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देवताओं की भावपूर्ण विदाई के साथ धोगी बूढ़ी दिवाली संपन्न
Updated Fri, 07 Dec 2018 10:15 PM IST
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देवताओं की भावपूर्ण विदाई के
साथ धोगी में बूढ़ी दिवाली संपन्न
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर दिनभर खूब झूमे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
दलाश (कुल्लू)। आउटर सिराज आनी के धोगी में तीन गढ़ों के देवता शमशरी महादेव के सम्मान में बूढ़ी दिवाली पर्व धूमधाम से मनाया गया। दो दिवसीय पर्व देवताओं की भावपूर्ण विदाई के साथ संपन्न हुआ और श्रद्धालुओं ने देवता से आशीर्वाद लिया। पर्व के अंतिम दिन देवता शमशरी महादेव और टौणानाग संग लोगों ने दिनभर वाद्ययंत्रों की थाप पर नाटी डाली।
इस देव कारज में वीरवार की रात को देवता शमशरी महादेव की पूजा करके आग की मशालें जलाकर लोगों ने मंदिर की परिक्रमा करके बुराई रूपी अंधेरे को प्रकाश रूपी मशालों से क्षेत्र के लिए सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान लोगों ने प्राचीन परंपरा को कायम रखते हुए जतियां गाई जिसमें किया माऊऐ किया काज बड़ी राजा देऊली राज देऊली वोले देऊलीऐ पारा ओरोऊ आई वुडिली ढेण तैसे नहीं सुना मेरा काम आदि गाईं। बुजुर्गों के अनुसार इनको गाने से भूत पिशाच आदि का भय नहीं रहता है। इसके अलावा दोपहर के समय मुंजी के घास से बने बड़े रस्से को नचाया गया और उसके बाद उस रस्सी को काटा जाता है और उस रस्सी को लोग अपने-अपने घर ले जाते हैं। कहा जाता है कि इसको अपने घर रखने से चूहे और सांप आदि नहीं निकलते हैं।
इस मौके पर विशेष तौर से बनाई गई मूंजी (घास से बना रस्सा) को दो दल अपनी-अपनी तरफ खींचते हैं। यह शक्ति प्रदर्शन देव-दानव के भयावह युद्ध और समुद्र मंथन की याद दिलाता है। इस दौरान आराध्य देव शमशरी महादेव और टौणा नाग अपने देवलुओं सहित खूब झूमे। वहीं ग्राम पंचायत बुच्छैर के सांस्कृतिक दल ने भी पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर ग्रामीणों के संग नाटी डालकर बेटी बचाओ और संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर संतोष ठाकुर, आत्मा राम, चमन शर्मा, विनोद ठाकुर, तारा चंद, विजय बोध, दिवान राजा, रणजीत ठाकुर, अंमी चंद, गुलाब ठाकुर, सचिन सूद और राहुल सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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साथ धोगी में बूढ़ी दिवाली संपन्न
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर दिनभर खूब झूमे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
दलाश (कुल्लू)। आउटर सिराज आनी के धोगी में तीन गढ़ों के देवता शमशरी महादेव के सम्मान में बूढ़ी दिवाली पर्व धूमधाम से मनाया गया। दो दिवसीय पर्व देवताओं की भावपूर्ण विदाई के साथ संपन्न हुआ और श्रद्धालुओं ने देवता से आशीर्वाद लिया। पर्व के अंतिम दिन देवता शमशरी महादेव और टौणानाग संग लोगों ने दिनभर वाद्ययंत्रों की थाप पर नाटी डाली।
इस देव कारज में वीरवार की रात को देवता शमशरी महादेव की पूजा करके आग की मशालें जलाकर लोगों ने मंदिर की परिक्रमा करके बुराई रूपी अंधेरे को प्रकाश रूपी मशालों से क्षेत्र के लिए सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान लोगों ने प्राचीन परंपरा को कायम रखते हुए जतियां गाई जिसमें किया माऊऐ किया काज बड़ी राजा देऊली राज देऊली वोले देऊलीऐ पारा ओरोऊ आई वुडिली ढेण तैसे नहीं सुना मेरा काम आदि गाईं। बुजुर्गों के अनुसार इनको गाने से भूत पिशाच आदि का भय नहीं रहता है। इसके अलावा दोपहर के समय मुंजी के घास से बने बड़े रस्से को नचाया गया और उसके बाद उस रस्सी को काटा जाता है और उस रस्सी को लोग अपने-अपने घर ले जाते हैं। कहा जाता है कि इसको अपने घर रखने से चूहे और सांप आदि नहीं निकलते हैं।
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इस मौके पर विशेष तौर से बनाई गई मूंजी (घास से बना रस्सा) को दो दल अपनी-अपनी तरफ खींचते हैं। यह शक्ति प्रदर्शन देव-दानव के भयावह युद्ध और समुद्र मंथन की याद दिलाता है। इस दौरान आराध्य देव शमशरी महादेव और टौणा नाग अपने देवलुओं सहित खूब झूमे। वहीं ग्राम पंचायत बुच्छैर के सांस्कृतिक दल ने भी पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर ग्रामीणों के संग नाटी डालकर बेटी बचाओ और संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर संतोष ठाकुर, आत्मा राम, चमन शर्मा, विनोद ठाकुर, तारा चंद, विजय बोध, दिवान राजा, रणजीत ठाकुर, अंमी चंद, गुलाब ठाकुर, सचिन सूद और राहुल सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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