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बिन बिजली, पानी कैसे विकसित होगा इको टूरिज्म

Sat, 16 Mar 2019 09:50 PM IST
Krishan Singh Krishan Singh
Updated Sat, 16 Mar 2019 09:50 PM IST
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बिन बिजली, पानी कैसे विकसित होगा ईको टूरिज्म
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प्रशिक्षित स्टाफ, मार्केटिंग और ऑनलाइन सुविधा भी नहीं
घाटे में चल रहा निगम का जलोड़ी जोत नेचर कैंप
सुभाष सेन
ब्रौ(रामपुर बुशहर)। सरकार भले ही प्रदेश में पर्यटन को विकसित करने के लाख दावे करे, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पर्यटन व्यवसाय का विकसित होना असंभव है। वन निगम के तहत चल रहे नेचर कैंपों में बिजली, पानी और प्रशिक्षित स्टाफ न होने के कारण निगम को हर वर्ष नुकसान झेलना पड़ रहा है।
सरकार ने पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए शिमला और कुल्लू जिले में नेचर कैंप स्थापित किए हैं। इन कैंपों में पर्यटकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण पर्यटक यहां आने में अधिक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इस कारण निगम को अच्छा खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है। यदि इन कैंपों में सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं, तो निगम को लाभ मिलने के साथ साथ प्रदेश सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
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ईको टूरिज्म के तहत बने जिला शिमला के नारकंडा और कुल्लू जिले के जलोड़ी जोत में नेचर कैंप का निर्माण किया गया है। नारकंडा में हर वर्ष बाहरी राज्यों से पर्यटक और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं। यहां पर्यटकों की सुविधाओं को देखते हुए बेहतर बंदोबस्त तो हैं, लेकिन पेशेवर स्टाफ न होने के कारण वन निगम नेचर कैंप को आउटसोर्स पर दिया जा रहा है।
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वहीं, कुल्लू जिले के एनएच 305 पर आउटर सिराज के जलोड़ी जोत में भी वन निगम ने नेचर कैंप स्थापित किया है। इस कैंप में वर्षों बाद भी बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। समुद्रतल से करीब 10 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित यह कैंप प्राकृतिक सौंदर्य से भरा हुआ है। यहां माता बूढ़ी नागिन का प्रसिद्ध मंदिर और सरेयोलसर झील भी यहां मनोरम का प्रमुख केंद्र है। यहां वन निगम ने करीब 10 हट्स बनाए हैं, जिसमें पर्यटकों के ठहरने की बेहतर व्यवस्था की गई है। यहां सोलर लाइट्स से रोशनी और दूर से पानी ढोकर पहुंचाया जा रहा है। इस कैंप की भी वन निगम निलामी करता आ रहा है। वहीं, वन निगम के पास ऑनलाइन बुकिंग, पोस्टल और गेटवे की सुविधा न होने के कारण भी पर्यटक नेचर कैंप आने से महरूम हैं। यदि प्रदेश सरकार और वन निगम इन नेचर कैंपों में सभी सुविधाएं मुहैया करवाते हैं तो इससे पर्यटकों को लुभाने के साथ साथ आमदन में भी इजाफा किया जा सकता है।

प्रदेश वन निगम उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने बताया कि नेचर कैंपों में व्यवस्था सुधारने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इको टूरिज्म को प्रदेश में बढ़ावा देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही कल्पा में भी नेचर कैंप शुरू किया जाएगा, जिसके लिए भूमि का चयन किया गया है। उन्होंने कहा कि निगम प्रशिक्षित स्टाफ, जलोड़ी में बिजली, पानी की व्यवस्था करने सहित इन नेचर कैंपों को अपने स्तर पर चलाने के दिशा में कार्य कर रहा है।
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