{"_id":"6aabef39918d82b42e088f35","slug":"accused-acquitted-in-10-year-old-hashish-recovery-case-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1003-170024-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: दस साल पुराने चरस बरामदगी के मामले में आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: दस साल पुराने चरस बरामदगी के मामले में आरोपी बरी
विज्ञापन
स्वतंत्र गवाह के मुकरने से अभियोजन हुआ कमजोर
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर की अदालत ने 10 साल पुराने नौ ग्राम चरस बरामदगी मामले के आरोपी को बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। स्वतंत्र गवाह के अपने बयान से मुकर जाने के कारण अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ गई। यह मामला 14 फरवरी 2016 का है। पुलिस के अनुसार, एक टीम गानवी की ओर गश्त पर थी। शाम को उन्होंने एक व्यक्ति को राष्ट्रीय राजमार्ग से आते देखा। पुलिस को देखकर वह व्यक्ति मुड़ा और भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे पकड़ लिया और पूछताछ में उसने अपना नाम श्याम सुंदर बताया। संदेह होने पर उसकी तलाशी ली गई। पुलिस ने एक स्वतंत्र गवाह को साथ लिया। तलाशी के दौरान, श्याम सुंदर की काली पैंट की दाहिनी जेब से नौ ग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए सात गवाहों की जांच की। इनमें स्वतंत्र गवाह भी शामिल थे। स्वतंत्र गवाह ने अदालत में अपने बयान से पूरी तरह इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें उनकी दुकान से बुलाया था और केवल कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। यह भी कहा कि उनकी मौजूदगी में कोई चरस बरामद नहीं हुई थी। उन्होंने दावा किया कि चरस पुलिस के पास थी, आरोपी के पास नहीं। अदालत ने पाया कि स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन की पूरी कहानी को ध्वस्त कर दिया। अभियोजन पक्ष लंबी जिरह के बावजूद स्वतंत्र गवाह के बयान से कोई अनुकूल तथ्य नहीं निकाल सका। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के बयान को स्वतंत्र गवाह के समर्थन के बिना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत आरोपी को दोषी ठहराने के लिए बहुत कमजोर थे। इन परिस्थितियों में, अदालत ने अभियोजन के मामले को संदेह के घेरे में पाया। अदालत ने श्याम सुंदर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर की अदालत ने 10 साल पुराने नौ ग्राम चरस बरामदगी मामले के आरोपी को बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। स्वतंत्र गवाह के अपने बयान से मुकर जाने के कारण अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ गई। यह मामला 14 फरवरी 2016 का है। पुलिस के अनुसार, एक टीम गानवी की ओर गश्त पर थी। शाम को उन्होंने एक व्यक्ति को राष्ट्रीय राजमार्ग से आते देखा। पुलिस को देखकर वह व्यक्ति मुड़ा और भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे पकड़ लिया और पूछताछ में उसने अपना नाम श्याम सुंदर बताया। संदेह होने पर उसकी तलाशी ली गई। पुलिस ने एक स्वतंत्र गवाह को साथ लिया। तलाशी के दौरान, श्याम सुंदर की काली पैंट की दाहिनी जेब से नौ ग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए सात गवाहों की जांच की। इनमें स्वतंत्र गवाह भी शामिल थे। स्वतंत्र गवाह ने अदालत में अपने बयान से पूरी तरह इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें उनकी दुकान से बुलाया था और केवल कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। यह भी कहा कि उनकी मौजूदगी में कोई चरस बरामद नहीं हुई थी। उन्होंने दावा किया कि चरस पुलिस के पास थी, आरोपी के पास नहीं। अदालत ने पाया कि स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन की पूरी कहानी को ध्वस्त कर दिया। अभियोजन पक्ष लंबी जिरह के बावजूद स्वतंत्र गवाह के बयान से कोई अनुकूल तथ्य नहीं निकाल सका। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के बयान को स्वतंत्र गवाह के समर्थन के बिना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत आरोपी को दोषी ठहराने के लिए बहुत कमजोर थे। इन परिस्थितियों में, अदालत ने अभियोजन के मामले को संदेह के घेरे में पाया। अदालत ने श्याम सुंदर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।