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Rampur Bushahar News: लापरवाही से कार चलाने में आरोपी बरी, बीमा के बिना वाहन चलाने पर दोषी
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अदालत ने दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। आनी स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने लापरवाही और तेज गति से कार चलाने के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। हालांकि, उसे बिना वैध बीमा के वाहन चलाने का दोषी ठहराया गया है। इसके लिए दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 338 के तहत राजेश पर लापरवाही से कार चलाने के आरोप साबित नहीं कर पाया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दुर्घटना एक जानवर को बचाने के प्रयास में हुई थी। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार किया। राजेश को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 के तहत दोषी ठहराया गया, क्योंकि वह वाहन का वैध बीमा प्रस्तुत नहीं कर सका। यह घटना 27 फरवरी, 2020 की रात को बुआंडा के पास हुई थी। राजेश कुमार अपनी कार चला रहे थे। वाहन सड़क से करीब 300 मीटर नीचे एक नाले में गिर गया। इस दुर्घटना में राजेश और एक अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शिकायतकर्ता ने घायलों को बचाया और पुलिस को सूचना दी थी। जांच के दौरान पता चला कि वाहन का बीमा नहीं था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों दोनों ने दुर्घटना होते नहीं देखा था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि घटनास्थल पर आवारा पशु मौजूद रहते हैं। सड़क कच्ची और गड्ढों वाली थी। अभियोजन पक्ष जांच अधिकारी को भी पेश करने में विफल रहा। इन कारणों से, अदालत ने राजेश को लापरवाही से कार चलाने के आरोपों से बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। आनी स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने लापरवाही और तेज गति से कार चलाने के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। हालांकि, उसे बिना वैध बीमा के वाहन चलाने का दोषी ठहराया गया है। इसके लिए दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 338 के तहत राजेश पर लापरवाही से कार चलाने के आरोप साबित नहीं कर पाया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दुर्घटना एक जानवर को बचाने के प्रयास में हुई थी। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार किया। राजेश को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 के तहत दोषी ठहराया गया, क्योंकि वह वाहन का वैध बीमा प्रस्तुत नहीं कर सका। यह घटना 27 फरवरी, 2020 की रात को बुआंडा के पास हुई थी। राजेश कुमार अपनी कार चला रहे थे। वाहन सड़क से करीब 300 मीटर नीचे एक नाले में गिर गया। इस दुर्घटना में राजेश और एक अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शिकायतकर्ता ने घायलों को बचाया और पुलिस को सूचना दी थी। जांच के दौरान पता चला कि वाहन का बीमा नहीं था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों दोनों ने दुर्घटना होते नहीं देखा था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि घटनास्थल पर आवारा पशु मौजूद रहते हैं। सड़क कच्ची और गड्ढों वाली थी। अभियोजन पक्ष जांच अधिकारी को भी पेश करने में विफल रहा। इन कारणों से, अदालत ने राजेश को लापरवाही से कार चलाने के आरोपों से बरी कर दिया।