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चरमरा कर रह गई सिविल अस्ताल चौपाल में स्वास्थ्य सेवाएं
Updated Sat, 04 Nov 2017 09:46 PM IST
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न अल्ट्रासाउंड सुविधा, न एक्सरे हो रहे
चौपाल अस्पताल में पांच चिकित्सकों के पद खाली, लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
चौपाल।
उपमंडल मुख्यालय के सिविल अस्पताल चौपाल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के पांच पद खाली चल रहे हैं। लैब तकनीशियन की कमी के कारण मरीज टेस्टों के लिए निजी क्लीनिकों के चक्कर काट रहे हैं। सिविल अस्पताल चौपाल में दंत चिकित्सक सहित पांच डॉक्टरों के पद खाली हैं। 30 बिस्तर वाले अस्पताल में केवल दो डॉक्टर दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से एक चिकित्सक के छुट्टी पर होने से दूसरा डॉक्टर अकेला रह जाता है।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। एक्सरे के लिए तकनीशियन न होने के कारण मशीन धूल फांक रही है। लंबे समय से लैब तकनीशियन का पद खाली है। लोगों को प्राइवेट क्लीनिकों में महंगे दाम पर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा लोगों को उपचार के लिए 100 किमी का सफर कर शिमला जाना पड़ रहा है। अस्पताल चौपाल की डेंटल ओपीडी में अक्सर ताला लटका रहता है। आपातकालीन स्थिति में मूलभूत सुविधाएं नहीं। समय पर उपचार नहीं मिलने से कई लोगों की जान जा चुकी है। सिविल अस्पताल चौपाल के अधीन 27 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी केंद्रों से मरीज चौपाल रेफर होते हैं, यहां से उनको शिमला भेजा जाता है। चौपाल उपमंडल में खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मामला कई बार उठा। लेकिन कुछ नहीं हो सका। चौपाल समाजसेवी पंकज कुमार, सोहन सिंह, शिवलाल, कुलदीप, प्रदीप कुमार, संजू, दिनेश, नाथूराम, प्रमोद कुमार, ने कहा कि चौपाल अस्पताल की दुर्दशा के लिए कांग्रेस व भाजपा दोनाें ही जिम्मेदार हैं। अस्पताल रामभरोसे चल रहा है। उधर, खंड चिकित्सा अधिकारी भरत कुमार ने कहा कि सभी खाली पदों की सूची समय-समय पर विभाग को भेजी जाती है।
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चौपाल अस्पताल में पांच चिकित्सकों के पद खाली, लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
चौपाल।
उपमंडल मुख्यालय के सिविल अस्पताल चौपाल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के पांच पद खाली चल रहे हैं। लैब तकनीशियन की कमी के कारण मरीज टेस्टों के लिए निजी क्लीनिकों के चक्कर काट रहे हैं। सिविल अस्पताल चौपाल में दंत चिकित्सक सहित पांच डॉक्टरों के पद खाली हैं। 30 बिस्तर वाले अस्पताल में केवल दो डॉक्टर दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से एक चिकित्सक के छुट्टी पर होने से दूसरा डॉक्टर अकेला रह जाता है।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। एक्सरे के लिए तकनीशियन न होने के कारण मशीन धूल फांक रही है। लंबे समय से लैब तकनीशियन का पद खाली है। लोगों को प्राइवेट क्लीनिकों में महंगे दाम पर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा लोगों को उपचार के लिए 100 किमी का सफर कर शिमला जाना पड़ रहा है। अस्पताल चौपाल की डेंटल ओपीडी में अक्सर ताला लटका रहता है। आपातकालीन स्थिति में मूलभूत सुविधाएं नहीं। समय पर उपचार नहीं मिलने से कई लोगों की जान जा चुकी है। सिविल अस्पताल चौपाल के अधीन 27 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी केंद्रों से मरीज चौपाल रेफर होते हैं, यहां से उनको शिमला भेजा जाता है। चौपाल उपमंडल में खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मामला कई बार उठा। लेकिन कुछ नहीं हो सका। चौपाल समाजसेवी पंकज कुमार, सोहन सिंह, शिवलाल, कुलदीप, प्रदीप कुमार, संजू, दिनेश, नाथूराम, प्रमोद कुमार, ने कहा कि चौपाल अस्पताल की दुर्दशा के लिए कांग्रेस व भाजपा दोनाें ही जिम्मेदार हैं। अस्पताल रामभरोसे चल रहा है। उधर, खंड चिकित्सा अधिकारी भरत कुमार ने कहा कि सभी खाली पदों की सूची समय-समय पर विभाग को भेजी जाती है।
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