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पुलवामा हमले में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस के जवानों को मिले शहीद का दर्जा
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केंद्रीय रिजर्व पुलिस के जवानों को मिले शहीद का दर्जा
एसएफआई ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
2004 से पूर्व भर्ती सैनिकों को मिले पुरानी पेंशन योजना का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
आनी (कुल्लू)। एसएफआई आनी इकाई ने राष्ट्रपति से पुलवामा में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को शहीदों का दर्जा देने की मांग की है। इकाई ने एसडीएम आनी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेज कर 2004 के बाद भर्ती हुए सेना के जवानों को पुरानी पेंशन योजना के तहत लाने की मांग उठाई है।
एसएफआई आनी ने मंगलवार को राष्ट्रपति को उपमंडल अधिकारी आनी चेत सिंह के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा। इकाई के कार्यकर्ताओं ने कहा कि सैनिकों की शहादत के चलते आज भी उनके आश्रित कई दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। पुलवामा हमले में मारे गए सैनिकों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। सैनिकों के लिए न तो कोई भत्ता या पेंशन का प्रावधान किया जाता है और तो और उन्हें शहीद तक का दर्जा नहीं दिया जाता। हमले के बाद से ही जिस प्रकार देश में हमारा शासक वर्ग सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। जगह-जगह पर संघ के लोगों द्वारा कश्मीरी छात्रों पर हमले किए जा रहे हैं, उन्हें मकानों, हॉस्टलों और कॉलेजों से बाहर निकाला जा रहा है। शासक वर्ग की ये प्रतिक्रियाएं साफ तौर पर दूसरे धर्म के लोगों के प्रति उनकी मंशा को दर्शाता है। इस मौके पर भागेराम, ललित कुमार, योगेंद्र कुमार, हंसराज सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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एसएफआई ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
2004 से पूर्व भर्ती सैनिकों को मिले पुरानी पेंशन योजना का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
आनी (कुल्लू)। एसएफआई आनी इकाई ने राष्ट्रपति से पुलवामा में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को शहीदों का दर्जा देने की मांग की है। इकाई ने एसडीएम आनी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेज कर 2004 के बाद भर्ती हुए सेना के जवानों को पुरानी पेंशन योजना के तहत लाने की मांग उठाई है।
एसएफआई आनी ने मंगलवार को राष्ट्रपति को उपमंडल अधिकारी आनी चेत सिंह के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा। इकाई के कार्यकर्ताओं ने कहा कि सैनिकों की शहादत के चलते आज भी उनके आश्रित कई दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। पुलवामा हमले में मारे गए सैनिकों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। सैनिकों के लिए न तो कोई भत्ता या पेंशन का प्रावधान किया जाता है और तो और उन्हें शहीद तक का दर्जा नहीं दिया जाता। हमले के बाद से ही जिस प्रकार देश में हमारा शासक वर्ग सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। जगह-जगह पर संघ के लोगों द्वारा कश्मीरी छात्रों पर हमले किए जा रहे हैं, उन्हें मकानों, हॉस्टलों और कॉलेजों से बाहर निकाला जा रहा है। शासक वर्ग की ये प्रतिक्रियाएं साफ तौर पर दूसरे धर्म के लोगों के प्रति उनकी मंशा को दर्शाता है। इस मौके पर भागेराम, ललित कुमार, योगेंद्र कुमार, हंसराज सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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