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मट्टी की जांच के बाद खादों का प्रयोग करे बागवान
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नमी आने के बाद ही डालें बगीचों में उर्वरक
बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को दी सलाह
कहा, फरवरी तक उर्वरकों का हो सकता है प्रयोग
रोहड़ू। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को मिट्टी की जांच के बाद ही खादों के आवश्यकता के अनुसार प्रयोग की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार खादों का अधिक और अनावश्यक प्रयोग खेतीबाड़ी और बागवानी के लिए नुकसानदायक है। जमीन में नमी आने के बाद बागवान भौगोलिक स्थिति के अनुसार फरवरी महीने तक उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी डॉ नरेंद्र कायथ ने बताया कि पौधों में उर्वरकों का प्रयोग करने से पहले मिट्टी की जांच करवाएं। मिट्टी की जांच के बाद जिस खाद की पौधे में कमी पाई जाती आवश्यकता के अनुसार उस ही खाद का प्रयोग करें। पौधों में उम्र के अनुसार गले सड़े गोबर की खाद, सुपर पास्फेट व पोटाश खाद का आजकल प्रयोग किया जाता है। पहले पौधे की प्रशिक्षित व्यक्ति से काटछांट करवाने के बाद टहनियों के कटे भाग पर पेस्ट लगाएं। पौधे के तने के आस पास काटछांट के दौरान गिरे टहनियों को एकत्र करने के बाद नष्ट करें। उसके बाद ही बगीचों में खादों का प्रयोग करे। फरवरी महीने के अंत तक खादों डालने का काम पूरा किया जाना जरूरी है। विभाग के विशेषज्ञों ने बागवानों को माइक्रो इरिगेशन, पुराने बगीचों को बदल कर नई वैरायटी लगाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने की भी सलाह दी है।
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बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को दी सलाह
कहा, फरवरी तक उर्वरकों का हो सकता है प्रयोग
रोहड़ू। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को मिट्टी की जांच के बाद ही खादों के आवश्यकता के अनुसार प्रयोग की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार खादों का अधिक और अनावश्यक प्रयोग खेतीबाड़ी और बागवानी के लिए नुकसानदायक है। जमीन में नमी आने के बाद बागवान भौगोलिक स्थिति के अनुसार फरवरी महीने तक उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी डॉ नरेंद्र कायथ ने बताया कि पौधों में उर्वरकों का प्रयोग करने से पहले मिट्टी की जांच करवाएं। मिट्टी की जांच के बाद जिस खाद की पौधे में कमी पाई जाती आवश्यकता के अनुसार उस ही खाद का प्रयोग करें। पौधों में उम्र के अनुसार गले सड़े गोबर की खाद, सुपर पास्फेट व पोटाश खाद का आजकल प्रयोग किया जाता है। पहले पौधे की प्रशिक्षित व्यक्ति से काटछांट करवाने के बाद टहनियों के कटे भाग पर पेस्ट लगाएं। पौधे के तने के आस पास काटछांट के दौरान गिरे टहनियों को एकत्र करने के बाद नष्ट करें। उसके बाद ही बगीचों में खादों का प्रयोग करे। फरवरी महीने के अंत तक खादों डालने का काम पूरा किया जाना जरूरी है। विभाग के विशेषज्ञों ने बागवानों को माइक्रो इरिगेशन, पुराने बगीचों को बदल कर नई वैरायटी लगाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने की भी सलाह दी है।
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