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शिमला जिले से मंत्री पर बढ़ा असमंजस
Updated Sun, 24 Dec 2017 10:03 PM IST
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रामपुर बुशहर। हिमाचल विधानसभा चुनाव में भाजपा के पूर्ण बहुमत से जीतने के बाद मुख्यमंत्री पद पर जयराम ठाकुर के नाम पर मुहर लग गई। इसके बाद अब भाजपा के जीते विधायकों में मंत्री पद पाने की होड़ लगी है। धूमल की हार के बाद उनके समर्थकों की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में शिमला जिले से मंत्री पद पर असमंजस बढ़ गया है। जिला शिमला से कांग्रेस मुख्यमंत्री और एक कैबिनेट मंत्री पद देती रही है और ऐसी स्थिति में भाजपा के लिए यह तय करना कठिन होगा कि इस बार किसे मंत्री बनाया जाए। शिमला जिला से मंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदारों में शिमला शहरी सीट से तीसरी बार जीते सुरेश भारद्वाज और पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा का नाम माना जा रह है।
मंडी जिले से इस बार भाजपा हाईकमान ने जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाने का एलान कर दिया है। जयराम मंत्रिमंडल में धूमल के समर्थक विधायकों को कितनी तरजीह दी जाती है, यह बाद में पता चलेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर सीट से पहले ही चुनाव हार चुके है, जबकि उनके नेतृत्व में चुनाव भी लड़ा गया था। मुख्यमंत्री पद को लेकर भले ही धूमल साफ कर चुके हैं कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं रहे। धूमल समर्थक अंतिम क्षणों तक दबाव बनाए थे कि जब धूमल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया तो फिर उनको मुख्यमंत्री बनाया जाए। समर्थकों की इस मांग को दरकिनार करते हुए रविवार को जयराम को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति जताई गई है। धूमल के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा इस बार जुब्बल-कोटखाई से चुनाव जीते हैं। पहले धूमल के सत्ता में आने पर बरागटा मंत्री पद झटकने में कामयाब रहे थे। आज राजनीतिक समीकरण बदले हैं। मंडी जिले से ताल्लुक रखने वाले जयराम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में जीत गए हैं, जबकि उनका रास्ता रोकने के लिए विरोधियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।
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मंडी जिले से इस बार भाजपा हाईकमान ने जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाने का एलान कर दिया है। जयराम मंत्रिमंडल में धूमल के समर्थक विधायकों को कितनी तरजीह दी जाती है, यह बाद में पता चलेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर सीट से पहले ही चुनाव हार चुके है, जबकि उनके नेतृत्व में चुनाव भी लड़ा गया था। मुख्यमंत्री पद को लेकर भले ही धूमल साफ कर चुके हैं कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं रहे। धूमल समर्थक अंतिम क्षणों तक दबाव बनाए थे कि जब धूमल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया तो फिर उनको मुख्यमंत्री बनाया जाए। समर्थकों की इस मांग को दरकिनार करते हुए रविवार को जयराम को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति जताई गई है। धूमल के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा इस बार जुब्बल-कोटखाई से चुनाव जीते हैं। पहले धूमल के सत्ता में आने पर बरागटा मंत्री पद झटकने में कामयाब रहे थे। आज राजनीतिक समीकरण बदले हैं। मंडी जिले से ताल्लुक रखने वाले जयराम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में जीत गए हैं, जबकि उनका रास्ता रोकने के लिए विरोधियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।
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