{"_id":"67470f525e880b954c0fd2d8","slug":"water-logging-work-in-hrt-and-reservoir-of-uhal-project-completed-mandi-news-c-90-1-ssml1045-141318-2024-11-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: उहल परियोजना के एचआरटी और जलाशय में जलभराव का कार्य पूरा, दिसंबर में शुरू होगा विद्युत उत्पादन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: उहल परियोजना के एचआरटी और जलाशय में जलभराव का कार्य पूरा, दिसंबर में शुरू होगा विद्युत उत्पादन
Thu, 28 Nov 2024 11:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 28 Nov 2024 11:52 AM IST
विज्ञापन
उहल परियोजना के जलाशय में भरा पानी। -संवाद
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर में उहल तृतीय पन विद्युत परियोजना में अब दिसंबर से 33.3 मेगावाट की पहली टरबाइन में विद्युत उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसकी तैयारी ब्यास वैली पावर कॉर्पोरेशन ने शुरू कर दी है। आठ किलोमीटर की एचआरटी में करीब 42 हजार क्यूसिक मीटर पानी और 1.76 हजार क्यूबिक मीटर के जलाशय में जल भराव का कार्य पूरा होने के बाद विद्युत उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।
विद्युत उत्पादन के दौरान बीते चार साल पहले क्षतिग्रस्त हुई दो किलोमीटर लंबी पैनस्टॉक का निर्माण भी नए सिरे से पूरा होने के बाद विद्युत परियोजना की संयुक्त टीम में शामिल मैकेनिक, सिविल इंजीनियर इसकी टेस्टिंग करेंगे। इसके बाद पैन स्टॉक में पानी भरने का कार्य शुरू होगा। जोगिंद्रनगर की 100 मैगावाट की इस महत्वाकांक्षी विद्युत परियोजना में दिसंबर में 33.3 मेगावाट की एक टरबाइन में विद्युत उत्पादन शुरू होगा।
इसके बाद जनवरी दो अन्य 33.3 मेगावाट की टरबाइनों में विद्युत उत्पादन का परीक्षण होगा। परीक्षण के सफल रहने के बाद 100 मैगावाट विद्युत उत्पादन शुरू हो सकेगा। परियोजना की क्षतिग्रस्त पैन स्टॉक का कार्य शत प्रतिशत पूरा होने के बाद अब इसमें फिर से विद्युत उत्पादन शुरू करने को लेकर परियोजना प्रबंधन ने तैयारियां शुरू कर दी है।
विज्ञापन
बता दें कि बीते माह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उहल परियोजना का निरीक्षण कर 80 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध करवाने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद परियोजना के पदाधिकारियों ने विद्युत उत्पादन के निर्माण कार्य में तेजी लाई है।
उहल परियोजना का 2003 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य
जोगिंद्रनगर में उहल तृतीय पन विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य 2003 में शुरू हुआ था। 2012 में परियोजना के पावर हाउस और जलाशय का निर्माण कार्य पूरा हुआ। टनल के निर्माण कार्य में आई समस्याओं के चलते विद्युत उत्पादन तय समय पर शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद मई 2020 में विद्युत उत्पादन के दौरान पैन स्टॉक फट गया और विद्युत उत्पादन की उम्मीदें टूट गई। इस हादसे में करीब एक हजार करोड़ की क्षति परियोजना प्रबंधन को हुई है। इसके बाद अब विद्युत उत्पादन के लिए चुल्हा स्थित पावर हाउस का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। खुद्दर स्थित परियोजना की करीब एक लाख 76 हजार क्यूसिक मीटर पानी की क्षमता वाले जलाशय का भी तकनीकी कार्य पूरा हो गया है।
उहल तृतीय विद्युत परियोजना में आठ किलोमीटर एचआरटी और 1.76 लाख क्यूबिक मीटर पानी की क्षमता वाले जलाशय में जलभराव का कार्य पूरा हो गया है। 33.3 मेगावाट की पहली विद्युत टरबाइन में दिसंबर से विद्युत उत्पादन शुरू होगा। जनवरी में 33.3 की दो अन्य टरबाइनों के सफल परीक्षण के बाद 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जाएगा।
-देवेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, ब्यास वैली कार्पोरेशन
विज्ञापन
विद्युत उत्पादन के दौरान बीते चार साल पहले क्षतिग्रस्त हुई दो किलोमीटर लंबी पैनस्टॉक का निर्माण भी नए सिरे से पूरा होने के बाद विद्युत परियोजना की संयुक्त टीम में शामिल मैकेनिक, सिविल इंजीनियर इसकी टेस्टिंग करेंगे। इसके बाद पैन स्टॉक में पानी भरने का कार्य शुरू होगा। जोगिंद्रनगर की 100 मैगावाट की इस महत्वाकांक्षी विद्युत परियोजना में दिसंबर में 33.3 मेगावाट की एक टरबाइन में विद्युत उत्पादन शुरू होगा।
विज्ञापन
इसके बाद जनवरी दो अन्य 33.3 मेगावाट की टरबाइनों में विद्युत उत्पादन का परीक्षण होगा। परीक्षण के सफल रहने के बाद 100 मैगावाट विद्युत उत्पादन शुरू हो सकेगा। परियोजना की क्षतिग्रस्त पैन स्टॉक का कार्य शत प्रतिशत पूरा होने के बाद अब इसमें फिर से विद्युत उत्पादन शुरू करने को लेकर परियोजना प्रबंधन ने तैयारियां शुरू कर दी है।
विज्ञापन
बता दें कि बीते माह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उहल परियोजना का निरीक्षण कर 80 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध करवाने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद परियोजना के पदाधिकारियों ने विद्युत उत्पादन के निर्माण कार्य में तेजी लाई है।
उहल परियोजना का 2003 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य
जोगिंद्रनगर में उहल तृतीय पन विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य 2003 में शुरू हुआ था। 2012 में परियोजना के पावर हाउस और जलाशय का निर्माण कार्य पूरा हुआ। टनल के निर्माण कार्य में आई समस्याओं के चलते विद्युत उत्पादन तय समय पर शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद मई 2020 में विद्युत उत्पादन के दौरान पैन स्टॉक फट गया और विद्युत उत्पादन की उम्मीदें टूट गई। इस हादसे में करीब एक हजार करोड़ की क्षति परियोजना प्रबंधन को हुई है। इसके बाद अब विद्युत उत्पादन के लिए चुल्हा स्थित पावर हाउस का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। खुद्दर स्थित परियोजना की करीब एक लाख 76 हजार क्यूसिक मीटर पानी की क्षमता वाले जलाशय का भी तकनीकी कार्य पूरा हो गया है।
उहल तृतीय विद्युत परियोजना में आठ किलोमीटर एचआरटी और 1.76 लाख क्यूबिक मीटर पानी की क्षमता वाले जलाशय में जलभराव का कार्य पूरा हो गया है। 33.3 मेगावाट की पहली विद्युत टरबाइन में दिसंबर से विद्युत उत्पादन शुरू होगा। जनवरी में 33.3 की दो अन्य टरबाइनों के सफल परीक्षण के बाद 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जाएगा।
-देवेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, ब्यास वैली कार्पोरेशन