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Mandi News: स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा भाई हिरदा राम की जयंती आज, ...बोस से लिया बम बनाने का प्रशिक्षण

Thu, 28 Nov 2024 12:11 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Thu, 28 Nov 2024 12:11 AM IST
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Today is the birth anniversary of brave freedom fighter Bhai Hirda Ram
क्रांतिकारी भाई हिरदा राम। फाइल फोटो।
मंडी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारी भाई हिरदा राम की जयंती गुरुवार को मंडी की इंदिरा मार्केट की छत पर हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। सुबह 11ः00 बजे उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी जाएगी।
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भाई हिरदा राम स्मारक समिति के महासचिव एवं कार्यकारी अध्यक्ष कृष्ण कुमार नूतन ने बताया कि भाई हिरदा राम का जन्म 28 नवंबर 1885 को मंडी के गज्जन सिंह के घर हुआ था। आठवीं तक की पढ़ाई के बाद उन्होंने स्वर्णकार का काम शुरू किया। उच्च शिक्षा के लिए उनके पिता सक्षम नहीं थे, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनके लगाव को देखते हुए पिता ने उन्हें अखबार और क्रांति संबंधी साहित्य पढ़ने का अवसर दिया। इन पुस्तकों ने उनके मन में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित किया। बाद में उनका विवाह सरला देवी से हुआ था।
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रास बिहारी लाल बोस से लिया बम बनाने का प्रशिक्षण
नूतन ने बताया कि 1857 में वह स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने लगे। 1913 को युगांतर आश्रम सैन फ्रांसिस्को में गदर पार्टी की स्थापना हुई। यहीं से लाला हरदयाल ने गदर की गूंज साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया। मंडी की रानी खैरगढ़ी ने 1915 में क्रांतिकारी रास बिहारी लाल बोस से भाई हिरदा राम को बम बनाने का प्रशिक्षण के लिए भेजा। बम बनाने के लिए जंगलों को चुना जाता था, ताकि ब्रिटिश सरकार की नजर से बचा जा सके।
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आजीवन कारावास और कालापानी की सजा
ब्रिटिश सरकार को इनकी गतिविधियों की भनक लगने पर हिरदा राम को गिरफ्तार कर लाहौर जेल भेजा गया। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, लेकिन उनकी पत्नी सरला देवी की अपील पर वायसराय ने सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और उन्हें कालापानी भेजा गया। वहां उन्होंने कई यातनाएं सहने के बाद 1929 में अपने घर लौटे।


सम्मान का अभाव
भाई हिरदा राम स्मारक समिति के सदस्यों का कहना है कि देश की आजादी के बाद भी भाई हिरदा राम को कोई सरकारी सम्मान नहीं मिला। 21 अगस्त 1965 को उनका निधन हुआ। भाई हिरदा राम स्मारक समिति के महासचिव कृष्ण कुमार नूतन और उनके पोते शमशेर सिंह मन्हास ने बताया कि जयंती समारोह भव्य रूप से मनाया जाएगा, जिससे युवाओं को उनके बलिदान की जानकारी मिल सके।
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