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Rampur Bushahar News: रोहड़ू में अनुसूचित जनजाति अत्याचार के दो साल में 12 मामले हुए दर्ज
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अनुसूचित जाति - अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, के तहत सतर्कता एवं समिति की बैठक में
पंजीकृत मामलों में पीड़ितों को राहत राशि वितरित की गई
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। रोहड़ू उपमंडल में अनुसूचित जनजाति अत्याचार के दो साल में 12 मामले दर्ज हुए हैं। मंगलवार को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के तहत सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक हुई। अध्यक्षता एसडीएम धर्मेश रमोत्रा ने की। बैठक में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, तहसील कल्याण अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और गैर सरकारी सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में बताया गया कि अगस्त 2023 से अक्तूबर 2025 तक अधिनियम के तहत उपमंडल के रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल क्षेत्रों में कुल 12 मामले पंजीकृत हुए। इन मामलों में हिंसा, धमकी, यौन उत्पीड़न और अन्य अत्याचार शामिल हैं। तहसील कल्याण अधिकारी रोहड़ू ने बताया कि पंजीकृत मामलों में पीड़ितों को राहत राशि वितरित की गई है। इस वितरण की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को संतोषजनक पाया। बैठक में उपमंडल स्तर पर बढ़ते मामलों को देखते हुए रोहड़ू और चिड़गांव उपमंडल में पंचायत स्तर पर एक सप्ताह के भीतर जागरूकता शिविर लगाने का निर्णय लिया। इन शिविरों में पंचायत प्रतिनिधि, समिति सदस्य और स्थानीय अधिकारियों की भागीदारी अनिवार्य होगी। शिविरों में लोगों को अधिनियम के बारे में जानकारी दी जाएगी। समिति की बैठकों की सूचना समय पर न मिलने के कारण कई सरकारी और गैर सरकारी सदस्य बैठक में उपस्थित नहीं हो पाते हैं, इसलिए सोशल मीडिया ग्रुप बनाने का निर्णय लिया गया। इसके माध्यम से बैठक की सूचना समय पर सभी सदस्यों तक पहुंचाई जाएगी और सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान पुलिस विभाग को पंजीकृत मामलों की जांच समय पर पूरी करने और मासिक रिपोर्ट तहसील कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत अधिकारी आगामी बैठकों में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने को सुनिश्चित करेंगे। एसडीएम ने कहा कि समिति का यह प्रयास अत्यंत संवेदनशील मामलों में न्याय सुनिश्चित करने, पीड़ितों की सुरक्षा और समाज में समानता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। रोहड़ू उपमंडल में अनुसूचित जनजाति अत्याचार के दो साल में 12 मामले दर्ज हुए हैं। मंगलवार को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के तहत सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक हुई। अध्यक्षता एसडीएम धर्मेश रमोत्रा ने की। बैठक में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, तहसील कल्याण अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और गैर सरकारी सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में बताया गया कि अगस्त 2023 से अक्तूबर 2025 तक अधिनियम के तहत उपमंडल के रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल क्षेत्रों में कुल 12 मामले पंजीकृत हुए। इन मामलों में हिंसा, धमकी, यौन उत्पीड़न और अन्य अत्याचार शामिल हैं। तहसील कल्याण अधिकारी रोहड़ू ने बताया कि पंजीकृत मामलों में पीड़ितों को राहत राशि वितरित की गई है। इस वितरण की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को संतोषजनक पाया। बैठक में उपमंडल स्तर पर बढ़ते मामलों को देखते हुए रोहड़ू और चिड़गांव उपमंडल में पंचायत स्तर पर एक सप्ताह के भीतर जागरूकता शिविर लगाने का निर्णय लिया। इन शिविरों में पंचायत प्रतिनिधि, समिति सदस्य और स्थानीय अधिकारियों की भागीदारी अनिवार्य होगी। शिविरों में लोगों को अधिनियम के बारे में जानकारी दी जाएगी। समिति की बैठकों की सूचना समय पर न मिलने के कारण कई सरकारी और गैर सरकारी सदस्य बैठक में उपस्थित नहीं हो पाते हैं, इसलिए सोशल मीडिया ग्रुप बनाने का निर्णय लिया गया। इसके माध्यम से बैठक की सूचना समय पर सभी सदस्यों तक पहुंचाई जाएगी और सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान पुलिस विभाग को पंजीकृत मामलों की जांच समय पर पूरी करने और मासिक रिपोर्ट तहसील कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत अधिकारी आगामी बैठकों में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने को सुनिश्चित करेंगे। एसडीएम ने कहा कि समिति का यह प्रयास अत्यंत संवेदनशील मामलों में न्याय सुनिश्चित करने, पीड़ितों की सुरक्षा और समाज में समानता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।