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Rampur Bushahar News: पतझड़ और मंडी में गिरते दाम के बाद अब पेड़ों से झड़ने लगे सेब

Fri, 29 Aug 2025 11:31 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Aug 2025 11:31 PM IST
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After autumn and falling prices in the market, now apples have started falling from the trees
कोटखाई क्षेत्र में एक बागवान के बगीचे में  भारी मात्रा में  हो रही सेब की ड्रापिंग
80 रुपये किलो बिकने वाला सेब सरकारी केंद्र में बिक रहो 12 रुपये किलो
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू /कोटखाई । बारिश, भूस्खलन, ओलावृष्टि और पतझड़ के बाद अब बगीचों में फल ड्रापिंग की समस्या शुरू हो गई है। मंडियों से सेब के दाम बढ़ने की उम्मीद और बारिश रुकने के इंतजार में सेब तुड़ान रोककर बैठे अधिकांश बागवानों के बगीचों में फल झड़ने शुरू हो गए हैं। पिछले कुछ दिनों से सेब बड़ी मात्रा में पेड़ों से गिरने लगे हैं। बाजार में फलों को बेचना संभव नहीं है, इसलिए 80 रुपये किलो बिकने वाला सेब सरकारी केंद्र में 12 रुपये किलो में बेचना पड़ रहा है। मंडियों में छंटाई के बाद सेब के दाम 50 रुपये किलो से अधिक नहीं मिल रहे। उल्टा बागवानों को उठाने और निपटाने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। इस साल बागवानों को उम्मीद थी कि सीजन के अंतिम दौर में उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे, इसलिए सेब बाजार में भेजने में देरी की, लेकिन उनकी उम्मीदों के विपरीत न दाम बेहतर हुए और न ही फसल सुरक्षित है। सेब के गिरने से सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान बढ़ गया। सेब गिरने से गुणवत्ता और वजन दोनों पर असर पड़ रहा है। बागवानों का कहना है कि इस बार पूरा सीजन उनके लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है। पहले लागत बढ़ी, फिर रोग और अब फल गिरने से उत्पादन कम हो गया। लगातार चुनौतियों के बाद अगले साल की फसल को लेकर भी खतरा बना है। बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि पत्ता रोग और समय से पहले फल गिरना न केवल इस सीजन के लिए, बल्कि अगले वर्ष की फसल पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। पौधे कमजोर हो जाते हैं और कली बनने की प्रक्रिया बाधित होती है। इस स्थिति से बागवानों में गहरी निराशा है। उनका कहना है कि भविष्य में सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है अन्यथा आने वाले वर्षों में सेब की बागवानी पर संकट और गहरा सकता है।
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