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स्कूल मैदान में मेल को नहीं मिली मंजूरी
Updated Tue, 19 Jun 2018 09:32 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
बीते कई दशकों से नोगली में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय मेले पर इस बार संकट के बादल छा गए हैं। शैक्षणिक स्थानों में गैर शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रदेश हाईकोर्ट की रोक के बाद इस वर्ष नोगली स्कूल में मेला आयोजित करने को लेकर मेला कमेटी को मंजूरी नहीं मिल पाई है। यही नहीं मेला आयोजित करने वाली लक्ष्मी नारायण मंदिर कमेटी ने नौ देवी-देवताओं को मेले में आने का निमंत्रण दिया था। जगह का अभाव होने के कारण अब पांच देवता ही मेले में शिरकत करेंगे।
मेला कमेटी अध्यक्ष का कहना है कि इस तरह के पारंपरिक मेलों से लोगों की आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में कड़े संघर्ष के बाद इस स्कूल मैदान का निर्माण करवाया गया था, जिसमें मंदिर कमेटी ने ही अपना पूरा योगदान दिया है। स्कूल की आवश्यकताओं को देखते हुए इस मैदान को छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए मंदिर कमेटी ने दिया था। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में सजरानस्व के बाजूउलज में जिस तरह से किसानों के वनों के अधिकार है। उसी तर्ज पर मेले, रास्ते और पानी का अधिकार स्वत ही लिखित है। साथ ही कानून इन्हें मान्यता देता आया है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि इन अधिकारों के बावजूद पारंपरिक मेले के आयोजन स्थल पर रोक लगा दी है। देवता साहिब लक्ष्मी नारायण मंदिर जिला स्तरीय मेला कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण गोपाल भारद्वाज ने बताया कि इस वर्ष उपायुक्त शिमला से जिला स्तरीय नोगली मेले के आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिल पाई है। पूर्व में जहां नौ देवी देवताओं को इस मेले में आने का निमंत्रण दिया गया था, वह अब पर्याप्त जगह का प्रावधान न होने के कारण अब पांच देवी-देवताओं को बुलाया है। उन्होंने प्रदेश हाईकोर्ट से जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मेले के आयोजन को मंजूरी देने की मांग की है। उन्होंने बताया कि मेला कमेटी ने अपने स्तर पर छोटे से मैदान का निर्माण कर मेला आयोजित करने की व्यवस्था की है। लेकिन इस बार आयोजन में दिक्कतें पेश आ सकती हैं।
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रामपुर बुशहर।
बीते कई दशकों से नोगली में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय मेले पर इस बार संकट के बादल छा गए हैं। शैक्षणिक स्थानों में गैर शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रदेश हाईकोर्ट की रोक के बाद इस वर्ष नोगली स्कूल में मेला आयोजित करने को लेकर मेला कमेटी को मंजूरी नहीं मिल पाई है। यही नहीं मेला आयोजित करने वाली लक्ष्मी नारायण मंदिर कमेटी ने नौ देवी-देवताओं को मेले में आने का निमंत्रण दिया था। जगह का अभाव होने के कारण अब पांच देवता ही मेले में शिरकत करेंगे।
मेला कमेटी अध्यक्ष का कहना है कि इस तरह के पारंपरिक मेलों से लोगों की आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में कड़े संघर्ष के बाद इस स्कूल मैदान का निर्माण करवाया गया था, जिसमें मंदिर कमेटी ने ही अपना पूरा योगदान दिया है। स्कूल की आवश्यकताओं को देखते हुए इस मैदान को छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए मंदिर कमेटी ने दिया था। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में सजरानस्व के बाजूउलज में जिस तरह से किसानों के वनों के अधिकार है। उसी तर्ज पर मेले, रास्ते और पानी का अधिकार स्वत ही लिखित है। साथ ही कानून इन्हें मान्यता देता आया है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि इन अधिकारों के बावजूद पारंपरिक मेले के आयोजन स्थल पर रोक लगा दी है। देवता साहिब लक्ष्मी नारायण मंदिर जिला स्तरीय मेला कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण गोपाल भारद्वाज ने बताया कि इस वर्ष उपायुक्त शिमला से जिला स्तरीय नोगली मेले के आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिल पाई है। पूर्व में जहां नौ देवी देवताओं को इस मेले में आने का निमंत्रण दिया गया था, वह अब पर्याप्त जगह का प्रावधान न होने के कारण अब पांच देवी-देवताओं को बुलाया है। उन्होंने प्रदेश हाईकोर्ट से जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मेले के आयोजन को मंजूरी देने की मांग की है। उन्होंने बताया कि मेला कमेटी ने अपने स्तर पर छोटे से मैदान का निर्माण कर मेला आयोजित करने की व्यवस्था की है। लेकिन इस बार आयोजन में दिक्कतें पेश आ सकती हैं।
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