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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   6 दिन निजी बसों के हवाले आनी उपमंडल की परिवहन व्यवस्था

चुनावी ड्यूटी में विभिन्न डिपो की जाएंगी 24 बसें

Mon, 13 May 2019 12:20 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 13 May 2019 12:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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आनी (कुल्लू)। आनी उपमंडल में बुधवार से परिवहन व्यवस्था निजी निजी बसों के हवाले रहेगी। परिवहन निगम की अधिकतर बसें चुनावी ड्यूटी में कर्मचारियों को लेकर जाएंगी और उन्हें वापस लाएंगी। निगम की अधिकतर बसों के चुनावी ड्यूटी में जाने के कारण लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ेंगी। यह दिक्कत 19 मई तक रहने वाली है।
अड्डा प्रभारी आनी ओम ठाकुर ने बताया कि 15 मई बुधवार प्रात: सब डिपो आनी से 24 बसों को बंजार, कुल्लू और मनाली विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को पहुंचाने हेतु चुनाव आयोग के दिशा निर्देश अनुसार भेजा जा रहा है। इनमें दस बसें कुल्लू, सात मनाली और सात बसों को बंजार भेजा जा रहा है। इसको लेकर बाकायदा सूचना बोर्ड पर सूचना प्रकाशित कर दी है। हालांकि जनता को परेशानी होगी, फिर भी स्थानीय और कुछ लांग रूटों की बसों को बहाल करने की व्यवस्था की जा रही है। अड्डा प्रभारी ने क्षेत्र की जनता से सहयोग की अपील की है।
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परिवहन निगम के इस फैसले से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अधिकतर स्कूली छात्रों का आना-जाना परिवहन निगम की बसों पर ही निर्भर है, जो दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आनी पहुंचती हैं। कर्मचारी और स्कूल कॉलेज के छात्र इन्हीं बसों में रोजाना सफर करते हैं। आनी सब डिपो में इस समय रामपुर डिपो से लगभग 50 के आसपास के रूट चलाए जाते हैं, जिनमें छतरी, कोठी, खनाग, लौहाल, रोहाचड़ा, कराना, जाबो, खुन्न, कोयला, कंडागई, नित्थर, दुराह, रामपुर, चंडीगढ़ और कुल्लू सहित कई अन्य रुट शामिल हैं। ये रूट छह दिन तक प्रभावित रहेंगे। वहीं मौजूदा समय में आनी में लगभग एक दर्जन के करीब निजी बसें हैं, जो मात्र स्थानीय रूटों पर ही अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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क्षेत्र के ख्याली राम ठाकुर, रंजीत वर्मा, जितेंद्र कुमार, कमल दत्त, सुरेंद्र शर्मा, जोतराम सहित अन्य के अनुसार लोकसभा चुनावों में कर्मचारियों को अपने ही विधानसभा क्षेत्र में रखा जाए न कि यहां के कर्मचारियों को दूसरी विधानसभा से, वहां के कर्मचारियों को यहां लाया जाए, इससे अधिकतर यह समस्या उत्पन्न होती है, जिससे कर्मचारी भी परेशान होते हैं। चुनाव ड्यूटी में स्थानीय स्तर पर ही कर्मचारियों को लगाया जाए तो उनका इतना अधिक समय बर्बाद नहीं होगा और इससे चुनावी खर्च में भी कमी आएगी।
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