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8 से 10 फुट मोटे हिमखंड में नहीं लग पा रहा लापता जवानों का सुराग
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नहीं मिले हिमखंड में दबे सेना के पांच जवान
8 से 10 फुट मोटे हिमखंड में नहीं लग पा रहा कोई सुराग
डीआरडीओ, खोजी कुत्ते और सैकड़ों जवान जुटे सर्च ऑपरेशन में
बार-बार हुई बर्फबारी से सर्च ऑपरेशन में बढ़ी बाधा
अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)। भारत-तिब्बत सीमा के साथ डोगरी नाले में आए हिमखंड में दबे सेना के पांच जवानों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। शुक्रवार को 10वें दिन भी विशेष दस्तों सहित सैकड़ों जवान लापता जवानों की तलाश में जुटे रहे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पाई। करीब 8 से 10 फुट मोटे हिमखंड में जवानों को तलाशने का अभियान जारी है। वहीं बार बार हुई बर्फबारी से भी यहां बर्फ की मोटी परत जम गई है, जिसे हटाना काफी कठिन है। हालांकि उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद ने बताया कि नमज्ञा डोगरी के पास दबे जवानों की खोजबीन करते समय एक घड़ी मिली है। उम्मीद है कि अब जवान मिल जाए। आज फिर से रेस्कू किया जाएगा।
किन्नौर जिले की नमज्ञा पंचायत के डोगरी नाले में हिमखंड की चपेट में आए जवानों का 10वें दिन भी कोई सुराग नहीं लग पाया है। शुक्रवार सुबह सात बजे सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ और देर शाम तक जारी रहा। दिल्ली से आए डीआरडीओ के दल भी लापता जवानों को तलाशने में जुटा हुआ है। वहीं जवानों की छानबीन के लिए तीन खोजी कुत्ते, इंजीनियर्स फोर्स, सीमा सड़क संगठन, डोगरा स्काउट, जेके राईफलस, रडार टीम और लद्दाख से पहुंची ग्लेशिर सर्च टीमें लापता जवानों को तलाश करने में जुटी हुई हैं। हालांकि अब सेना ने क्षेत्र के ग्रामीणों को भी लापता जवानों को तलाशने के लिए अपनी अनुमति दे दी है, लेकिन लापता जवानों का कोई सुराग नहीं लग पा रहा। सेना के 300 जवान, आईटीबीपी की 17वीं वाहिनी के करीब 70 जवान, स्पेशल जम्मू, लदाख, कश्मीर से आए ग्लेशियर विशेषज्ञ दल और डीआरडीओ की टीमें, तीन खोजी कुत्तों और सीमा सडक़ संगठन के जवान और 3 मशीनें लापता जवानों की तलाश में जुटे हुए हैं। 8 से 12 फुट गहरे हिमखंडों को बेलचे और चैनसा से समूचे ग्लेश्यिरों के चारों और 10 सेक्शनों में बंट कर जांच की जा रही है।
एडीएम पूह शिव मोहन सेनी और एसपी किन्नौर साक्षी वर्मा ने बताया कि खराब मौसम और डोगरी नाले में दोबारा ग्लेश्यिर आने से रेस्क्यू करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं, लेकिन सेना के जवान लगातार लापता जवानों को तलाश रहे हैं।
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8 से 10 फुट मोटे हिमखंड में नहीं लग पा रहा कोई सुराग
डीआरडीओ, खोजी कुत्ते और सैकड़ों जवान जुटे सर्च ऑपरेशन में
बार-बार हुई बर्फबारी से सर्च ऑपरेशन में बढ़ी बाधा
अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)। भारत-तिब्बत सीमा के साथ डोगरी नाले में आए हिमखंड में दबे सेना के पांच जवानों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। शुक्रवार को 10वें दिन भी विशेष दस्तों सहित सैकड़ों जवान लापता जवानों की तलाश में जुटे रहे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पाई। करीब 8 से 10 फुट मोटे हिमखंड में जवानों को तलाशने का अभियान जारी है। वहीं बार बार हुई बर्फबारी से भी यहां बर्फ की मोटी परत जम गई है, जिसे हटाना काफी कठिन है। हालांकि उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद ने बताया कि नमज्ञा डोगरी के पास दबे जवानों की खोजबीन करते समय एक घड़ी मिली है। उम्मीद है कि अब जवान मिल जाए। आज फिर से रेस्कू किया जाएगा।
किन्नौर जिले की नमज्ञा पंचायत के डोगरी नाले में हिमखंड की चपेट में आए जवानों का 10वें दिन भी कोई सुराग नहीं लग पाया है। शुक्रवार सुबह सात बजे सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ और देर शाम तक जारी रहा। दिल्ली से आए डीआरडीओ के दल भी लापता जवानों को तलाशने में जुटा हुआ है। वहीं जवानों की छानबीन के लिए तीन खोजी कुत्ते, इंजीनियर्स फोर्स, सीमा सड़क संगठन, डोगरा स्काउट, जेके राईफलस, रडार टीम और लद्दाख से पहुंची ग्लेशिर सर्च टीमें लापता जवानों को तलाश करने में जुटी हुई हैं। हालांकि अब सेना ने क्षेत्र के ग्रामीणों को भी लापता जवानों को तलाशने के लिए अपनी अनुमति दे दी है, लेकिन लापता जवानों का कोई सुराग नहीं लग पा रहा। सेना के 300 जवान, आईटीबीपी की 17वीं वाहिनी के करीब 70 जवान, स्पेशल जम्मू, लदाख, कश्मीर से आए ग्लेशियर विशेषज्ञ दल और डीआरडीओ की टीमें, तीन खोजी कुत्तों और सीमा सडक़ संगठन के जवान और 3 मशीनें लापता जवानों की तलाश में जुटे हुए हैं। 8 से 12 फुट गहरे हिमखंडों को बेलचे और चैनसा से समूचे ग्लेश्यिरों के चारों और 10 सेक्शनों में बंट कर जांच की जा रही है।
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एडीएम पूह शिव मोहन सेनी और एसपी किन्नौर साक्षी वर्मा ने बताया कि खराब मौसम और डोगरी नाले में दोबारा ग्लेश्यिर आने से रेस्क्यू करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं, लेकिन सेना के जवान लगातार लापता जवानों को तलाश रहे हैं।
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