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पोस्टमार्टम में खुलासा: शव मिलने के पांच से छह दिन पहले हो गई थी विमल नेगी की मौत, कई सवाल बरकरार; जानें

Sun, 23 Mar 2025 11:01 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 23 Mar 2025 11:01 AM IST
सार

Vimal Negi Death Case: मुख्य अभियंता विमल नेगी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में सामने आया है कि उनकी मौत शव मिलने के करीब पांच दिन पहले हुई थी। यानी उनकी मौत 12 या 13 मार्च को हुई थी। जबकि विमल नेगी अंतिम बार 10 मार्च को घुमारवीं में दिखे थे। 

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Postmortem revealed Vimal Negi had died five to six days before the body was found
किन्नौर के कटगांव में विमल के घर पहुंचे जयराम व अन्य परिजनों से मिलते हुए। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मुख्य अभियंता विमल नेगी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उनकी मौत शव मिलने के करीब पांच दिन पहले हुई थी। विमल नेगी का शव 18 मार्च को बिलासपुर की गोबिंद सागर झील में मिला था। यानी उनकी मौत 12 या 13 मार्च को हुई थी। जबकि विमल नेगी अंतिम बार 10 मार्च को घुमारवीं में दिखे थे। अब नया सवाल यह उठा है कि मौत से पहले दो दिन तक वह कहां रहे। एम्स बिलासपुर ने रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी है।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शरीर के अंदर और बाहर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं हैं। हालांकि अभी बिसरा सहित अन्य कुछ रिपोर्ट बाकी हैं। मौत के असली कारण का पता इन रिपोर्टों के आने के बाद ही चलेगा। बता दें कि विमल नेगी 10 मार्च को विमल नेगी शिमला से बिलासपुर पहुंचे थे। डीएसपी मुख्यालय मदन धीमान ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार विमल की मौत शव मिलने से करीब पांच दिन पहले हुई थी। रिपोर्ट में मौत के कारण को नहीं दर्शाया गया है।

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निलंबित देशराज को नहीं मिली अग्रिम जमानत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत मामले में निलंबित निदेशक देशराज को अंतरिम जमानत नहीं दी गई है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने पुलिस को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को कहा है। अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी। देशराज ने गुहार लगाई है कि जो एफआईआर दर्ज की गई है, वह गलत है। पुलिस उन्हें गिरफ्तार न करे। इसके लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी।

परिवार ने फिर दोहराई सीबीआई जांच की मांग
चीफ इंजीनियर दिवंगत विमल नेगी की मौत को लेकर उनके परिजन लगातार सीबीआई की जांच की मांग कर रहे हैं। शनिवार को नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नेगी के पैतृक गांव कटगांव पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। इस दौरान परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग उठाई। आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग भी दोहराई। जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डाॅ. राजीव बिंदल सहित अन्य भाजपा नेता शनिवार को कटगांव पहुंचे और उन्होंने परिजनों से मिलकर संवेदना जताई।

जयराम ने कहा कि विमल नेगी की माता जी के आंसू, उनकी पत्नी, भाई और परिजनों का दर्द देखकर बहुत भावुक हूं। विमल ईमानदार अधिकारी के साथ सरल और मिलनसार स्वभाव के थे। परिवार ने सीबीआई जांच करने की मांग की है। बिंदल ने कहा कि नेगी की मौत कई सवाल खड़े कर गई है। यदि नेगी ईमानदार अधिकारी न होते तो पूरा विभाग उनके साथ खडा नहीं होता। उनके परिवार पर जो बीत रही है, उस पर चिंता करने की जरूरत है। भारतीय जनता पार्टी की स्पष्ट मांग है कि मामले की सीबीआई से जांच हो। स मौके पर प्रदेश वन विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष सूरत नेगी, चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा, पूर्व भाजपा प्रत्याशी कोटखाई चेतन बरागटा, अजय श्याम सहित अन्य भाजपा नेता मौजूद रहे।
 
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एसआईटी ने एफएसएल को भेजे मोबाइल-सीसीटीवी फुटेज, सचिव पावर से भी मांगा रिकॉर्ड
विमल नेगी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है। एसपी शिमला की देखरेख में पुलिस की टीम मामले की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस ने कई डिजिटल एविडेंस को जांच के लिए एफएसएल जुन्गा भेजा है। इसमें मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क शामिल है। पुलिस ने कॉरपोरेशन के साथ ही सचिव पावर से भी मामले से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। तीसरे दिन भी पावर कॉरपोरेशन के कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ जारी रखी।

पुलिस साइबर विशेषज्ञों की मदद भी ले रही है, जिससे तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करके मामले को सुलझाने में मदद मिल सके। इसके अलावा एएसपी नवदीप सिंह और डीएसपी शक्ति सिंह को भी जांच टीमें शामिल किया है।

एफआईआर में वरिष्ठ अफसर का नाम शामिल न करने का सदन ने लिया संज्ञान
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने शनिवार को प्रश्नकाल के बाद सदन में व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि विमल नेगी की मृत्यु के मामले में संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी का नाम इसमें अंकित नहीं किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि सदन ने इस मामले का संज्ञान लिया है। राज्य सरकार व एजेंसियों को इस बारे में सूचित कर दिया जाएगा।

वहीं, रणधीर शर्मा ने यह भी पूछा कि इस संबंध में परिजनों की मांग थी कि सीबीआई से जांच करवाई जाए। इसका क्या हुआ, यह भी बताया जाए। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस संबंध में एफआईआर हुई है। जांच के दौरान जो भी सामने आएगा, उसे शामिल किया जाएगा। जिनके भी नाम आएंगे, वे नामजद होते रहेंगे। इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी। जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि जो व्यक्ति सूचना देता है, उसे ही एफआईआर में लिखा जाता है। यह प्राथमिकी होती है। प्राथमिकी के लिए जिस तरह से सूचना दी गई है, वैसे ही लिखा गया है। अगर किसी का नाम ऐड करना हो तो धारा- 161 में कार्रवाई होती है। 
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