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यौन अपराधों से बच्चों को बचाना बेहद जरूरी : नेहा

Sun, 02 Nov 2025 11:30 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Nov 2025 11:30 PM IST
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A legal service camp was organised in the auditorium of PG College Rampur.
पीजी कॉलेज रामपुर में आयोजित विशाल विधिक साक्षरता शिविर में मौजूद मुख्यातिथि और अन्य। संवाद
रामपुर कॉलेज में बाल संरक्षण, नशा मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण का पढ़ाया पाठ
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। पीजी कॉलेज रामपुर के सभागार में विधिक सेवा शिविर लगा। शिविर में स्कूल के विद्यार्थियों को बाल संरक्षण, नशा मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दुष्कर्म और पॉक्सो) नेहा दहिया और रामपुर के थाना प्रभारी आशीष कौशल ने विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी और कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया। न्यायाधीश नेहा दहिया ने कहा कि बच्चों को यौन अपराधों से बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट, जिसे यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम- 2012 भी कहा जाता है। भारत में एक कानून है, जो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण और यौन अपराधों से बचाता है। यह अधिनियम यौन उत्पीड़न, यौन शोषण, बाल पोर्नोग्राफी और अन्य यौन अपराधों को कवर करता है, जिसमें बच्चे की सहमति भी मायने नहीं रखती है। इसके तहत बच्चों के लिए न्याय प्रक्रिया में बच्चे के हितों की रक्षा करने के लिए बाल अनुकूल तंत्र भी शामिल है। इसके तहत गंभीर अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। 18 साल से कम आयु के लड़कों को भी इस एक्ट के तहत संरक्षण मिलता है। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के तहत पहला कदम पुलिस से संपर्क करना और घटना की रिपोर्ट करना है। आप या तो व्यक्तिगत रूप से पुलिस स्टेशन जा सकते हैं या शिकायत दर्ज करवाने के लिए पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं। कानून में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। हिमाचल प्रदेश में 6 फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में जानकारी देना जरूरी है। बच्चों से अभिभावकों को पूछना चाहिए कि उन्हें कोई व्यक्ति बैड टच तो नहीं कर रहा या किसी प्रकार का शारीरिक शोषण तो नहीं कर रहा है। पीड़ित परिवार को तुरंत पुलिस में ऐसे मामलों पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

युवा नश से रहें दूर, खेल से करें प्रेम : आशीष
शिविर में थाना प्रभारी आशीष कौशल ने कहा कि युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नशे से निपटना है। आज गांव तक चिट्टे के गिरोह पैर पसार रहे हैं। युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए खेलों से प्रेम करना होगा। पढ़ाई में अधिक से अधिक ध्यान देना होगा। नशे का कारोबार करने वालों के बारे में पुलिस को तुरंत सूचना दें। पुलिस सूचना देने वाले की पहचान को पूर्ण रूप से गुप्त रखती है। शिमला पुलिस ने पिछले ढाई साल में 1100 के करीब एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज किए हैं। पर्यावरण संरक्षण और भूमंडल संरक्षण विषय पर अधिवक्ता तनुजा ठाकुर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का मतलब वायु, जल और भूमि जैसे प्राकृतिक पर्यावरण की गुणवत्ता को बनाए रखने और सुधारने के लिए किए गए प्रयासों से है। भूमंडल संरक्षण, जिसे पृथ्वी संरक्षण भी कह सकते हैं, का मतलब इस संरक्षण को एक व्यापक अर्थ में लेना है। इसमें पूरे ग्रह पृथ्वी और उसके संसाधनों, जैसे कि वन, वन्य जीव और जैव विविधता का संरक्षण शामिल है।
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