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किन्नौर में बागवानी और कृषि जरूरत अनुसार नहीं हुई बर्फबारी
Updated Fri, 19 Jan 2018 07:44 PM IST
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बर्फबारी न होने से बागवान मायूस
फरवरी, मार्च की बर्फबारी नकदी फसलों के लिए नुकसानदायक
अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)।
किन्नौर में बागवानी और कृषि के लिहाज से अभी तक आवश्यकता अनुसार बर्फबारी नहीं हो पाई है, जबकि दिसंबर-जनवरी में बर्फ की दरकार रहती है। यदि मौसम ने लंबे समय तक साथ न दिया तो सेब की फसल पर इसका विपरीत असर पड़ेगा।
जिले में इस वर्ष अब तक किन्नौर में बर्फ बारी ने दस्तक नहीं दी है, जिससे बागवान मायूस हैं। दिसंबर और जनवरी माह की बर्फबारी सेब, काला जीरा, मटर, राजमाह, आलू, ओगला, फाफरा सहित कई अन्य नकदी फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। फरवरी और मार्च माह की बर्फबारी बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर सकती है। लंबे अरसे से जिले में जमकर बर्फबारी न होने से क्षेत्र के लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। फरवरी और मार्च माह की बर्फबारी नकदी फसलों के लिए हानिकारक मानी जाती है। उद्यान विभाग किन्नौर के उप निदेशक हेमचंद शर्मा ने भी माना कि सर्दियों के आरंभिक दिनों में बर्फबारी होना नकदी फसलों के लिए बेहद लाभप्रद है। इससे भूमि में नमी बने रहने के साथ-साथ सेब के पौधों में लगने वाली कई तरह की बीमारियों पर भी अंकुश लगता है। सेब के पेड़ों को पर्याप्त ठंड मिलती है। जिले में तापमान में बढ़ोतरी हो रही है तो बागवान और किसान फसलों में हल्की-हल्की सिंचाई कर सकते हैं।
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फरवरी, मार्च की बर्फबारी नकदी फसलों के लिए नुकसानदायक
अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)।
किन्नौर में बागवानी और कृषि के लिहाज से अभी तक आवश्यकता अनुसार बर्फबारी नहीं हो पाई है, जबकि दिसंबर-जनवरी में बर्फ की दरकार रहती है। यदि मौसम ने लंबे समय तक साथ न दिया तो सेब की फसल पर इसका विपरीत असर पड़ेगा।
जिले में इस वर्ष अब तक किन्नौर में बर्फ बारी ने दस्तक नहीं दी है, जिससे बागवान मायूस हैं। दिसंबर और जनवरी माह की बर्फबारी सेब, काला जीरा, मटर, राजमाह, आलू, ओगला, फाफरा सहित कई अन्य नकदी फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। फरवरी और मार्च माह की बर्फबारी बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर सकती है। लंबे अरसे से जिले में जमकर बर्फबारी न होने से क्षेत्र के लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। फरवरी और मार्च माह की बर्फबारी नकदी फसलों के लिए हानिकारक मानी जाती है। उद्यान विभाग किन्नौर के उप निदेशक हेमचंद शर्मा ने भी माना कि सर्दियों के आरंभिक दिनों में बर्फबारी होना नकदी फसलों के लिए बेहद लाभप्रद है। इससे भूमि में नमी बने रहने के साथ-साथ सेब के पौधों में लगने वाली कई तरह की बीमारियों पर भी अंकुश लगता है। सेब के पेड़ों को पर्याप्त ठंड मिलती है। जिले में तापमान में बढ़ोतरी हो रही है तो बागवान और किसान फसलों में हल्की-हल्की सिंचाई कर सकते हैं।
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