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Mandi News: पांगणा-सुुकेत के सुईं गांव में मनाई गई पारंपरिक दिवाली
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मंडी। करसोग उपमंडल के पांगणा के सुईं गांव में स्थानीय देवता गीहनाग की अगुवाई में ग्रामीणों ने प्राचीन परंपरा व संस्कृति के साथ सामूहिक रूप से दिवाली पर्व मनाया। ग्रामीणों ने देवता का स्वागत कर रात भर नाचते गाते हुए दिवाली पर्व मनाया। सुकेत संस्कृति साहित्य और जन-कल्याण मंच पांगणा-सुुकेत के अध्यक्ष डाॅ. हिमेंद्र बाली ने कहा कि रामायण काल में जब श्रीराम रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे तो ग्रामीणों ने अयोध्या नगरी में दीप जला कर स्वागत किया था।
गींहनाग समिति के अध्यक्ष सुंदर लाल, मुख्य कारदार धर्म सिंह ठाकुर का कहना है कि गीहनाग के इस उत्सव में बही-सरही, सुईं-कुफरीधार, पांगणा, मसोग, कलाशन पंचायतों के लोग परस्पर सहभागी होते हैं। देवधुन के साथ गीहनाग के सुईं पहुचने पर सुईं दिवाली उत्सव शुरू होता है।
इस उत्सव में क्षेत्र के सभी देवी-देवता भाग लेते हैं और बुरी शक्तियों के बंधनों व उन्हें दूर भगाने के लिए देव गीतों से आहवान करते हैं। संस्कृति मर्मज्ञ डाॅ जगदीश शर्मा और मशहूर ढोलक वादक हरि सिंह गौतम का कहना है कि आज के बदलते समय में यह परंपराएं, लोकगीत, लोक गाथाएं लुप्त हो रही है, जो चिंता का विषय है।
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गींहनाग समिति के अध्यक्ष सुंदर लाल, मुख्य कारदार धर्म सिंह ठाकुर का कहना है कि गीहनाग के इस उत्सव में बही-सरही, सुईं-कुफरीधार, पांगणा, मसोग, कलाशन पंचायतों के लोग परस्पर सहभागी होते हैं। देवधुन के साथ गीहनाग के सुईं पहुचने पर सुईं दिवाली उत्सव शुरू होता है।
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इस उत्सव में क्षेत्र के सभी देवी-देवता भाग लेते हैं और बुरी शक्तियों के बंधनों व उन्हें दूर भगाने के लिए देव गीतों से आहवान करते हैं। संस्कृति मर्मज्ञ डाॅ जगदीश शर्मा और मशहूर ढोलक वादक हरि सिंह गौतम का कहना है कि आज के बदलते समय में यह परंपराएं, लोकगीत, लोक गाथाएं लुप्त हो रही है, जो चिंता का विषय है।
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