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रोहडू अस्पताल के लिए नियुक्त विशेषज्ञ डाक्टर के पहुंचने से पहले तबादला आदेश रदद
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ज्वाइन करने से पहले ही रूकवाए जा रहे हैं तबादले
रोहड़ू अस्पताल में विशेषज्ञों के रिक्त पदों पर नहीं हुईं भर्तियां
तीन विशेषज्ञों के तबादले भी रुके, लोग झेल रहे परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। स्थानीय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने का खामियाजा हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यहां पर ट्रांसफर होने वाले चिकित्सक ज्वाइन करने से पहले ही अपनी एडजेस्टमेंट करवा लेते हैं। ऐसे में लोगों को ज्यादा खर्चा करके निजी अस्पतालों या फिर कई किमी दूर शिमला आईजीएमसी में ही सेवाएं लेनी पड़ रही हैं।
सिविल अस्पताल रोहडू में मौजूदा समय में केवल मात्र एक महिला रोग विषेशज्ञ है। दो सौ बिस्तर वाले इस अस्पताल में नौ विशेषज्ञों के पद सृजित हैं। अस्पताल में वर्तमान में डॉक्टरों के करीब 15 पद खाली चल रहे हैं। मरीजों को विशेष के सलाह लेने के लिए करीब एक सौ दस किलोमीटर दूर आईजीएमसी शिमला पहुंचना पड़ता है। हिमपात और अन्य परिस्थितियों में लोगों के पास दूसरा कोई विकल्प इस क्षेत्र में नहीं है। अस्पताल में रोहड़ू , जुब्बल और सीमावर्ती उत्तराखंड से लेकर डोडरा क्वार तक के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। क्षेत्र के निवासी मोहन सिंह, प्रमोद ठाकुर, बलबीर सिंह, प्रदीप चौहान, अशोक चौहान और पवन ने बताया कि सरकार अस्पताल में भी राजनीति कर रही है। अस्पताल जैसे संस्थान आम गरीब लोगों की सुविधा के लिए खोले जाते हैं।
ब्लॉक कांग्रेस रोहड़ू के महासचिव हैप्पी मेहता के अनुसार अस्पताल में भाजपा राजनीति की जा रही है। यहां के भाजपा नेताओं को जनता के बीच जाकर वोट मांगने का अधिकार नहीं है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद रोहड़ू से सभी विशेष डॉक्टरों के तबादले कर दिए गए। अभी तक उनके स्थान पर कोई नई नियुक्ति नहीं हो पाई है। सिविल अस्पताल रोहड़ू के लिए सरकार ने 22 फरवरी को बाल रोग विशेषज्ञ का तबादला पालमपुर से रोहडू के लिए किया था। डॉक्टर ने अभी रोहडू में ज्वाइन भी नहीं किया था कि एक मार्च को उनके तबादला आदेश सरकार की ओर से रदद कर दिए गए। इससे कुछ महीने पहले भी सरकार ने रोहड़ू ट्रांसफर किए डॉक्टरों के आदेश रद्द करके एक को मंडी तो दूसरे को एक बिलासपुर भेज दिया था। सरकार की इस कवायद पर ब्लॉक कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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भाजपा मंडल रोहडू के अध्यक्ष बलदेव रांटा के अनुसार डॉक्टर की नियुक्ति रद्द करने का मामला उनके ध्यान में नहीं है। सरकार की ओर से डॉक्टर की नियुक्ति किसी कारण ही रद हुई होगी। इसमें कोई राजनीति भेदभाव नहीं है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मिल कर बात की जाएगी।
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रोहड़ू अस्पताल में विशेषज्ञों के रिक्त पदों पर नहीं हुईं भर्तियां
तीन विशेषज्ञों के तबादले भी रुके, लोग झेल रहे परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। स्थानीय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने का खामियाजा हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यहां पर ट्रांसफर होने वाले चिकित्सक ज्वाइन करने से पहले ही अपनी एडजेस्टमेंट करवा लेते हैं। ऐसे में लोगों को ज्यादा खर्चा करके निजी अस्पतालों या फिर कई किमी दूर शिमला आईजीएमसी में ही सेवाएं लेनी पड़ रही हैं।
सिविल अस्पताल रोहडू में मौजूदा समय में केवल मात्र एक महिला रोग विषेशज्ञ है। दो सौ बिस्तर वाले इस अस्पताल में नौ विशेषज्ञों के पद सृजित हैं। अस्पताल में वर्तमान में डॉक्टरों के करीब 15 पद खाली चल रहे हैं। मरीजों को विशेष के सलाह लेने के लिए करीब एक सौ दस किलोमीटर दूर आईजीएमसी शिमला पहुंचना पड़ता है। हिमपात और अन्य परिस्थितियों में लोगों के पास दूसरा कोई विकल्प इस क्षेत्र में नहीं है। अस्पताल में रोहड़ू , जुब्बल और सीमावर्ती उत्तराखंड से लेकर डोडरा क्वार तक के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। क्षेत्र के निवासी मोहन सिंह, प्रमोद ठाकुर, बलबीर सिंह, प्रदीप चौहान, अशोक चौहान और पवन ने बताया कि सरकार अस्पताल में भी राजनीति कर रही है। अस्पताल जैसे संस्थान आम गरीब लोगों की सुविधा के लिए खोले जाते हैं।
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ब्लॉक कांग्रेस रोहड़ू के महासचिव हैप्पी मेहता के अनुसार अस्पताल में भाजपा राजनीति की जा रही है। यहां के भाजपा नेताओं को जनता के बीच जाकर वोट मांगने का अधिकार नहीं है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद रोहड़ू से सभी विशेष डॉक्टरों के तबादले कर दिए गए। अभी तक उनके स्थान पर कोई नई नियुक्ति नहीं हो पाई है। सिविल अस्पताल रोहड़ू के लिए सरकार ने 22 फरवरी को बाल रोग विशेषज्ञ का तबादला पालमपुर से रोहडू के लिए किया था। डॉक्टर ने अभी रोहडू में ज्वाइन भी नहीं किया था कि एक मार्च को उनके तबादला आदेश सरकार की ओर से रदद कर दिए गए। इससे कुछ महीने पहले भी सरकार ने रोहड़ू ट्रांसफर किए डॉक्टरों के आदेश रद्द करके एक को मंडी तो दूसरे को एक बिलासपुर भेज दिया था। सरकार की इस कवायद पर ब्लॉक कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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भाजपा मंडल रोहडू के अध्यक्ष बलदेव रांटा के अनुसार डॉक्टर की नियुक्ति रद्द करने का मामला उनके ध्यान में नहीं है। सरकार की ओर से डॉक्टर की नियुक्ति किसी कारण ही रद हुई होगी। इसमें कोई राजनीति भेदभाव नहीं है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मिल कर बात की जाएगी।