सेब और बेर की उस खेप की बिक्री के बाद आरोपी ने 2.50 लाख रुपये चेक जारी किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने बैंक में चेक प्रस्तुत किया, लेकिन चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से उक्त राशि की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उक्त राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अनिल को वैधानिक मांग नोटिस भेजा, लेकिन फिर भी कोई भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद अदालत में याचिका दायर की गई। अदालत में आरोपी खुद को निर्दोष साबित नहीं कर सका। दोषी पाए जाने पर बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी पहली बार अपराध किया है और उसका चरित्र अच्छा है, इसलिए सजा सुनाते समय उदार रुख अपनाया जाए। अदालत ने निर्णय में टिप्पणी की है कि एनआई अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत अपराध एक सामाजिक-आर्थिक अपराध है, इसलिए इस मामले में सुधारात्मक कानून लागू नहीं होगा। दोषी को अपराध के लिए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। दोषी को निर्देश दिया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को पांच लाख रुपये मुआवजा दे।