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Minjar Mela 2025: खास और आम लोग एक साथ में बैठ देखते हैं मिंजर मेला, खास रिवायत करती है इसे दूसरों से अलग

Mon, 28 Jul 2025 07:13 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा।
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा। Published by: अंकेश डोगरा Updated Mon, 28 Jul 2025 07:13 PM IST
सार

Minjar Mela 2025 : अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में आम से लेकर खास तक जमीन पर बैठ कर ही सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रमों का लुत्फ उठाते हैं। 

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Minjar Mela 2025 Special and common people sit together and watch Minjar Mela special tradition
चंबा मिंजर मेले में जमीन पर बैठ सांस्कृति संध्या का आनंद लेते राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और अन्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मनाए जाने वाले मेलों और त्योहारों में अलग-अलग परंपराएं हैं। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की अनूठी परंपरा इसे प्रदेश के मेलों और त्योहारों से अलग करती है। यहां पर आम से लेकर खास तक जमीन पर बैठ कर ही सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रमों का लुत्फ उठाते हैं। जबकि, कुल्लू दशहरा, रामपुर का लवी मेला समेत अन्य बड़े मेलों के दौरान आयोजित होने वाली सांस्कृतिक संध्याओं में मुख्यातिथि से लेकर अन्य वशिष्ठ अतिथि सोफे और कुर्सियों पर बैठकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक रस्मों को देखते हैं।

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प्रदेशभर में बहुत से मेले और उत्सव मनाए जाते हैं लेकिन, शिवभूमि चंबा का अंतररष्ट्रीय मिंजर मेला देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। चंबा शहर राजा साहिल वर्मन की ओर से उनकी बेटी राजकुमारी चंपावती के कहने पर रावी नदी के किनारे बसाया गया था। इसलिए इस शहर का नाम चंबा रखा गया था। मिंजर मेले को अंतरराष्ट्रीय मेले का दर्जा दिया गया है। यह मेला श्रावण मास के दूसरे रविवार को शुरू होकर सप्ताह भर चलता है। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का शुभारंभ राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया और समापन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शिरकत करेंगे। मेले की अलग रिवायत प्रदेश के अन्य जिलों के मेलों से इसे अलग करती है। यहां पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत अन्य मुख्यातिथि भी दर्शक दीर्घा में जमीन पर बैठ कर ही सांस्कृतिक संध्याओं का लुत्फ उठाते हैं।

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पद्मश्री विजय शर्मा ने बताया कि मिंजर मेला देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यहां पर दर्शक दीर्घा में मुख्यातिथि भी आमजन के साथ जमीन पर बैठ कर ही सांस्कृतिक कार्यक्रम देखते हैं। जबकि, प्रदेश के अन्य जिलों के मेलों, त्योहारों के दौरान मुख्यातिथि समेत दर्शक सोफे और बेंच पर बैठकर कार्यक्रम का आनंद लेते हैं।

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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि मिंजर मेले की सांस्कृतिक संध्या में जमीन पर बैठकर कार्यक्रम देखने की परंपरा अनूठी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर जिले में अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं।

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