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Rampur Bushahar News: सुंडा-सनई सड़क पर आपदा प्रभावित क्षेत्र का समिति करेगी निरीक्षण
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आपदा प्रभावित सुंडा-सनेई सडक़ पर बना भूस्खलन का खतरा। संवाद
एसडीएम ने डीडीएमए के अध्यक्ष और उद्योग विभाग के निदेशक को भेजा पत्र
भूस्खलन और पत्थरों के गिरने की समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन से होगा समाधान
निरीक्षण के लिए भू-वैज्ञानिक उपलब्ध करवाने की भी उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर की नोगवैली को जोड़ने वाली सुंडा-सनेई सड़क पर भूस्खलन से खतरा बना हुआ है। वर्ष 2023 में यहां भारी भूस्खलन हुआ था। इसके बाद यह क्षेत्र आवाजाही के लिए अधिक संवेदनशील हो गया है। इस जगह सड़क के ठीक नीचे रचोली पंचायत का खोयी गांव हैं। इस गांव के ग्रामीण डर के साये में जी रहे हैं। सुंडा-सनेई सड़क के आपदा प्रभावित क्षेत्र का अब संयुक्त विभागीय समिति निरीक्षण करेगी। ग्रामीणों की इस समस्या के निवारण के लिए रामपुर उपमंडल प्रशासन ने जिला आपदा प्राधिकरण (डीडीएमए) के अध्यक्ष और उद्योग विभाग के निदेशक को पत्र जारी किया है। सुंडा-सनेई सड़क पर बीते कई वर्षों से भूस्खलन और पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी है। खासकर, बरसात के वक्त स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। पहाड़ी से निरंतर हो रहे भूस्खलन और पत्थर गिरने की रोकथाम के लिए क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त विभागीय समिति का गठन कर समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई थी। इसे लेकर डंसा और रचोली पंचायत के प्रतिनिधियों ने उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों की मांग के बाद उपमंडलाधिकारी हर्ष अमरेंद्र सिंह ने मंगलवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने के लिए संयुक्त विभागीय समिति के गठन की बात कही है। इस समिति में वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, मृदा संरक्षण विभाग, प्रधान ग्राम पंचायत रचोली, प्रधान ग्राम पंचायत डंसा और भू वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह समिति आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करेगी और एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रतिवेदन में प्रभावित क्षेत्र में वैज्ञानिक उपायों, चेक डैम, नियंत्रित ब्लास्टिंग, सुरक्षा अवरोधक आदि अन्य आवश्यक कार्यों के संबंध में विस्तृत लागत का आकलन किया जाएगा। उपमंडलाधिकारी ने प्रस्तावित संयुक्त निरीक्षण के लिए एक भू वैज्ञानिक उपलब्ध करवाने का भी आह्वान किया है, ताकि समिति की ओर से तकनीकी निरीक्षण कर निर्धारित समयावधि में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके। इस बारे में संबंधित विभागों और पंचायत प्रतिनिधियों को भी सूचित किया गया है।
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भूस्खलन और पत्थरों के गिरने की समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन से होगा समाधान
निरीक्षण के लिए भू-वैज्ञानिक उपलब्ध करवाने की भी उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर की नोगवैली को जोड़ने वाली सुंडा-सनेई सड़क पर भूस्खलन से खतरा बना हुआ है। वर्ष 2023 में यहां भारी भूस्खलन हुआ था। इसके बाद यह क्षेत्र आवाजाही के लिए अधिक संवेदनशील हो गया है। इस जगह सड़क के ठीक नीचे रचोली पंचायत का खोयी गांव हैं। इस गांव के ग्रामीण डर के साये में जी रहे हैं। सुंडा-सनेई सड़क के आपदा प्रभावित क्षेत्र का अब संयुक्त विभागीय समिति निरीक्षण करेगी। ग्रामीणों की इस समस्या के निवारण के लिए रामपुर उपमंडल प्रशासन ने जिला आपदा प्राधिकरण (डीडीएमए) के अध्यक्ष और उद्योग विभाग के निदेशक को पत्र जारी किया है। सुंडा-सनेई सड़क पर बीते कई वर्षों से भूस्खलन और पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी है। खासकर, बरसात के वक्त स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। पहाड़ी से निरंतर हो रहे भूस्खलन और पत्थर गिरने की रोकथाम के लिए क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त विभागीय समिति का गठन कर समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई थी। इसे लेकर डंसा और रचोली पंचायत के प्रतिनिधियों ने उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों की मांग के बाद उपमंडलाधिकारी हर्ष अमरेंद्र सिंह ने मंगलवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने के लिए संयुक्त विभागीय समिति के गठन की बात कही है। इस समिति में वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, मृदा संरक्षण विभाग, प्रधान ग्राम पंचायत रचोली, प्रधान ग्राम पंचायत डंसा और भू वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह समिति आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करेगी और एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रतिवेदन में प्रभावित क्षेत्र में वैज्ञानिक उपायों, चेक डैम, नियंत्रित ब्लास्टिंग, सुरक्षा अवरोधक आदि अन्य आवश्यक कार्यों के संबंध में विस्तृत लागत का आकलन किया जाएगा। उपमंडलाधिकारी ने प्रस्तावित संयुक्त निरीक्षण के लिए एक भू वैज्ञानिक उपलब्ध करवाने का भी आह्वान किया है, ताकि समिति की ओर से तकनीकी निरीक्षण कर निर्धारित समयावधि में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके। इस बारे में संबंधित विभागों और पंचायत प्रतिनिधियों को भी सूचित किया गया है।

आपदा प्रभावित सुंडा-सनेई सडक़ पर बना भूस्खलन का खतरा। संवाद