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सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ 200 साल बाद नित्थर पहुंचे शमशरी महादेव
Updated Sun, 29 Apr 2018 06:56 PM IST
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दो सौ साल बाद नित्थर पहुंचे शमशरी महादेव
कई स्थानों पर लोगों ने किया भव्य स्वागत
दलाश (कुल्लू)। क्षेत्र के नित्थर बूढ़ा महादेव मंदिर में 20 अप्रैल से चल रहे शिवमहापुराण में आउटर सिराज के तीनों गढ़ों के देवता शमशरी महादेव रविवार को अपने सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ नित्थर पहुंचे। दो सौ वर्ष बाद देव संस्कृति और देवी-देवताओं के मिलन का ऐसा अनूठा नजारा देखने को मिला। इस अवसर पर जहां क्षेत्रवासी खुशी जाहिर करते दिखे, वहीं वर्षों बाद इस नजारे को देखकर कई आंखें नम भी दिखीं। रविवार सुबह 8 बजे बखनाओ से नित्थर के लिए मीलों पैदल रवाना हुए शमशरी महादेव के जुलूस ने नित्थर तक एक बड़ा रूप धारण कर लिया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर महादेव का भव्य स्वागत किया गया। क्षेत्र के अमरबाग, कंडागई, कटाहर, तांदी समेत कई अन्य स्थानों पर लोगों ने शमशरी महादेव के सम्मुख अपना शीश नवाया और फूलमालाओं के साथ महादेव के स्वागत कार्यक्रम में शरीक हुए। नित्थर पहुंचने से पहले क्षेत्र के आराध्य देव ने परंपरा का निर्वहन करते हुए बूढ़ा महादेव के पुराने मंदिर कुपरदड़ पहुंचकर प्राचीन रीति रिवाजों का भी निर्वहन किया। नित्थर पहुंचते ही महादेव का भव्य स्वागत हुआ। हजारों श्रद्धालुओं समेत भुवनेश्वरी, चेवड़ी, दुराह के देवी-देवता इस अविस्मरणीय पल के साक्षी बने। दर्जनों ढोल-नगाड़ों, करनालों और प्राचीन वाद्ययंत्रों की थाप पर हर कोई झूमने पर विवश हो गया। क्षेत्रवासियों ने क्षेत्र की खुशहाली और सुख समृद्धि के लिए कामना की और देवशक्ति के आगे नतमस्तक हुए। हजारों की तादाद में उमड़ी भीड़ के नियंत्रण के लिए पुलिस के जवानों को भी तैनात किया गया था। 30 अप्रैल को देव विदाई के साथ शिवपुराण का विधिवत समापन होगा। समापन अवसर पर दोपहर बाद भंडारे और देव विदाई के साथ इस पुण्य आयोजन का विधिवत समापन होगा।
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कई स्थानों पर लोगों ने किया भव्य स्वागत
दलाश (कुल्लू)। क्षेत्र के नित्थर बूढ़ा महादेव मंदिर में 20 अप्रैल से चल रहे शिवमहापुराण में आउटर सिराज के तीनों गढ़ों के देवता शमशरी महादेव रविवार को अपने सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ नित्थर पहुंचे। दो सौ वर्ष बाद देव संस्कृति और देवी-देवताओं के मिलन का ऐसा अनूठा नजारा देखने को मिला। इस अवसर पर जहां क्षेत्रवासी खुशी जाहिर करते दिखे, वहीं वर्षों बाद इस नजारे को देखकर कई आंखें नम भी दिखीं। रविवार सुबह 8 बजे बखनाओ से नित्थर के लिए मीलों पैदल रवाना हुए शमशरी महादेव के जुलूस ने नित्थर तक एक बड़ा रूप धारण कर लिया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर महादेव का भव्य स्वागत किया गया। क्षेत्र के अमरबाग, कंडागई, कटाहर, तांदी समेत कई अन्य स्थानों पर लोगों ने शमशरी महादेव के सम्मुख अपना शीश नवाया और फूलमालाओं के साथ महादेव के स्वागत कार्यक्रम में शरीक हुए। नित्थर पहुंचने से पहले क्षेत्र के आराध्य देव ने परंपरा का निर्वहन करते हुए बूढ़ा महादेव के पुराने मंदिर कुपरदड़ पहुंचकर प्राचीन रीति रिवाजों का भी निर्वहन किया। नित्थर पहुंचते ही महादेव का भव्य स्वागत हुआ। हजारों श्रद्धालुओं समेत भुवनेश्वरी, चेवड़ी, दुराह के देवी-देवता इस अविस्मरणीय पल के साक्षी बने। दर्जनों ढोल-नगाड़ों, करनालों और प्राचीन वाद्ययंत्रों की थाप पर हर कोई झूमने पर विवश हो गया। क्षेत्रवासियों ने क्षेत्र की खुशहाली और सुख समृद्धि के लिए कामना की और देवशक्ति के आगे नतमस्तक हुए। हजारों की तादाद में उमड़ी भीड़ के नियंत्रण के लिए पुलिस के जवानों को भी तैनात किया गया था। 30 अप्रैल को देव विदाई के साथ शिवपुराण का विधिवत समापन होगा। समापन अवसर पर दोपहर बाद भंडारे और देव विदाई के साथ इस पुण्य आयोजन का विधिवत समापन होगा।