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कोटी गांव के आर्थिक संपन परिवारों की चंद घंटों में खाक हो गई पूरी पूंजी
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राख के ढेर में बदल गई जमापूंजी
लोगों के तन पर बचे केवल कपड़े
कोटी अग्निकांड ने बेघर कर दिए 21 परिवार, सात घंटे लगे आग काबू करने में
पानी के पाइप तोड़कर पावर स्प्रेयर से आग बुझाने में डटे रहे ग्रामीण
फायर ब्रिगेड की टीम ने पहुंचती तो राख हो जाता कोटी गांव
अमर उजाला ब्यूरो
कोटखाई। कोटखाई के कोटी गांव में भीषण अग्निकांड ने 21 परिवारों से छत छीन ली है। तन पर जो कपड़े थे, वही इनके पास बचे हैं। जीवन भर की जमापूंजी राख के ढेर में तबदील हो गई। राख के ढेर में जले सामान को देखकर प्रभावितों के आंसू नहीं थम रहे। प्रभावित परिवार रिश्तेदारों और दूसरे लोगों को घर में रहने को मजबूर हो गए हैं। आधी रात को जब आग भड़की तो लोगों ने पानी के पाइप तोड़कर पावर स्प्रेयर से इसे बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। गनीमत रही कि फायर ब्रिगेड की टीम सही समय पर मौके पर पहुंच गई, नहीं तो पूरा गांव राख के ढेर में बदल जाता। टीम को आग पर काबू पाने में सात घंटे लग गए। हालांकि, सात घरों के करीब 80 कमरों को जलने से नहीं बचाया सका।
आग की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग भी कोटी पहुुंच गए और आग को काबू पाने के लिए प्रयास किए। दमकल दस्ते ने लोगों के साथ मिलकर सात घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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आग के डर से घरों से बाहर फेंक दिया सामान
आग को भड़कता देख गांव के कई लोगों ने भीतर रखा सामान बाहर फेंक दिया। हालांकि, अधिकांश परिवारों के पास केवल तन के कपडे़ ही बचे हैं। प्रभावितों को गांव के दूसरे लोगों ने अपने यहां रखा है। आग की सूचना मिलते ही प्रभावितों के रिश्तेदार भी मौके पर पहुंचे हैं।
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रोते-बिलखते लोगों को देख पसीज गया दिल
अग्निकांड के बाद राख के ढेर में तबदील हुए घरों को देखकर प्रभावित सुबह तक रोते-बिलखते रहे। इन्हें देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। दिन के समय गांव में प्रभावितों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी। राधे देवी, कष्णा ने बताया कि उनको आग का पता उस समय चला, जब घर का आधा हिस्सा इसकी चपेट में आ चुका था। जुब्बल कोटखाई के पूर्व विधायक रोहित ठाकुर ने अग्निकांड पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रभावितों को अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने अन्य संस्थाओं से भी प्रभावितों के सहयोग में आगे आने का आग्रह किया है।
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अग्निकांड में बेघर हो गए ये परिवार
पदम सिंह, नीरज गांगटा, अशोक गांगटा, राधो देवी, हाकम सिंह, लाकिंद्र सिंह, भोपिंद्र सिंह, कृष्णा देवी, राजिंद्र सिंह, राजपाल, पुष्पा देवी, वृज लाल, ध्यान सिंह, रमेश, राकेश, राहुल, विरेंद्र, राजिंद्र, मोहन सिंह, निशांत।
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लोगों के तन पर बचे केवल कपड़े
कोटी अग्निकांड ने बेघर कर दिए 21 परिवार, सात घंटे लगे आग काबू करने में
पानी के पाइप तोड़कर पावर स्प्रेयर से आग बुझाने में डटे रहे ग्रामीण
फायर ब्रिगेड की टीम ने पहुंचती तो राख हो जाता कोटी गांव
अमर उजाला ब्यूरो
कोटखाई। कोटखाई के कोटी गांव में भीषण अग्निकांड ने 21 परिवारों से छत छीन ली है। तन पर जो कपड़े थे, वही इनके पास बचे हैं। जीवन भर की जमापूंजी राख के ढेर में तबदील हो गई। राख के ढेर में जले सामान को देखकर प्रभावितों के आंसू नहीं थम रहे। प्रभावित परिवार रिश्तेदारों और दूसरे लोगों को घर में रहने को मजबूर हो गए हैं। आधी रात को जब आग भड़की तो लोगों ने पानी के पाइप तोड़कर पावर स्प्रेयर से इसे बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। गनीमत रही कि फायर ब्रिगेड की टीम सही समय पर मौके पर पहुंच गई, नहीं तो पूरा गांव राख के ढेर में बदल जाता। टीम को आग पर काबू पाने में सात घंटे लग गए। हालांकि, सात घरों के करीब 80 कमरों को जलने से नहीं बचाया सका।
आग की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग भी कोटी पहुुंच गए और आग को काबू पाने के लिए प्रयास किए। दमकल दस्ते ने लोगों के साथ मिलकर सात घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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आग के डर से घरों से बाहर फेंक दिया सामान
आग को भड़कता देख गांव के कई लोगों ने भीतर रखा सामान बाहर फेंक दिया। हालांकि, अधिकांश परिवारों के पास केवल तन के कपडे़ ही बचे हैं। प्रभावितों को गांव के दूसरे लोगों ने अपने यहां रखा है। आग की सूचना मिलते ही प्रभावितों के रिश्तेदार भी मौके पर पहुंचे हैं।
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रोते-बिलखते लोगों को देख पसीज गया दिल
अग्निकांड के बाद राख के ढेर में तबदील हुए घरों को देखकर प्रभावित सुबह तक रोते-बिलखते रहे। इन्हें देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। दिन के समय गांव में प्रभावितों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी। राधे देवी, कष्णा ने बताया कि उनको आग का पता उस समय चला, जब घर का आधा हिस्सा इसकी चपेट में आ चुका था। जुब्बल कोटखाई के पूर्व विधायक रोहित ठाकुर ने अग्निकांड पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रभावितों को अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने अन्य संस्थाओं से भी प्रभावितों के सहयोग में आगे आने का आग्रह किया है।
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अग्निकांड में बेघर हो गए ये परिवार
पदम सिंह, नीरज गांगटा, अशोक गांगटा, राधो देवी, हाकम सिंह, लाकिंद्र सिंह, भोपिंद्र सिंह, कृष्णा देवी, राजिंद्र सिंह, राजपाल, पुष्पा देवी, वृज लाल, ध्यान सिंह, रमेश, राकेश, राहुल, विरेंद्र, राजिंद्र, मोहन सिंह, निशांत।