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हिमाचल में 23 नए विधायकों के साथ लौटी ताजगी
तपोवन (धर्मशाला)/राजेश मंढोत्रा
Updated Tue, 08 Jan 2013 06:54 PM IST
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12वीं विधानसभा में पहली बार एमएलए बनकर आए युवा नेताओं की आंखों में कई सपने हैं। हर नए विधायक की अपनी अलग कहानी है। कुछ वादे कर भूलने की राजनीतिक प्रथा को तोड़ना चाहते हैं तो कुछ इसलिए उतावले हैं कि कुछ करके दिखाना है। 12वीं विधानसभा में जीतकर आए 23 नए चेहरों में से चौधरी राम कुमार को छोड़ शेष 22 युवा विधायकों ने शपथ ली। कसुम्पटी से अनिरुद्ध सिंह, अजय महाजन और रवि ठाकुर ने अंग्रेजी में शपथ ली तो बाकियों ने हिंदी में।
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संघर्ष भरी है यह राह: हंसराज
चंबा के बार्डर से सटी चुराह सीट से जीतकर हंसराज 29 साल की उम्र में विधानसभा आए। कहते हैं पहले सरकारी टीचर था, लेकिन जिला परिषद का चुनाव जीतने के बाद लोगों ने राजनीति के लायक समझा और पार्टी ने भरोसा जताते हुए विधानसभा पहुंचा दिया। हमारी सरकार नहीं है, इसलिए यह संघर्ष का वक्त है। मेरे लिए अच्छा भी है। इससे मेहनत करने की आदत बन जाएगी।
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लोगों का भरोसा बचाना है: विनोद
नाचन सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी टेकचंद डोगरा आमतौर पर भाजपा पर भारी पड़ते थे, लेकिन इस बार विनोद कुमार ने उनकी पीठ लगाते हुए विधानसभा की एंट्री पाई। 31 साल के विनोद कहते हैं कि लोगों ने उन पर भरोसा जताया है। यह भरोसा अब मेरे जीवन की पूंजी है। इसे बचाकर रखना है। इन पांच वर्षों में जीतना हो सकेगा, लोगों के बीच रहूंगा।
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छोटी उम्र में बड़ी जिम्मेदारी: गोमा
जयसिंहपुर सीट से 12वीं विधानसभा को सबसे कम 27 साल की उम्र वाला एक युवा विधायक यादविंद्र गोमा के रूप में मिला है। बीटेक करने के बाद राजनीति में कूदे यादविंद्र पूर्व विधायक मिल्खी राम गोमा के पुत्र जरूर हैं, लेकिन वह जानते हैं कि यह विरासत संभाले रखना आसान नहीं है। कहते हैं, छोटी उम्र में बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। इसे ईमानदारी से पूरा करूंगा।
पिता का सपना पूरा: संजय रतन
ज्वालामुखी से संजय रत्न रमेश धवाला के सादगी भरे तिलिस्म को तोड़ने में सफल रहे। उनके पिता सुशील रत्न इस सीट को नहीं जीत पाए थे लेकिन अपने तीसरे प्रयास में संजय रत्न ने यह कर दिया। अब वह कहते हैं कि यह पिता के सपने को पूरा करने जैसा था। ज्वालामुखी के लोगों का साथ उन्हें हमेशा मिलता था, लेकिन इस बार पार्टी का टिकट मिलने के कारण लड़ाई आसान हो गई।
मेरा सुजानपुर, मेरा आदर्श: राणा
भाजपा के गढ़ सुजानपुर में भाजपा और कांग्रेस दोनों को पछाड़ने वाले राजेंद्र राणा हिमाचल में सबसे ज्यादा वोट के अंतर से जीतने वाले निर्दलीय हैं। शपथ लेने के बाद उनके चेहरे की चमक बता रही थी कि उनके लिए यह अपना चरित्र प्रमाणित करने का माध्यम भी था। पूछने पर बोले- मेरा सुजानपुर, मेरा आदर्श बनेगा। इसी मकसद से काम करूंगा और यह एक बदलाव की शुरुआत होगी।