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Rampur Bushahar News: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास
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फास्ट ट्रैक कोर्ट शिमला ने पोक्सो के तहत सुनाया फैसला
दिसंबर 2024 में जुब्बल थाना में मामला हुआ था दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषी अंशुल को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह फैसला यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) की धारा-6 के तहत सुनाया गया। यह मामला 7 दिसंबर 2024 को जुब्बल थाने में दर्ज किया गया था। शिकायत में एक नाबालिग बालिका के साथ गंभीर यौन अपराध का आरोप था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की, जिसमें पीड़िता और उसके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। जांच के दौरान पुलिस टीम ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। पीड़िता का बयान, चिकित्सीय और वैज्ञानिक साक्ष्य विधि अनुसार दर्ज किए गए। साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि कर समयबद्ध तरीके से न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मिलकर न्यायालय के समक्ष साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। फास्ट ट्रैक कोर्ट शिमला ने अंशुल निवासी जुब्बल जिला शिमला को दोषी करार दिया।
वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि इस मामले में दोषसिद्धि सुनिश्चित की गई। पुलिस महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के प्रति गंभीर है। पुलिस का लक्ष्य पीड़ितों को न्याय दिलाना है। दोषियों को कानून के दायरे में लाना उनकी प्राथमिकता है।
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दिसंबर 2024 में जुब्बल थाना में मामला हुआ था दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषी अंशुल को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह फैसला यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) की धारा-6 के तहत सुनाया गया। यह मामला 7 दिसंबर 2024 को जुब्बल थाने में दर्ज किया गया था। शिकायत में एक नाबालिग बालिका के साथ गंभीर यौन अपराध का आरोप था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की, जिसमें पीड़िता और उसके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। जांच के दौरान पुलिस टीम ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। पीड़िता का बयान, चिकित्सीय और वैज्ञानिक साक्ष्य विधि अनुसार दर्ज किए गए। साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि कर समयबद्ध तरीके से न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मिलकर न्यायालय के समक्ष साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। फास्ट ट्रैक कोर्ट शिमला ने अंशुल निवासी जुब्बल जिला शिमला को दोषी करार दिया।
वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि इस मामले में दोषसिद्धि सुनिश्चित की गई। पुलिस महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के प्रति गंभीर है। पुलिस का लक्ष्य पीड़ितों को न्याय दिलाना है। दोषियों को कानून के दायरे में लाना उनकी प्राथमिकता है।
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