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पराला मंडी में 4 हजार रुपये में बिकी 28 किलो सेब की पेटी
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ठियोग (रामपुर बुशहर)। ऊपरी शिमला की पराला मंडी बागवानों के लिए किसी रामबाण से कम साबित नहीं हो रही। बहुत साल पहले बागवान बाहरी राज्यों के लिए अपनी फसलों को लेकर जाते थे, लेकिन इसके बाद ठगी का शिकार भी हो जाते थे। बीते कुछ वर्षों से बागवानों को जहां ठगी से राहत मिली है, वहीं अब बागवानों को सेब के दाम भी उचित मिलने से उनके चेहरों पर खुशी देखने को मिल रही है।
शुक्रवार को पराला मंडी सेब की फसल लेकर आए बागवान सुदेश ठाकुर ने बताया कि वह 12 पेटियां सुपर क्वालिटी का सेब लेकर कारोबारी अनूप पाल चौहान के पास पहुंचे। 28 किलो सेब की पेटी की जब बोली लगनी शुरू हुई तो बड़ी-बड़ी मंडियों में मिलने वाले दामों को भी पीछे छोड़ गई। उनके सेब की बोली को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ गया। बस होना क्या था, 2 हजार से बोली लगनी शुरू हुई और 4000 का आंकड़ा पार कर गई। उन्होंने बताया कि ऊपरी शिमला में अधिकतर लोगों का जीवन सेब पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में साल भर की मेहनत का फल जब मिलता है तो किसी बागवान के लिए इससे बड़ा कोई पल नहीं हो सकता। वहीं अनूप फ्रूट कंपनी के संचालक अनूप चौहान ने बताया कि बागवानों को उनकी फसलों के दाम उचित दिलवाना आढ़ती का ही काम होता है। बाहरी राज्यों के कारोबारी बोली में शामिल होते हैं और जितने ज्यादा व्यापारी आते हैं, उतने ही सेब के दाम अधिक मिलते हैं। उन्होंने बागवानों से मंडी में कच्चा माल न लाने की अपील की है।
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शुक्रवार को पराला मंडी सेब की फसल लेकर आए बागवान सुदेश ठाकुर ने बताया कि वह 12 पेटियां सुपर क्वालिटी का सेब लेकर कारोबारी अनूप पाल चौहान के पास पहुंचे। 28 किलो सेब की पेटी की जब बोली लगनी शुरू हुई तो बड़ी-बड़ी मंडियों में मिलने वाले दामों को भी पीछे छोड़ गई। उनके सेब की बोली को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ गया। बस होना क्या था, 2 हजार से बोली लगनी शुरू हुई और 4000 का आंकड़ा पार कर गई। उन्होंने बताया कि ऊपरी शिमला में अधिकतर लोगों का जीवन सेब पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में साल भर की मेहनत का फल जब मिलता है तो किसी बागवान के लिए इससे बड़ा कोई पल नहीं हो सकता। वहीं अनूप फ्रूट कंपनी के संचालक अनूप चौहान ने बताया कि बागवानों को उनकी फसलों के दाम उचित दिलवाना आढ़ती का ही काम होता है। बाहरी राज्यों के कारोबारी बोली में शामिल होते हैं और जितने ज्यादा व्यापारी आते हैं, उतने ही सेब के दाम अधिक मिलते हैं। उन्होंने बागवानों से मंडी में कच्चा माल न लाने की अपील की है।
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