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Mandi News: वेद मंत्रों से श्रीरामार्चा महायज्ञ का पूजन आरंभ
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मंडी। छोटी काशी मंडी में नौ दिवसीय श्रीरामार्चा महायज्ञ एवं श्रीराम कथा में वीरवार को वेद मंत्रों की ध्वनि के बीच श्रीरामार्चा महायज्ञ का भव्य पूजन आरंभ हुआ। इस दौरान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमानजी का पंचोपचार विधि से पूजन आदि कर दर्जनों दीपकों से महाआरती की गई। इसके बाद प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान देश के अन्य प्रांतों से भी साधु-संतों का आगमन हुआ।
काशी से आए बटुकों ने श्रीराम नाम का अखंड संकीर्तन आरंभ कर माहौल को भक्तिमय कर दिया। वीरवार दोपहर एक बजे से श्री मानस पीठ खजुरीताल जिला मैहर, मध्यप्रदेश से आए कथा व्यास श्रीमानस पीठाधीश्वर जगतगुरु श्री रामानंदाचार्य, स्वामी श्री रामललाचार्य महाराज ने श्रीराम कथा का आरंभ श्रीराम नाम के संकीर्तन से किया। इससे पूर्व महंत राजेश्वरानंद सरस्वती ने व्यास पीठ और कथा व्यास का पूजन कर दंडी महात्माओं की विधिवत पूजा की। क्षेत्रवासियों ने श्रीराम कथा का श्रवण किया। सायं चार बजे बाद गोमाता और क्षेत्र के सभी देवी-देवताओं को भोग अर्पण कर सभी श्रद्धालुओं को भंडारे का प्रसाद वितरित किया।
महंत राजेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जब किसी क्षेत्र विशेष पर भगवान शिव और श्रीराम की कृपा होती है तो उस क्षेत्र को श्रीरार्चा महायज्ञ का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस महायज्ञ को देखने, करने और इसके एकमात्र कण के प्रसाद को ग्रहण करने से फल की प्राप्ति होती है।
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काशी से आए बटुकों ने श्रीराम नाम का अखंड संकीर्तन आरंभ कर माहौल को भक्तिमय कर दिया। वीरवार दोपहर एक बजे से श्री मानस पीठ खजुरीताल जिला मैहर, मध्यप्रदेश से आए कथा व्यास श्रीमानस पीठाधीश्वर जगतगुरु श्री रामानंदाचार्य, स्वामी श्री रामललाचार्य महाराज ने श्रीराम कथा का आरंभ श्रीराम नाम के संकीर्तन से किया। इससे पूर्व महंत राजेश्वरानंद सरस्वती ने व्यास पीठ और कथा व्यास का पूजन कर दंडी महात्माओं की विधिवत पूजा की। क्षेत्रवासियों ने श्रीराम कथा का श्रवण किया। सायं चार बजे बाद गोमाता और क्षेत्र के सभी देवी-देवताओं को भोग अर्पण कर सभी श्रद्धालुओं को भंडारे का प्रसाद वितरित किया।
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महंत राजेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जब किसी क्षेत्र विशेष पर भगवान शिव और श्रीराम की कृपा होती है तो उस क्षेत्र को श्रीरार्चा महायज्ञ का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस महायज्ञ को देखने, करने और इसके एकमात्र कण के प्रसाद को ग्रहण करने से फल की प्राप्ति होती है।
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