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गिरफतार वन रक्षकों को बचाने के लि बडे अधिकारी कर रहे कसरत

Fri, 03 Aug 2018 09:52 PM IST
Updated Fri, 03 Aug 2018 09:52 PM IST
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वन रक्षकों की गिरफ्तारी से
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अफसरों पर बढ़ रहा दबाव
- अपने मुलाजिमाें को बचाने में जुटा महकमा
- नाइट पेट्रोलिंग को बैक डेट में दर्शाने की कसरत

अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। गुज्जर गुलाम की हत्या के मामले में वन रक्षकों की गिरफ्तारी से विभाग के आला अफसर भी दबाव में आ गए हैं। एक तरफ वन रक्षकों के परिजनों का दबाव है तो दूसरी तरफ वन रक्षक यूनियन ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अधिकारियों पर बने इस दबाव के चलते हत्या मामले में फंसे वन रक्षकों को बचानेे की कसरत भी शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में गुज्जरों का दोष साबित करने के लिए बैक डेट से डीआर काटने की कवायद चल रही है। मकसद है कि विभाग अपना पक्ष मजबूत कर गुज्जरों की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर सके।
सूत्रों के अनुसार विभागीय स्तर के दबाव में आकर वन रक्षकों की रात की पेट्रोलिंग के बैक डेट से आदेश किए गए हैं। इस तरह से एक आधार बनाया जा रहा है, जिसमें साबित किया जा सके कि वन रक्षकों पेट्रोलिंग पर थे। यह आदेश रेंज ऑफिसर सरस्वती नगर को जारी किया गया है। वहीं, गुज्जरों के खिलाफ जंगल काटने की डैमेज रिपोर्ट बैक डेट से तैयार करने की भी कोशिशें हो रही हैं। सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि रात के समय छापामारी के लिए वन रक्षकाें को विभाग के अधिकारियों ने ही उकसाया था। अब जबकि वन रक्षकाें की गिरफ्तारी हो चुकी है तो उन्हें उकसाने वाले कुछ अधिकारियाें को भी फंसने का डर सता रहा है। ऐसे में वे चौतरफा दबाव और अपनी खाल बचाने की जुगत में हैं।
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डीएफओ रोहड़ू सीबी चंदू तहसीलदार का कहना है कि जहां पर गुज्जर पर हमला हुआ वहां के जंगल से लगातार अवैध कटान की सूचना मिल रही थी। इसलिए रेंज ऑफिसर को पेट्रोलिंग टीम बनाने के आदेश किए गए थे। वन रक्षकों को गुज्जरों पर हमला करने के लिए नहीं कहा गया था। सभी वन रक्षक रात को ड्यूटी पर थे। इस संबंध में वन रेंज सरस्वती नगर के रेंजर प्रेम मेहता के अनुसार वन रक्षकों की टीम को पंद्रह दिन में एक बार पेट्रोलिंग के आदेश होते हैं। उसके आधार पर टीम जंगल में रात के समय गई थी। गुज्जरों पर हमले के लिए उनको विभाग की ओर से नहीं कहा गया था।
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