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नंदपुर पंचायत में बताए सेब की कटी टहनियों से खाद बनाने के तरीके
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सेब की टहनियों से पत्तों से बनाए खाद
नंदपुर पंचायत में लगा शिविर, बागवानों को किया गया जागरूक
टहनियों के जलाने से हो रहे पर्यावरण प्रदूषण की दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। ग्राम पंचायत नंदपुर में सोमवार को सेब की टहनियों से बायोफर्टिलाईजर बनाने के तरीके समझाए गए। इस दौरान बागवानों को सेब की टहनियों को इस्तेमाल करने के लिए डी-कंपोजर भी उपलब्ध करवाया गया। वहीं उन्हें बगीचों में सेब की टहनियों के जलाने से हो रहे पर्यावरण को नुकसान के प्रति जागरूक भी किया गया।
सोमवार को नंदपुर पंचायत घर परिसर में आयोजित शिविर के दौरान बगीचा प्रबंधन के दौरान जमा टहनियों और पत्तों से खाद बनाने की तरीके बताए गए। शिविर की अध्यक्षता पंचायत की प्रधान शकुंतला डोड ने की। इस दौरान लोगों को समझाया गया कि काट-छांट से बगीचे में जमा सेब की टहनियों को जलाने से लगातार पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इसलिए बागवान अपने बगीचे में निकले कचरे को एक स्थान पर जमा करें। उसके बाद बायो डी कंपोजर की सहायता से उसको वहां पर ही गला सड़ा सकते हैं। टहनियों के गलने से बहुत उमदा खाद तैयार की जा सकती है।
गौरतलब है कि पूरे क्षेत्र में सबसे पहले बगीचों में जलाए जा रही सेब की टहनियों को जलाने पर नंदपुर पंचायत में प्रतिबंध लगाया गया। पंचायत में कई बार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा चुके हैं। इससे पहले खाद बनाने के लिए टहनियों को क्रश करने की मशीन का डेमोस्ट्रेशन भी यहां पर दिया जा चुका है। अब इन टहनियों को गलाने सड़ाने के तरीके बताए जा रहे हैं। शिविर में उप प्रधान नरवीर ठाकुर, विरेंद्र सोपटा, मोहन ठाकुर, वीरवान सिंह रावत, पंकेश्वर, बिमला राणा, रमा ठाकुर, कमाल चंद और कर्म चंद आदि उपस्थित थे।
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नंदपुर पंचायत में लगा शिविर, बागवानों को किया गया जागरूक
टहनियों के जलाने से हो रहे पर्यावरण प्रदूषण की दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। ग्राम पंचायत नंदपुर में सोमवार को सेब की टहनियों से बायोफर्टिलाईजर बनाने के तरीके समझाए गए। इस दौरान बागवानों को सेब की टहनियों को इस्तेमाल करने के लिए डी-कंपोजर भी उपलब्ध करवाया गया। वहीं उन्हें बगीचों में सेब की टहनियों के जलाने से हो रहे पर्यावरण को नुकसान के प्रति जागरूक भी किया गया।
सोमवार को नंदपुर पंचायत घर परिसर में आयोजित शिविर के दौरान बगीचा प्रबंधन के दौरान जमा टहनियों और पत्तों से खाद बनाने की तरीके बताए गए। शिविर की अध्यक्षता पंचायत की प्रधान शकुंतला डोड ने की। इस दौरान लोगों को समझाया गया कि काट-छांट से बगीचे में जमा सेब की टहनियों को जलाने से लगातार पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इसलिए बागवान अपने बगीचे में निकले कचरे को एक स्थान पर जमा करें। उसके बाद बायो डी कंपोजर की सहायता से उसको वहां पर ही गला सड़ा सकते हैं। टहनियों के गलने से बहुत उमदा खाद तैयार की जा सकती है।
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गौरतलब है कि पूरे क्षेत्र में सबसे पहले बगीचों में जलाए जा रही सेब की टहनियों को जलाने पर नंदपुर पंचायत में प्रतिबंध लगाया गया। पंचायत में कई बार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा चुके हैं। इससे पहले खाद बनाने के लिए टहनियों को क्रश करने की मशीन का डेमोस्ट्रेशन भी यहां पर दिया जा चुका है। अब इन टहनियों को गलाने सड़ाने के तरीके बताए जा रहे हैं। शिविर में उप प्रधान नरवीर ठाकुर, विरेंद्र सोपटा, मोहन ठाकुर, वीरवान सिंह रावत, पंकेश्वर, बिमला राणा, रमा ठाकुर, कमाल चंद और कर्म चंद आदि उपस्थित थे।
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